NCERT में 1,596 पद खाली, CBSE में 44% पद रिक्त; बड़ा खुलासा

नई दिल्ली: देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी दो प्रमुख संस्थाओं NCERT और CBSE में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की कमी का मामला सामने आया है। संसद की अनुमान समिति (Committee on Estimates) की रिपोर्ट में दोनों संस्थानों में बड़ी संख्या में पद खाली होने पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, NCERT […]

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  • August 14, 2026 11:28 am IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी दो प्रमुख संस्थाओं NCERT और CBSE में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की कमी का मामला सामने आया है। संसद की अनुमान समिति (Committee on Estimates) की रिपोर्ट में दोनों संस्थानों में बड़ी संख्या में पद खाली होने पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, NCERT में 1,596 पद रिक्त हैं, जबकि CBSE के करीब 44 प्रतिशत स्वीकृत पद खाली पड़े हैं। समिति ने इन रिक्तियों को समयबद्ध तरीके से भरने की जरूरत बताई है।

NCERT में 2,844 पदों में से 1,596 खाली

रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2025 तक NCERT में कुल 2,844 पद स्वीकृत थे। इनमें से सिर्फ 1,248 पदों पर कर्मचारी कार्यरत थे, जबकि 1,596 पद खाली थे। यानी संस्थान की स्वीकृत कर्मचारी क्षमता का 56 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रिक्त था। समिति ने इसे गंभीर विषय मानते हुए शिक्षा मंत्रालय से तत्काल ध्यान देने और नियुक्ति प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत बताई है।

NCERT देश में पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों और शैक्षिक ढांचे को विकसित करने वाली महत्वपूर्ण संस्था है। ऐसे में यहां लंबे समय तक बड़ी संख्या में पद खाली रहने से संस्थान की कार्यक्षमता और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

रिपोर्ट में बताया गया कि NCERT की रिक्तियों में 145 अकादमिक पद, 131 स्कूल शिक्षण पद, 916 मंत्रालयी/मिनिस्टीरियल पद और 404 सहायक पद शामिल हैं। इससे साफ है कि कमी केवल किसी एक वर्ग के कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थान के अलग-अलग स्तरों पर मानव संसाधन की कमी बनी हुई है।

CBSE में 933 पद खाली, 44 फीसदी सीटें रिक्त

संसदीय समिति ने CBSE में भी कर्मचारियों की कमी पर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार CBSE में 2,117 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 933 पद खाली हैं। यह कुल स्वीकृत पदों का लगभग 44 प्रतिशत है। सबसे ज्यादा रिक्तियां ग्रुप-सी के सपोर्ट स्टाफ में हैं, जहां 595 पद खाली बताए गए हैं।

CBSE देश के सबसे बड़े स्कूली शिक्षा बोर्डों में शामिल है और लाखों विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षाओं, संबद्ध स्कूलों तथा परीक्षा संबंधी व्यवस्थाओं से सीधे जुड़ा है। ऐसे में स्थायी कर्मचारियों की कमी का असर प्रशासनिक कामकाज से लेकर परीक्षा संचालन तक पड़ सकता है।

समिति ने खास तौर पर इस बात पर चिंता जताई कि CBSE रोजमर्रा के कामकाज के लिए अस्थायी और संविदा कर्मचारियों पर निर्भर है। समिति के मुताबिक संवेदनशील परीक्षा संबंधी कार्यों में स्थायी कर्मचारियों की कमी सुरक्षा, गुणवत्ता और राष्ट्रीय स्तर की बोर्ड परीक्षाओं के सुचारु संचालन के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।

CBSE का विस्तार हुआ, लेकिन कर्मचारियों की कमी बरकरार

रिपोर्ट में CBSE के बढ़ते दायरे और कर्मचारियों की कमी के बीच के अंतर को भी रेखांकित किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक CBSE से संबद्ध स्कूलों की संख्या 1992-93 में 3,787 से बढ़कर 2024-25 में 31,234 हो गई। इसके साथ ही बोर्ड ने अपनी प्रशासनिक पहुंच बढ़ाते हुए 25 क्षेत्रीय कार्यालय और पांच उप-क्षेत्रीय कार्यालय भी विकसित किए हैं।

विद्यार्थियों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में कक्षा 12 के विद्यार्थियों की संख्या 1.70 मिलियन से अधिक, जबकि कक्षा 10 के विद्यार्थियों की संख्या 2.38 मिलियन से अधिक रही। ऐसे समय में जब CBSE का दायरा और जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, कर्मचारियों की इतनी बड़ी कमी समिति के लिए चिंता का कारण बनी है।

NEP 2020 से जुड़े काम पर भी असर की चिंता

NCERT की भूमिका केवल किताबें तैयार करने तक सीमित नहीं है। यह देश की शिक्षा नीति और पाठ्यक्रम विकास से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान देता है। शिक्षा मंत्रालय ने समिति को बताया कि NCERT ने National Curriculum Framework for Foundational Stage (NCFFS) और National Curriculum Framework for School Education (NCFSE) विकसित किए हैं। इन ढांचों के आधार पर पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों के विकास का काम भी आगे बढ़ रहा है।

ऐसे में समिति ने माना कि NCERT जैसी राष्ट्रीय स्तर की संस्था में बड़ी संख्या में पद खाली रहना गंभीर विषय है। रिपोर्ट में मंत्रालय से रिक्तियों को भरने के लिए गंभीर प्रयास करने की अपेक्षा की गई है।

समिति ने भर्ती प्रक्रिया तेज करने को कहा

संसदीय समिति ने दोनों संस्थानों में रिक्त पदों को लंबे समय तक खाली रखने के बजाय समयबद्ध और फास्ट-ट्रैक भर्ती प्रक्रिया अपनाने की सिफारिश की है। खास तौर पर CBSE को संवेदनशील परीक्षा संबंधी कार्यों के लिए अस्थायी कर्मचारियों पर निर्भरता कम करने और स्थायी नियुक्तियां करने की जरूरत बताई गई है।

यह मामला उन युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है जो सरकारी और शिक्षा क्षेत्र की नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, समिति की रिपोर्ट में रिक्त पदों का उल्लेख होने का मतलब यह नहीं है कि इन सभी पदों पर तत्काल भर्ती का विज्ञापन जारी हो गया है। उम्मीदवारों को किसी भी भर्ती के लिए संबंधित संस्थान की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

NCERT और CBSE दोनों देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। एक ओर NCERT पाठ्यक्रम और शैक्षिक सामग्री के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, वहीं CBSE बोर्ड परीक्षाओं और हजारों संबद्ध स्कूलों की व्यवस्था संभालता है। ऐसे में दोनों संस्थानों में लंबे समय तक बड़ी संख्या में पद खाली रहना केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और कार्यक्षमता से जुड़ा विषय भी है।

संसदीय समिति की रिपोर्ट ने अब इस कमी को सामने ला दिया है। NCERT में 1,596 और CBSE में 933 पद खाली होने के आंकड़े बताते हैं कि दोनों संस्थानों में मानव संसाधन को मजबूत करने की आवश्यकता है। अब निगाह शिक्षा मंत्रालय और संबंधित संस्थानों पर रहेगी कि इन रिक्तियों को भरने के लिए कितनी तेजी से ठोस कदम उठाए जाते हैं।

नोट: यह खबर 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में पेश की गई अनुमान समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर प्रकाशित रिपोर्टों में उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है।

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