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पशुधन क्षेत्र को नई रफ्तार, 50 लाख से अधिक किसानों को KCC का लाभ

नई दिल्ली: केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने देश के पशुधन क्षेत्र में हाल के वर्षों में हुई प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार संस्थागत ऋण, वैज्ञानिक प्रजनन, डिजिटल प्रशिक्षण, पशु स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है। […]

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  • August 12, 2026 11:42 am IST, Published 42 minutes ago

नई दिल्ली: केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने देश के पशुधन क्षेत्र में हाल के वर्षों में हुई प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार संस्थागत ऋण, वैज्ञानिक प्रजनन, डिजिटल प्रशिक्षण, पशु स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है। मंत्रालय के अनुसार इन पहलों का उद्देश्य पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पशुधन उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।

पशुपालन से जुड़े किसानों के लिए संस्थागत ऋण की पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC के लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 50.42 लाख हो गई, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा 15.08 लाख था। सरकार के मुताबिक KCC के माध्यम से पशुपालकों को उनकी कार्यशील पूंजी और पशुधन संबंधी जरूरतों के लिए औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिल रही है।

भारत के डेयरी क्षेत्र में भी उत्पादन बढ़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में देश का वार्षिक दूध उत्पादन 247.87 मिलियन टन तक पहुंच गया। इसी अवधि में घरेलू मांग करीब 243 मिलियन टन बताई गई। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में डेयरी उत्पादों का कुल निर्यात 407.18 मिलियन डॉलर रहा।

सरकार का जोर केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुओं की नस्ल सुधार, बेहतर चारा, पशु आहार और वैज्ञानिक प्रजनन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) महत्वपूर्ण योजना के तौर पर लागू है। दिसंबर 2014 से संचालित इस मिशन का उद्देश्य स्वदेशी नस्लों का संरक्षण एवं विकास, पशुधन की आनुवंशिक क्षमता में सुधार और दूध उत्पादन तथा उत्पादकता बढ़ाना है।

राष्ट्रीय पशुधन मिशन यानी NLM के जरिए भी वैज्ञानिक पशुपालन और उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के तहत नस्ल विकास, चारा एवं पशु आहार, अनुसंधान, पशुधन बीमा और विस्तार गतिविधियों पर ध्यान दिया जाता है। इसका उद्देश्य प्रति पशु उत्पादकता बढ़ाने के साथ मांस, बकरी के दूध, अंडे और ऊन जैसे उत्पादों का उत्पादन बढ़ाना भी है।

NLM के तहत उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, संयुक्त देयता समूहों, किसान सहकारी संगठनों और अन्य पात्र संस्थाओं को परियोजनाओं के लिए 50 प्रतिशत तक पूंजी सब्सिडी का प्रावधान है। सरकार का मानना है कि इससे पशुधन आधारित व्यवसायों को संगठित क्षेत्र से जोड़ने और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

पशु स्वास्थ्य को लेकर भी सरकार ने रोग नियंत्रण और टीकाकरण पर जोर दिया है। पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) के तहत आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पशु रोगों की रोकथाम के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता दी जा रही है। इनमें खुरपका-मुंहपका रोग, ब्रुसेलोसिस, PPR और क्लासिकल स्वाइन फीवर जैसे रोग शामिल हैं।

तमिलनाडु में पशुधन स्वास्थ्य सेवाओं को किसानों के घर तक पहुंचाने के लिए 245 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (MVU) के संचालन में केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय सहायता दी जा रही है। इन मोबाइल इकाइयों का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालकों को समय पर पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है।

डिजिटल माध्यम से किसानों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 6.4 लाख किसानों ने डिजिटल प्रशिक्षण में भाग लिया है। इससे पशुपालकों को आधुनिक तकनीक, पशु स्वास्थ्य, प्रबंधन और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

सरकार की इन पहलों का व्यापक लक्ष्य पशुधन क्षेत्र को अधिक उत्पादक, तकनीकी रूप से सक्षम और आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है। KCC के विस्तार से लेकर वैज्ञानिक प्रजनन, बेहतर चारा, टीकाकरण और घर-घर पशु चिकित्सा सेवाओं तक, विभिन्न योजनाओं को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। आने वाले समय में इन प्रयासों की सफलता इस बात से तय होगी कि योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से पशुपालकों तक पहुंचता है और उनकी आय व उत्पादकता में कितना वास्तविक सुधार आता है।

 

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