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VIDEO कॉल पर पिता का अंतिम संस्कार! बेटियों के फैसले ने चौंकाया

हरियाणा। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि हरियाणा के एक व्यापारी की तीन बेटियों ने अपने पिता के अंतिम संस्कार में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के बजाय वीडियो कॉल के माध्यम से अंतिम दर्शन किए। वायरल पोस्ट के अनुसार, बेटियों […]

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  • August 6, 2026 4:18 pm IST, Published 49 minutes ago

हरियाणा। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि हरियाणा के एक व्यापारी की तीन बेटियों ने अपने पिता के अंतिम संस्कार में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के बजाय वीडियो कॉल के माध्यम से अंतिम दर्शन किए। वायरल पोस्ट के अनुसार, बेटियों ने दूरी और समय का हवाला देते हुए श्मशान घाट नहीं पहुंचने का निर्णय लिया और अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया वीडियो कॉल के जरिए देखी।

वायरल वीडियो में एक मोबाइल फोन की स्क्रीन पर वीडियो कॉल चलती दिखाई देती है। दूसरी ओर श्मशान घाट में अंतिम संस्कार की तैयारियां होती नजर आती हैं। दावा किया जा रहा है कि इसी वीडियो कॉल के माध्यम से बेटियों ने अपने पिता के अंतिम दर्शन किए और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया देखी। यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

वायरल पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि तीनों बेटियों ने अंतिम संस्कार में शामिल होने के बजाय ₹5100 की आर्थिक सहायता भेजी और परिवार से अनुरोध किया कि सभी धार्मिक रीति-रिवाज ठीक प्रकार से पूरे कर दिए जाएं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इस वायरल दावे को तथ्यात्मक रूप से सत्यापित मानना उचित नहीं होगा।

बताया जा रहा है कि व्यापारी के निधन के बाद परिजनों ने बेटियों को अंतिम संस्कार की सूचना दी थी। लेकिन कथित तौर पर उन्होंने लंबी दूरी, समय की कमी और अन्य निजी कारणों का हवाला देते हुए मौके पर पहुंचने में असमर्थता जताई। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था की और वीडियो कॉल के जरिए बेटियों को पूरी प्रक्रिया दिखाई गई।

इस घटना के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोगों का कहना है कि आधुनिक तकनीक ने दूर बैठे लोगों को भी अंतिम विदाई का अवसर उपलब्ध कराया है और यदि किसी के सामने वास्तविक परिस्थितियां हों तो वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़ना भी एक भावनात्मक विकल्प हो सकता है। वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने इसे भारतीय पारिवारिक और सांस्कृतिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए आलोचना की।

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में नौकरी, विदेश प्रवास और लंबी दूरी जैसी परिस्थितियों के कारण कई परिवार ऐसे फैसले लेने को मजबूर हो जाते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी अनेक लोगों ने अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार को ऑनलाइन माध्यम से देखा था। हालांकि सामान्य परिस्थितियों में अंतिम संस्कार में व्यक्तिगत उपस्थिति को भारतीय समाज में विशेष महत्व दिया जाता है।

धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी अंतिम संस्कार केवल एक रस्म नहीं बल्कि परिवार की भावनाओं और जिम्मेदारियों से जुड़ा संस्कार माना जाता है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं समाज में स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाती हैं। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि परिस्थितियां वास्तव में मजबूरी वाली थीं तो परिवार के निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए, जबकि कुछ अन्य लोगों ने इसे संवेदनहीनता का उदाहरण बताया।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर संबंधित परिवार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। वायरल वीडियो और पोस्ट में किए जा रहे कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी उपलब्ध नहीं है। इसलिए पाठकों को सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी सामग्री पर विश्वास करने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत और तथ्यों की जांच अवश्य करनी चाहिए।

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि बदलती जीवनशैली और तकनीक के दौर में पारिवारिक रिश्तों और पारंपरिक संस्कारों का स्वरूप किस तरह बदल रहा है। वीडियो कॉल जैसी तकनीक लोगों को दूर रहकर भी जोड़ने का माध्यम बन रही है, लेकिन भावनात्मक और सामाजिक दृष्टि से ऐसे फैसले आज भी लोगों के बीच गहन चर्चा और बहस का विषय बने हुए हैं।

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