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AI की रेस में भारत आगे, फिर क्यों सिर्फ 20% बना रहे टूल्स?

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब भारत में सिर्फ भविष्य की तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि रोजमर्रा के काम और प्रोफेशनल लाइफ का हिस्सा बनती जा रही है। लोग कंटेंट लिखने, जानकारी खोजने, डेटा समझने, प्रेजेंटेशन तैयार करने, कोडिंग और दूसरे कामों में AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं। लेकिन […]

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  • August 16, 2026 9:55 pm IST, Published 7 minutes ago

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब भारत में सिर्फ भविष्य की तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि रोजमर्रा के काम और प्रोफेशनल लाइफ का हिस्सा बनती जा रही है। लोग कंटेंट लिखने, जानकारी खोजने, डेटा समझने, प्रेजेंटेशन तैयार करने, कोडिंग और दूसरे कामों में AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं। लेकिन AI के इस्तेमाल को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बड़ी संख्या में लोग AI का इस्तेमाल तो कर रहे हैं, लेकिन AI की मदद से खुद कुछ बनाने वालों की संख्या अभी काफी कम है।

upGrad की Skill Shift रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे में शामिल 2,075 लोगों में से 94 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें से करीब 53 प्रतिशत लोग AI का रोजाना इस्तेमाल करते हैं। यानी AI को लेकर भारतीय यूजर्स की दिलचस्पी और स्वीकार्यता काफी तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, जब बात AI को सिर्फ इस्तेमाल करने से आगे बढ़कर उससे कोई ऑटोमेशन, एजेंट या एप्लीकेशन बनाने की आती है, तो तस्वीर बदल जाती है।

AI इस्तेमाल करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी

रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि भारतीय यूजर्स AI को लेकर तेजी से प्रयोग कर रहे हैं। ऑफिस के काम से लेकर पढ़ाई, रिसर्च और रोजमर्रा के डिजिटल टास्क तक AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है। चैटबॉट, जनरेटिव AI और ऑटोमेशन टूल्स ने उन लोगों के लिए भी AI को आसान बना दिया है, जिनके पास टेक्निकल बैकग्राउंड नहीं है।

AI का सबसे बड़ा फायदा इसकी आसान उपलब्धता है। यूजर कुछ शब्दों में सवाल पूछकर जवाब, आइडिया, सारांश, ईमेल, लेख या कोड तक तैयार कर सकता है। इसी वजह से AI को अपनाने की रफ्तार काफी तेज हुई है।

लेकिन रिपोर्ट का सबसे अहम संकेत यही है कि AI का इस्तेमाल करना और AI से कुछ बनाना दो अलग-अलग स्तर हैं।

94% इस्तेमाल कर रहे, लेकिन 20% ही बना रहे टूल

सर्वे के मुताबिक 94 प्रतिशत प्रतिभागी AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि करीब 26 प्रतिशत लोगों ने AI को दूसरे टूल्स या API से जोड़ने का अनुभव बताया। वहीं केवल 20 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिन्होंने AI आधारित ऑटोमेशन, एजेंट या एप्लीकेशन बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

यही आंकड़ा भारत की AI स्किलिंग की सबसे बड़ी चुनौती को सामने लाता है। आसान भाषा में समझें तो बड़ी संख्या में लोग AI को यूजर की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोग AI को बिल्डर की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।

यानी ChatGPT या दूसरे AI टूल से सवाल पूछना अब आम हो रहा है, लेकिन किसी बिजनेस की जरूरत के अनुसार AI एजेंट तैयार करना, API इंटीग्रेशन करना या ऑटोमेशन बनाना अभी सीमित लोगों तक ही पहुंचा है।

87% लोग AI अपस्किलिंग की तैयारी में

रिपोर्ट में AI को लेकर भारतीय प्रोफेशनल्स की बढ़ती चिंता और उत्सुकता दोनों दिखाई देती हैं। रिपोर्ट के अनुसार करीब 87 प्रतिशत लोग AI में अपस्किलिंग कर रहे हैं या इसकी तैयारी में हैं। इसका मतलब है कि लोगों को यह महसूस हो रहा है कि आने वाले समय में AI स्किल्स उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण होने वाली हैं।

AI से जुड़े करियर फायदे को लेकर भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार 54 प्रतिशत लोगों ने AI से जुड़े करियर फायदे मिलने की बात कही। इससे संकेत मिलता है कि AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का विषय नहीं बल्कि नौकरी, प्रमोशन, उत्पादकता और भविष्य की रोजगार क्षमता से भी जुड़ गया है।

भारत में AI से जुड़े रोजगार और स्किल्स की मांग बढ़ने की व्यापक तस्वीर भी सामने आती रही है। भारत सरकार के अनुसार जनवरी 2023 से मार्च 2025 के बीच दक्षिण एशिया में AI से जुड़े जॉब पोस्टिंग का हिस्सा 2.9 प्रतिशत से बढ़कर 6.5 प्रतिशत हुआ और AI स्किल्स की मांग गैर-AI भूमिकाओं की तुलना में तेज गति से बढ़ी।

56% लोगों को नहीं पता AI सीखना कहां से शुरू करें

AI को लेकर सबसे बड़ी समस्या सिर्फ टेक्निकल स्किल की कमी नहीं है। बड़ी चुनौती यह भी है कि लोग शुरुआत कहां से करें, इसे लेकर असमंजस में हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक करीब 56 प्रतिशत लोगों को यह समझ नहीं आता कि AI सीखना कहां से शुरू करें, जबकि लगभग 43 प्रतिशत लोग सही कोर्स चुनने में परेशानी महसूस करते हैं।

AI की दुनिया में हर दिन नए टूल, मॉडल और प्लेटफॉर्म सामने आने से यह समस्या और बढ़ जाती है। एक सामान्य यूजर के सामने कई विकल्प होते हैं—किस टूल से शुरुआत करें, प्रॉम्प्ट कैसे लिखें, ऑटोमेशन कैसे बनाएं, API क्या है और एजेंट कैसे तैयार किया जाता है।

इसी वजह से सिर्फ AI टूल उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। उसके प्रभावी इस्तेमाल के लिए संरचित ट्रेनिंग और प्रैक्टिकल स्किल की जरूरत बढ़ रही है।

असली चुनौती AI चलाना नहीं, AI बनाना है

भारत में AI को लेकर मौजूदा तस्वीर को अगर एक लाइन में समझें तो कहा जा सकता है कि AI adoption तेज है, लेकिन AI creation अभी शुरुआती दौर में है।

उदाहरण के तौर पर कोई व्यक्ति AI से रोजाना ईमेल लिखवा सकता है, रिपोर्ट का सारांश तैयार कर सकता है या सोशल मीडिया पोस्ट बना सकता है। लेकिन उससे एक कदम आगे जाकर यदि वही व्यक्ति किसी कंपनी के डेटा से जुड़ा AI सिस्टम, ग्राहक सहायता एजेंट या दोहराए जाने वाले कामों का ऑटोमेशन तैयार करता है, तो इसके लिए ज्यादा तकनीकी समझ चाहिए।

यही अंतर भविष्य में नौकरी के बाजार में भी महत्वपूर्ण हो सकता है। केवल AI टूल का इस्तेमाल जानने वाले और AI के जरिए वास्तविक बिजनेस समस्या हल करने वाले प्रोफेशनल्स की क्षमताओं में बड़ा अंतर हो सकता है।

कंपनियों के लिए भी बड़ा संकेत

रिपोर्ट के आंकड़े कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। अगर कर्मचारी AI टूल का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन उन्हें AI आधारित समाधान बनाने की ट्रेनिंग नहीं मिल रही है, तो संस्थानों को अपनी अपस्किलिंग रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।

upGrad Enterprise की एक अन्य रिपोर्ट भी बताती है कि AI अब स्किलिंग की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है और बड़ी संख्या में प्रोफेशनल AI स्किलिंग की जरूरत महसूस करते हैं।

इसका अर्थ यह है कि आने वाले समय में कंपनियों को सिर्फ AI टूल उपलब्ध कराने के बजाय कर्मचारियों को यह सिखाना होगा कि उनका इस्तेमाल व्यावहारिक और सुरक्षित तरीके से कैसे किया जाए।

छात्रों और युवाओं के लिए क्या मायने?

AI का बढ़ता प्रभाव छात्रों और युवाओं के लिए भी बड़ा अवसर है। केवल किसी एक AI टूल को चलाना सीखना पर्याप्त नहीं होगा। बेहतर रणनीति यह हो सकती है कि AI के साथ डेटा, प्रॉम्प्टिंग, ऑटोमेशन, कोडिंग, समस्या समाधान और कम्युनिकेशन जैसी स्किल्स को जोड़ा जाए।

जो युवा AI को सिर्फ जवाब पाने के लिए नहीं बल्कि समस्याओं को हल करने और नए समाधान बनाने के लिए इस्तेमाल करना सीखेंगे, उनके लिए आने वाले समय में अवसर बढ़ सकते हैं।

AI की दौड़ में भारत के सामने अगला लक्ष्य

भारत में AI को अपनाने की रफ्तार को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि देश में AI यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लेकिन अगली चुनौती AI के इस्तेमाल से आगे बढ़कर AI निर्माण और नवाचार की है।

94 प्रतिशत लोगों का AI इस्तेमाल करना निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है, लेकिन केवल 20 प्रतिशत लोगों का AI आधारित ऑटोमेशन, एजेंट या एप्लीकेशन बनाने तक पहुंचना बताता है कि अभी एक बड़ा स्किल गैप मौजूद है।

आने वाले वर्षों में भारत की AI क्षमता इस बात से तय होगी कि कितने लोग AI टूल इस्तेमाल करते हैं, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि कितने लोग AI की मदद से नई चीजें बना पाते हैं। यही बदलाव भारत को AI का बड़ा बाजार होने से आगे बढ़ाकर AI समाधान बनाने वाला मजबूत केंद्र बना सकता है।

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