नई दिल्ली। देश के बैंकिंग सेक्टर को लेकर केंद्र सरकार जल्द ही बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संकेत दिया कि सरकार ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग’ (Banking for Viksit Bharat) पर एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन जल्द कर सकती है। यह समिति देश के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करेगी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सुधारों को लेकर सरकार को सुझाव देगी।
वित्त मंत्री ने यह जानकारी नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय PSB Confluence 2026 के उद्घाटन सत्र के दौरान दी। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के बीच जिन मुद्दों पर चर्चा हो रही है, वे प्रस्तावित समिति के लिए महत्वपूर्ण इनपुट का काम करेंगे। सरकार की कोशिश है कि बैंकिंग सिस्टम को भारत की अगले चरण की आर्थिक विकास यात्रा के लिए और अधिक सक्षम बनाया जाए।
जल्द हो सकता है समिति का गठन
वित्त मंत्री के अनुसार प्रस्तावित उच्च-स्तरीय बैंकिंग समिति की घोषणा जल्द होने की उम्मीद है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक समिति का गठन इसी महीने किए जाने की संभावना है। हालांकि समिति के सदस्यों, कार्यक्षेत्र और विस्तृत शर्तों को लेकर अंतिम जानकारी सरकार की ओर से अलग से सामने आएगी।
यह समिति कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते समय ही ‘High Level Committee on Banking for Viksit Bharat’ बनाने का प्रस्ताव रखा था। बजट में कहा गया था कि समिति वित्तीय क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करेगी और इसे भारत के विकास के अगले चरण के साथ जोड़ने के उपाय सुझाएगी। साथ ही वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण को भी ध्यान में रखा जाएगा।
बैंकिंग सेक्टर के सामने क्या हैं बड़े सवाल?
भारत तेजी से बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उद्योग, बुनियादी ढांचे, एमएसएमई, कृषि, स्टार्टअप और आम उपभोक्ताओं की बढ़ती वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए मजबूत बैंकिंग सिस्टम जरूरी है। प्रस्तावित समिति इसी व्यापक तस्वीर को ध्यान में रखकर बैंकिंग सेक्टर की जरूरतों और संभावित सुधारों का अध्ययन करेगी।
फरवरी 2026 में वित्त मंत्री ने भी कहा था कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को ऐसे बैंकिंग सिस्टम की जरूरत होगी, जो पर्याप्त मात्रा में वित्तपोषण, क्रेडिट और बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा सके। उस समय उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि समिति के संभावित सुझावों को पहले से किसी एक मुद्दे, जैसे सरकारी बैंकों के विलय, तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
PSB Confluence में सात अहम मुद्दों पर चर्चा
17 अगस्त को शुरू हुए दो दिवसीय PSB Confluence में बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो रही है। इनमें डिपॉजिट जुटाना, युवाओं के लिए बैंकिंग सेवाएं, निवेश चक्र के लिए वित्तपोषण, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) को सहयोग, कृषि और बागवानी मूल्य श्रृंखला के लिए बुनियादी ढांचा, क्रेडिट कार्ड क्षेत्र में नवाचार और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण शामिल हैं।
इन मुद्दों का सीधा संबंध बैंकिंग सेवाओं की पहुंच और अर्थव्यवस्था की भविष्य की जरूरतों से है। सरकार चाहती है कि बैंक सिर्फ पारंपरिक ऋण देने वाली संस्थाओं तक सीमित न रहें, बल्कि देश की विकास रणनीति में सक्रिय भागीदार बनें।
विशेष रूप से युवाओं के लिए बैंकिंग सेवाओं का विस्तार और डिजिटल वित्तीय सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना आने वाले समय में अहम हो सकता है। इसी तरह निवेश चक्र को गति देने के लिए पर्याप्त ऋण उपलब्ध कराना उद्योग और बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ग्रामीण और कृषि क्षेत्र पर भी नजर
भारत के आर्थिक विकास में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में बैंकिंग सुधारों के दौरान कृषि और बागवानी से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर तथा मूल्य श्रृंखला को वित्तीय सहायता देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
बजट से जुड़े सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति में पिछले वर्षों में सुधार हुआ है। बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत हुई है, लाभप्रदता में सुधार हुआ है और परिसंपत्ति गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। सरकार के अनुसार बैंकिंग सेवाओं की पहुंच देश के 98 प्रतिशत से अधिक गांवों तक हो चुकी है।
ऐसे समय में सरकार बैंकिंग सेक्टर की मौजूदा मजबूती का इस्तेमाल विकास के अगले चरण को वित्तपोषित करने के लिए करना चाहती है।
क्या बदल सकता है आम ग्राहकों के लिए?
प्रस्तावित समिति की सिफारिशें आने के बाद बैंकिंग क्षेत्र में नीतिगत बदलावों की दिशा स्पष्ट हो सकती है। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ग्राहकों के लिए ब्याज दर, बैंक शुल्क, खातों या ऋण नियमों में सीधे क्या बदलाव होंगे।
लेकिन समिति के दायरे में वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण को शामिल किया जाना महत्वपूर्ण है। इसका मतलब है कि भविष्य के बैंकिंग सुधारों में केवल बड़े उद्योगों और निवेश की जरूरतों को ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की बैंकिंग जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाएगा।
बड़े बैंकों और बैंकिंग ढांचे पर भी नजर
बैंकिंग सेक्टर में बड़े संस्थानों की भूमिका और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की क्षमता भी आने वाले समय में चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। पहले वित्त मंत्री से जब सरकारी बैंकों के संभावित विलय या बड़े बैंक बनाने को लेकर सवाल पूछा गया था, तो उन्होंने कहा था कि समिति को ही इन मुद्दों पर विचार करना होगा। उनका जोर इस बात पर था कि विकसित भारत के लिए देश का बैंकिंग सिस्टम पर्याप्त रूप से बड़ा और सक्षम होना चाहिए।
इसलिए प्रस्तावित समिति की रिपोर्ट का इंतजार बैंकिंग सेक्टर के लिए काफी अहम माना जा रहा है। समिति अगर व्यापक सुधारों का रोडमैप देती है तो आने वाले वर्षों में सरकारी और निजी दोनों बैंकों के कामकाज, तकनीक, ऋण वितरण और वित्तीय सेवाओं की दिशा पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
सरकार के सामने बड़ा लक्ष्य
केंद्र सरकार का लक्ष्य 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का है। इस लक्ष्य के लिए मजबूत वित्तीय प्रणाली को बुनियादी आधार माना जा रहा है। बैंकिंग सेक्टर उद्योगों को पूंजी, किसानों को ऋण, छोटे कारोबारियों को वित्तीय सहायता और आम लोगों को डिजिटल तथा पारंपरिक बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार प्रस्तावित High Level Committee on Banking for Viksit Bharat का गठन कब करती है और समिति को क्या जिम्मेदारियां दी जाती हैं। फिलहाल वित्त मंत्री के ताजा संकेत से साफ है कि बैंकिंग सुधार का अगला चरण जल्द ही सामने आ सकता है।