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लाल किले से पहली बार वंदे मातरम, एकनाथ शिंदे ने बताया ऐतिहासिक क्षण

मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह देश के नागरिकों के लिए गर्व का विषय है। शिंदे ने स्वतंत्रता आंदोलन में ‘वंदे मातरम’ की भूमिका का उल्लेख […]

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  • August 11, 2026 1:35 pm IST, Published 1 hour ago

मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह देश के नागरिकों के लिए गर्व का विषय है। शिंदे ने स्वतंत्रता आंदोलन में ‘वंदे मातरम’ की भूमिका का उल्लेख करते हुए इसे देशभक्ति और प्रेरणा से जोड़कर देखा।

शिंदे के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से पहली बार ‘वंदे मातरम’ का गायन होना एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से देश के स्वतंत्रता संघर्ष की यादें और उससे जुड़ी भावनाएं फिर से लोगों के सामने आएंगी। उन्होंने कार्यक्रम का स्वागत करते हुए इसे राष्ट्रीय गौरव से जुड़ा विषय बताया।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम’ के इस्तेमाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में बड़ी संख्या में स्वतंत्रता सेनानियों ने इस नारे को अपनी प्रेरणा बनाया। उनके अनुसार, अनेक क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और उस दौर में राष्ट्रभक्ति के नारों ने लोगों में संघर्ष की भावना को मजबूत किया।

शिंदे ने कहा कि भारत को आजादी आसानी से नहीं मिली। स्वतंत्रता आंदोलन में अलग-अलग विचारधाराओं और क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने योगदान दिया। लंबे संघर्ष, आंदोलन और बलिदानों के बाद देश स्वतंत्र हुआ। ‘वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना से जुड़े इस गीत का इस्तेमाल स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रवादी भावना को व्यक्त करने के लिए किया गया था। समय के साथ यह गीत भारत की राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति से जुड़े प्रमुख प्रतीकों में शामिल हो गया।

शिंदे ने अपने बयान में यह भी कहा कि ऐसे आयोजन का विरोध नहीं किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और देश के प्रति उनके समर्पण को याद करना सभी नागरिकों के लिए प्रेरणा का विषय होना चाहिए। उन्होंने इसे राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना से जोड़ते हुए लोगों से सकारात्मक दृष्टिकोण रखने की अपील की।

लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस का संबोधन और राष्ट्रीय कार्यक्रम हर वर्ष देश के लिए विशेष महत्व रखते हैं। प्रधानमंत्री इसी ऐतिहासिक स्थल से राष्ट्र को संबोधित करते हैं और सरकार की प्राथमिकताओं तथा भविष्य की दिशा को लेकर अपनी बात रखते हैं। ऐसे में इस अवसर पर किसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय गीत या प्रतीक को विशेष रूप से सामने लाने की योजना राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन सकती है।

महाराष्ट्र में भी स्वतंत्रता दिवस को लेकर विभिन्न कार्यक्रमों की तैयारियां होती हैं। ऐसे में उपमुख्यमंत्री का बयान राज्य में इस आयोजन को लेकर सरकार के रुख को स्पष्ट करता है। उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज, स्वतंत्रता संग्राम और देशभक्ति से जुड़े प्रतीकों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि, किसी भी राष्ट्रीय आयोजन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक विचार सामने आ सकते हैं।

एकनाथ शिंदे के बयान के बाद यह मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन सकता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से इस आयोजन का समर्थन किया है और इसे देश के लिए गर्व तथा प्रेरणा का अवसर बताया है। शिंदे ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए इसका स्वागत किया है। अब इस आयोजन को लेकर आगे होने वाली तैयारियों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजर रहेगी।

 

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