मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को राहत देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर कृषि कर्ज माफी योजना’ के तहत पहली किस्त जारी कर दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जानकारी दी कि योजना के अंतर्गत पात्र किसानों के खातों में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की गई है। उन्होंने कहा कि आधार प्रमाणीकरण (आधार ऑथेंटिकेशन) की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अन्य किसानों को भी इस योजना का लाभ लगातार मिलता रहेगा।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि राज्य सरकार ने किसानों के कृषि ऋण के बोझ को कम करने और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह योजना लागू की है। योजना की पहली सूची में लगभग 16 लाख किसानों के नाम शामिल किए गए थे। इसके बाद लाभार्थियों का आधार प्रमाणीकरण सुनिश्चित करने के लिए सूची को जिला और स्थानीय स्तर पर भेजा गया।
सरकार के अनुसार, अब तक करीब 6.22 लाख किसानों का आधार ऑथेंटिकेशन पूरा हो चुका है। प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन किसानों के बैंक खातों में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे जमा कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और सही लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से अपनाई गई है।
फडणवीस ने कहा कि जिन किसानों का आधार प्रमाणीकरण अभी बाकी है, उनका सत्यापन पूरा होते ही उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से राशि जारी कर दी जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार का उद्देश्य किसी भी पात्र किसान को योजना के लाभ से वंचित नहीं रहने देना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों की आर्थिक मजबूती सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि ऋण माफी योजना का उद्देश्य केवल कर्ज का बोझ कम करना नहीं, बल्कि किसानों को नई शुरुआत का अवसर देना भी है, ताकि वे खेती-किसानी के कार्यों को बेहतर ढंग से आगे बढ़ा सकें।
राज्य सरकार का कहना है कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना भी कम होगी। आधार प्रमाणीकरण को इसी उद्देश्य से अनिवार्य बनाया गया है, ताकि लाभ सही पात्र व्यक्ति तक पहुंचे।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो इससे किसानों को आर्थिक राहत मिल सकती है। हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि ऋण माफी के साथ-साथ सिंचाई, आधुनिक कृषि तकनीक, फसल बीमा और बाजार तक बेहतर पहुंच जैसी दीर्घकालिक नीतियों पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जैसे-जैसे आधार ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे शेष पात्र किसानों के खातों में भी राशि स्थानांतरित की जाती रहेगी। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि प्रमाणीकरण प्रक्रिया को तेज किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान जल्द योजना का लाभ प्राप्त कर सकें।
फिलहाल, योजना की पहली किस्त जारी होने के साथ लाखों किसानों को राहत मिली है। अब राज्य सरकार की प्राथमिकता शेष पात्र किसानों का सत्यापन पूरा कर उन्हें भी जल्द से जल्द कृषि ऋण माफी का लाभ उपलब्ध कराना है।