• होम
  • देश
  • जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों पर सरकार सख्त, मरीजों को बड़ी राहत

जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों पर सरकार सख्त, मरीजों को बड़ी राहत

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने जीवन रक्षक और आवश्यक दवाओं को आम लोगों तक किफायती दरों पर पहुंचाने के लिए मूल्य नियंत्रण, गुणवत्ता निगरानी और सस्ती दवा योजनाओं को और मजबूत करने पर जोर दिया है। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित कर […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • August 8, 2026 10:10 am IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने जीवन रक्षक और आवश्यक दवाओं को आम लोगों तक किफायती दरों पर पहुंचाने के लिए मूल्य नियंत्रण, गुणवत्ता निगरानी और सस्ती दवा योजनाओं को और मजबूत करने पर जोर दिया है। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित कर रहा है, जबकि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना और अमृत फार्मेसी जैसी योजनाओं के माध्यम से मरीजों को कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संसद में बताया कि दवाओं की कीमतों का निर्धारण औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के तहत किया जाता है। इसके अनुसार आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम) में शामिल दवाओं की अधिकतम कीमत तय की जाती है, ताकि मरीजों को जरूरी दवाएं उचित मूल्य पर मिल सकें।

सरकार के अनुसार, जुलाई 2026 तक 935 आवश्यक दवाओं की अधिकतम कीमतें प्रभावी हैं। एनएलईएम-2022 के आधार पर कीमतों के पुनर्निर्धारण के बाद इन दवाओं की औसत कीमत में लगभग 17 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इससे आम मरीजों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है। नई दवाओं की कीमतों को भी नियामकीय प्रक्रिया के तहत तय किया जा रहा है। अब तक 3,845 नई दवाओं के खुदरा मूल्य निर्धारित किए जा चुके हैं। इन कीमतों से अधिक पर संबंधित दवा बेचने की अनुमति नहीं होगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि गैर-अनुसूचित दवाओं के मामले में निर्माता किसी दवा के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में 12 महीनों के दौरान 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि नहीं कर सकते। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में ऐसी दवाओं की औसत वार्षिक मूल्य वृद्धि लगभग 6.94 प्रतिशत रही, जो निर्धारित सीमा से कम है। एनपीपीए नियमित रूप से दवाओं की कीमतों की निगरानी करता है। यदि कोई कंपनी निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलती है, तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाती है।

सस्ती दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत देशभर में जनऔषधि केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में लगभग 50 से 80 प्रतिशत तक कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा, अमृत (Affordable Medicines and Reliable Implants for Treatment) योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में संचालित अमृत फार्मेसी स्टोरों से कैंसर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार में उपयोग होने वाली दवाएं, इम्प्लांट और अन्य चिकित्सा सामग्री बाजार मूल्य की तुलना में औसतन 50 प्रतिशत तक कम दरों पर उपलब्ध कराई जाती हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निःशुल्क औषधि सेवा पहल के अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक आवश्यक दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी जारी है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

सरकार ने दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी सख्त निगरानी का दावा किया है। राज्य औषधि नियंत्रकों द्वारा नियमित निरीक्षण और नमूनों की जांच की जाती है। पिछले तीन वर्षों में लाखों दवा नमूनों की जांच की गई, जिनमें कुछ नमूने गैर-मानक गुणवत्ता, नकली या मिलावटी पाए गए। ऐसे मामलों में संबंधित कंपनियों और संस्थानों के खिलाफ लाइसेंस निलंबन, रद्द करने और कानूनी कार्रवाई की गई।

सरकार का कहना है कि दवा निर्माण, बिक्री और वितरण की पूरी व्यवस्था लाइसेंस प्रणाली के तहत संचालित होती है और समय-समय पर निरीक्षण के जरिए नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता है। इससे मरीजों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और किफायती दवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

 

Advertisement