Nifty क्लोजिंग पर बड़ा सवाल, SEBI जांच में जुटा

मुंबईः भारतीय शेयर बाजार में Closing Auction Session यानी CAS को लेकर नियामक की निगरानी बढ़ गई है। SEBI ने 3 और 4 अगस्त के ट्रेडिंग डेटा की जांच शुरू की है। इन दोनों कारोबारी दिनों में बाजार बंद होने के आसपास Nifty में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। अब regulator यह पता लगाने […]

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  • August 12, 2026 12:59 pm IST, Published 2 hours ago

मुंबईः भारतीय शेयर बाजार में Closing Auction Session यानी CAS को लेकर नियामक की निगरानी बढ़ गई है। SEBI ने 3 और 4 अगस्त के ट्रेडिंग डेटा की जांच शुरू की है। इन दोनों कारोबारी दिनों में बाजार बंद होने के आसपास Nifty में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। अब regulator यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि closing के दौरान हुई यह गतिविधि सामान्य price discovery का हिस्सा थी या फिर किसी रणनीति के तहत closing price को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

CAS बाजार की उस प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें कारोबारी दिन के अंतिम चरण में orders और trades के आधार पर closing price तय होती है। ऐसे में इस अवधि के दौरान होने वाली बड़ी trading activity का अंतिम बाजार भाव पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि closing के आसपास अचानक होने वाले बड़े price movements पर regulatory authorities की नजर रहती है।

3 और 4 अगस्त को Nifty में market close के आसपास हुए बड़े movement के बाद अब trading data की जांच की जा रही है। बाजार में price movement के पीछे कई सामान्य कारण हो सकते हैं। Institutional investors की activity, global market cues, derivatives positioning, बड़े orders, portfolio rebalancing और liquidity में बदलाव इसके संभावित कारण हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ तेज movement को देखकर किसी तरह की गड़बड़ी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

हालांकि, जब closing के बेहद करीब किसी index या security में असामान्य trading activity दिखाई देती है, तो regulator यह देख सकता है कि क्या किसी participant ने जानबूझकर closing price पर प्रभाव डालने की कोशिश की। इसी वजह से 3 और 4 अगस्त की गतिविधियों का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है।

इस जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू cash market और derivatives market के बीच संभावित संबंध भी हो सकता है। यदि किसी trader या entity के पास futures या options में बड़ी position है, तो underlying market में कीमतों का बदलाव उसके लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में regulator यह देख सकता है कि क्या किसी participant ने cash market में ऐसी buying या selling की, जिसका संभावित लाभ उसकी derivatives positions को मिल सकता था।

हालांकि cash और derivatives दोनों खंडों में एक साथ positions होना अपने आप में किसी गलत गतिविधि का सबूत नहीं है। बड़े institutional investors, proprietary traders और अन्य market participants अलग-अलग वैध trading और hedging strategies के तहत दोनों खंडों में कारोबार कर सकते हैं। इसलिए केवल positions के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है। 

जांच के दौरान regulator कई स्तरों पर trading pattern को देख सकता है। इसमें यह शामिल हो सकता है कि किन participants ने closing से पहले बड़े orders लगाए, किस समय orders में बदलाव किया गया, कितने trades execute हुए और इन transactions का price पर कितना प्रभाव पड़ा। इसके साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि संबंधित entities की derivatives positions क्या थीं और cash market में उनकी activity के साथ उनका कोई असामान्य संबंध था या नहीं।

Closing price बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसका इस्तेमाल कई तरह की calculations और valuation में किया जाता है। Stocks और index derivatives, portfolio valuation, fund performance तथा अन्य market-related calculations में closing levels की भूमिका होती है। इसी कारण closing के आसपास होने वाली असामान्य गतिविधि market surveillance के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

SEBI की जांच के दौरान यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित trades किसी व्यापक market event का हिस्सा थे या कुछ चुनिंदा participants की activity ने price movement को प्रभावित किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि SEBI द्वारा जांच शुरू किए जाने का मतलब यह नहीं है कि किसी trader या entity पर manipulation का आरोप साबित हो गया है। नियामक जांच का उद्देश्य उपलब्ध तथ्यों और ट्रेडिंग रिकॉर्ड की जांच करना होता है। इसके बाद ही यह निर्धारित किया जा सकता है कि किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

3 और 4 अगस्त के Nifty moves को लेकर बाजार की नजर SEBI की जांच पर है। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि closing के आसपास cash market में हुई trading और derivatives positions के बीच कोई असामान्य संबंध सामने आता है या नहीं। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता नहीं मिलती है, तो यह निष्कर्ष निकल सकता है कि संबंधित price movement सामान्य market activity, liquidity या अन्य वैध कारणों से हुआ था। वहीं अगर regulator को नियमों के उल्लंघन के पर्याप्त संकेत मिलते हैं, तो आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और सबूतों के आधार पर की जा सकती है।

फिलहाल इस मामले में किसी व्यक्ति, trader या संस्था को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। असली तस्वीर SEBI की जांच पूरी होने और उसके निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि बाजार बंद  के दौरान होने वाली बड़ी trading activity price discovery को किस तरह प्रभावित करती है और इसे लेकर नियामक निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है।

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