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राही मासूम रज़ा शताब्दी वर्ष: देशभर में होंगे 100 आयोजन

नई दिल्ली : देश के प्रख्यात साहित्यकार, उपन्यासकार, कवि और पटकथा लेखक डॉ. राही मासूम रज़ा की जन्मशती वर्ष के अवसर पर नई दिल्ली में शुरू किए गए राष्ट्रीय स्तर के शताब्दी समारोह की चर्चा अब भी साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत में जारी है। समारोह के दौरान की गई घोषणा के अनुसार, देशभर में एक […]

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  • August 6, 2026 3:08 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली : देश के प्रख्यात साहित्यकार, उपन्यासकार, कवि और पटकथा लेखक डॉ. राही मासूम रज़ा की जन्मशती वर्ष के अवसर पर नई दिल्ली में शुरू किए गए राष्ट्रीय स्तर के शताब्दी समारोह की चर्चा अब भी साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत में जारी है। समारोह के दौरान की गई घोषणा के अनुसार, देशभर में एक वर्ष के दौरान 100 साहित्यिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को डॉ. राही मासूम रज़ा के साहित्य, विचारों और भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।

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नई दिल्ली के पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में आयोजित उद्घाटन समारोह में न्यायपालिका, साहित्य, कला, संगीत, प्रशासन उद्योग जगत और शिक्षा जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल हुई थीं। आयोजन संस्कृति मंत्रालय, उर्दू अकादमी दिल्ली, सावित्री ग्रुप तथा अन्य सांस्कृतिक संस्थाओं के सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम की तस्वीरें और इसकी चर्चाएं अब भी साहित्यिक मंचों और सामाजिक मीडिया पर देखने को मिल रही हैं।

समारोह की अध्यक्षता पद्म विभूषण सम्मानित नृत्यांगना एवं पूर्व सांसद डॉ. सोनल मानसिंह ने की। दीप प्रज्ज्वलन की रस्म पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति विनीत सरन ने निभाई, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया मौजूद रहे। मंच पर वरिष्ठ साहित्यकार, कलाकार, शिक्षाविद और प्रशासनिक अधिकारी, उद्योगपति सावित्री ग्रुप के चेयरमैन रविशंकर राय उपस्थित रहे, जिन्होंने राही मासूम रज़ा के साहित्यिक योगदान को याद किया।

वक्ताओं ने कहा कि राही मासूम रज़ा केवल एक लेखक नहीं थे, बल्कि भारतीय समाज की विविधता, लोकतांत्रिक मूल्यों और गंगा-जमुनी संस्कृति के सशक्त प्रतिनिधि थे। उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज के हर वर्ग की पीड़ा, संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्ति दी। यही कारण है कि उनके उपन्यास, कविताएं और पटकथाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक मानी जाती हैं जितनी अपने समय में थीं।

समारोह में यह भी कहा गया कि आज के समय में जब समाज संवाद और सामाजिक समरसता की आवश्यकता महसूस कर रहा है, तब राही मासूम रज़ा का साहित्य नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकता है। उनके लेखन में भाषा, धर्म और जाति से ऊपर उठकर इंसानियत का संदेश मिलता है।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने उनके प्रसिद्ध उपन्यासों, कविताओं और फिल्मों तथा टेलीविजन के लिए किए गए लेखन का उल्लेख किया। विशेष रूप से दूरदर्शन के लोकप्रिय धारावाहिक ‘महाभारत’ के संवाद लेखन में उनके योगदान को याद करते हुए कहा गया कि उन्होंने भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आयोजकों ने बताया कि शताब्दी वर्ष के अंतर्गत देश के विभिन्न शहरों में साहित्यिक गोष्ठियां, व्याख्यान, पुस्तक चर्चाएं, नाटक, संगीत संध्याएं, कवि सम्मेलन, छात्र प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों में विश्वविद्यालयों, साहित्यिक संस्थाओं और सांस्कृतिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी ताकि युवा पीढ़ी को राही मासूम रज़ा के विचारों से जोड़ा जा सके।

साहित्यकारों का मानना है कि राही मासूम रज़ा ने हिंदी और उर्दू के बीच सेतु का कार्य किया। उन्होंने अपनी रचनाओं में भारतीय समाज की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत की और सांप्रदायिक सौहार्द, सामाजिक न्याय तथा मानवीय मूल्यों को सबसे अधिक महत्व दिया। यही वजह है कि उनके साहित्य पर आज भी शोध और अध्ययन लगातार जारी है।

समारोह के दौरान आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में उनकी रचनाओं पर आधारित काव्य पाठ, ग़ज़ल और संगीत की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। सभागार में मौजूद साहित्य प्रेमियों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह के साथ भाग लिया और राही मासूम रज़ा की स्मृतियों को नमन किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन केवल किसी साहित्यकार को श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे नई पीढ़ी को भारतीय साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं। यही कारण है कि शताब्दी वर्ष के अंतर्गत प्रस्तावित 100 कार्यक्रमों को देशभर के साहित्यिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

आने वाले महीनों में विभिन्न राज्यों में प्रस्तावित कार्यक्रमों के माध्यम से राही मासूम रज़ा के साहित्य, उनके विचारों और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। आयोजकों को उम्मीद है कि यह अभियान देशभर के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों को एक साझा मंच प्रदान करेगा, जहां वे भारतीय साहित्य की इस महान विभूति को नए दृष्टिकोण से समझ सकेंगे।

इस प्रकार, उद्घाटन समारोह भले ही संपन्न हो चुका हो, लेकिन डॉ. राही मासूम रज़ा की जन्मशती वर्ष की यह सांस्कृतिक यात्रा अब पूरे देश में आगे बढ़ रही है। वर्षभर होने वाले कार्यक्रम न केवल उनकी साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाएंगे, बल्कि भारतीय संस्कृति, भाषा और सामाजिक सद्भाव के संदेश को भी मजबूत करेंगे।

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