• होम
  • महाराष्ट्र
  • वर्ली के मुद्दों पर BMC कमिश्नर से मिले आदित्य ठाकरे, टैबलेट पर निशाना

वर्ली के मुद्दों पर BMC कमिश्नर से मिले आदित्य ठाकरे, टैबलेट पर निशाना

मुंबई: मुंबई महानगरपालिका (BMC) को पेपरलेस प्रशासन की दिशा में ले जाने की तैयारी के बीच शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने नगर निगम के कामकाज और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने BMC कमिश्नर अश्विनी भिड़े के साथ हुई बैठक में वर्ली से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान वर्ली के विधायक […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • August 10, 2026 6:22 pm IST, Published 59 minutes ago

मुंबई: मुंबई महानगरपालिका (BMC) को पेपरलेस प्रशासन की दिशा में ले जाने की तैयारी के बीच शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने नगर निगम के कामकाज और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने BMC कमिश्नर अश्विनी भिड़े के साथ हुई बैठक में वर्ली से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान वर्ली के विधायक और नगर निगम पार्षद भी उनके साथ मौजूद रहे।

आदित्य ठाकरे ने बताया कि बैठक में वर्ली से जुड़े कई स्थानीय विषयों को प्रशासन के सामने रखा गया। इनमें क्षेत्र से संबंधित नागरिक सुविधाएं और स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याएं शामिल थीं। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच नियमित संवाद के जरिए स्थानीय समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है।

बैठक के दौरान BMC के डिजिटल बदलाव का मुद्दा भी चर्चा में आया। नगर निगम प्रशासन को पेपरलेस बनाने की योजना के तहत सभी BMC पार्षदों को टैबलेट उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम करना और निगम की बैठकों तथा प्रशासनिक कामकाज को डिजिटल माध्यम से संचालित करना बताया जा रहा है।

हालांकि, टैबलेट वितरण के मुद्दे पर आदित्य ठाकरे ने अपने पिछले कार्यकाल का उदाहरण देते हुए सरकार और प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उनके नगर निगम कार्यकाल के दौरान पांचवीं से दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को टैबलेट उपलब्ध कराए गए थे। उनके मुताबिक इन टैबलेट को अलग-अलग भाषाओं में इस्तेमाल करने की सुविधा दी गई थी, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल संसाधनों को बढ़ावा देने की कोशिश की गई।

आदित्य ठाकरे ने इसी संदर्भ में अधिकारियों के लिए टैबलेट उपलब्ध कराने की मौजूदा पहल पर टिप्पणी की। उनका कहना था कि पहले डिजिटल उपकरणों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया था, जबकि अब नगर निगम के अधिकारी अपने कामकाज के लिए टैबलेट प्राप्त कर रहे हैं। इस बयान के जरिए उन्होंने प्रशासन की डिजिटल प्राथमिकताओं की तुलना शिक्षा क्षेत्र में किए गए पुराने प्रयासों से की।

BMC में डिजिटल व्यवस्था लागू करने की कवायद को प्रशासनिक सुधार के तौर पर देखा जा रहा है। यदि निगम का कामकाज बड़े स्तर पर डिजिटल होता है तो दस्तावेजों के प्रबंधन, बैठकों की जानकारी, प्रस्तावों और प्रशासनिक संचार को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही कागज के इस्तेमाल में कमी आने से समय और संसाधनों की बचत की संभावना भी है।

हालांकि, किसी भी डिजिटल परिवर्तन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसका इस्तेमाल किस तरह किया जाता है। पार्षदों को टैबलेट मिलने के बाद निगम की बैठकों में प्रस्ताव, रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज डिजिटल रूप में उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इससे पार्षदों को जरूरी जानकारी तक तेजी से पहुंच मिल सकती है और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

दूसरी ओर, आदित्य ठाकरे के बयान ने डिजिटल संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस को भी सामने ला दिया है। उनके अनुसार तकनीक का इस्तेमाल केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शिक्षा और आम नागरिकों तक डिजिटल सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। बैठक में वर्ली के स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ इन विषयों को उठाया। उनका कहना है कि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर BMC प्रशासन के साथ चर्चा की गई है। अब इन मुद्दों पर प्रशासन की ओर से किस तरह की कार्रवाई होती है, यह आगे महत्वपूर्ण होगा।

कुल मिलाकर, BMC में पेपरलेस व्यवस्था की तैयारी और पार्षदों को टैबलेट देने का फैसला मुंबई के नागरिक प्रशासन को डिजिटल बनाने की दिशा में एक कदम है। वहीं, आदित्य ठाकरे की टिप्पणी ने यह सवाल भी उठाया है कि डिजिटल तकनीक का लाभ प्रशासन के साथ-साथ शिक्षा और आम लोगों तक किस तरह पहुंचाया जाए। आने वाले समय में BMC की डिजिटल व्यवस्था किस हद तक प्रभावी होती है और स्थानीय समस्याओं के समाधान में इसका कितना फायदा मिलता है, इस पर नजर रहेगी।

 

 

Advertisement