नोएडा। सरकारी अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा और इलाज की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो नोएडा के सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल का बताया जा रहा है। इसमें अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड कथित तौर पर मरीजों के लिए दवा से भरी सिरिंज तैयार करता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और मामले की जांच शुरू की गई। जांच के बाद अस्पताल प्रशासन ने संबंधित स्टाफ नर्स और सुरक्षा गार्ड के खिलाफ कार्रवाई की है।
वायरल वीडियो में क्या दिखाई दे रहा है?
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में नीली वर्दी पहना एक व्यक्ति अस्पताल के काउंटर पर बैठा नजर आता है। उसके सामने कई सिरिंज और दवाओं से जुड़ी सामग्री दिखाई देती है। वीडियो में वह सिरिंज में दवा भरता हुआ नजर आ रहा है। आसपास अस्पताल का मेडिकल सामान और अन्य कर्मचारी भी दिखाई देते हैं।
वीडियो को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि मरीजों को दी जाने वाली दवा तैयार करने का काम सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी के पास कैसे पहुंचा। दवाओं और इंजेक्शन से संबंधित प्रक्रिया सामान्य तौर पर प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की निगरानी और निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत की जाती है। ऐसे में यदि कोई गैर-प्रशिक्षित कर्मचारी इस प्रक्रिया में शामिल होता है तो मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होना स्वाभाविक है।
14 अगस्त की घटना से जुड़ा बताया जा रहा वीडियो
मामले की जानकारी के अनुसार, यह घटना 14 अगस्त की देर रात मेडिकल वार्ड में हुई बताई जा रही है। इसी वार्ड में संबंधित स्टाफ नर्स की ड्यूटी थी। बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया और देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गया।
वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। जांच का मुख्य बिंदु यही रहा कि सुरक्षा गार्ड को दवा और सिरिंज तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति किस स्तर पर मिली और उस समय ड्यूटी पर मौजूद मेडिकल स्टाफ की भूमिका क्या थी।
स्टाफ नर्स और गार्ड पर हुई कार्रवाई
मामले में अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा गार्ड और स्टाफ नर्स के खिलाफ कार्रवाई की है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार झा के अनुसार, स्टाफ नर्स रिचा कुमारी और सुरक्षा गार्ड सुनील कुमार को निलंबित किया गया है। दोनों कर्मचारी आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत संविदा पर काम कर रहे थे। सुरक्षा गार्ड को अलीगढ़ स्थित एक निजी एजेंसी के माध्यम से अस्पताल में तैनात किया गया था।
अस्पताल प्रशासन ने संबंधित आउटसोर्सिंग एजेंसी को नोटिस भी जारी किया है और उससे पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि सुरक्षा कर्मचारी की जिम्मेदारियां क्या निर्धारित थीं और वह मेडिकल प्रक्रिया से जुड़ी गतिविधि में किस परिस्थिति में शामिल हुआ।
मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल में इंजेक्शन और दवाओं से संबंधित किसी भी प्रक्रिया में छोटी सी गलती भी मरीज के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। दवा की मात्रा, मरीज की पहचान, इंजेक्शन का प्रकार और उसे देने की प्रक्रिया में सावधानी बेहद जरूरी होती है।
यही कारण है कि मेडिकल वार्ड में गैर-मेडिकल कर्मचारी की ऐसी भूमिका सामने आने पर अस्पताल प्रशासन के स्तर पर जांच आवश्यक हो जाती है। हालांकि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि किसी मरीज को गलत दवा दी गई या किसी मरीज को नुकसान पहुंचा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी मरीज को नुकसान पहुंचने की पुष्टि नहीं हुई है।
सुरक्षा गार्ड की जिम्मेदारी क्या होती है?
सुरक्षा गार्ड का प्रमुख काम अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना, मरीजों और तीमारदारों की आवाजाही को नियंत्रित करना तथा जरूरत के अनुसार सुरक्षा संबंधी सहायता उपलब्ध कराना होता है। मेडिकल दवाओं को तैयार करना या मरीजों के लिए इंजेक्शन भरना उसकी सामान्य जिम्मेदारियों का हिस्सा नहीं माना जाता।
इसी वजह से वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधि ने अस्पताल प्रशासन को जांच के लिए मजबूर किया। जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि गार्ड ने यह काम अपने स्तर पर किया, किसी कर्मचारी के निर्देश पर किया या अस्पताल की कार्यप्रणाली में किसी तरह की चूक हुई।
नर्स की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में सिर्फ सुरक्षा गार्ड ही नहीं, बल्कि ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन ने मेडिकल स्टाफ की निगरानी और जिम्मेदारी के पहलू को भी गंभीरता से लिया है।
अस्पताल प्रशासन के सामने यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि संबंधित समय पर वार्ड में मेडिकल स्टाफ की मौजूदगी क्या थी और सिरिंज तैयार करने की प्रक्रिया किसके निर्देश पर चल रही थी। यदि निर्धारित प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है तो भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा।
आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर भी सवाल
घटना में सुरक्षा गार्ड के आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए नियुक्त होने की जानकारी सामने आने के बाद निजी एजेंसियों से जुड़े कर्मचारियों की ट्रेनिंग और निगरानी पर भी चर्चा शुरू हो गई है। सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में कर्मचारी आउटसोर्सिंग मॉडल के तहत काम करते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि प्रत्येक कर्मचारी को उसकी भूमिका और जिम्मेदारियों की स्पष्ट जानकारी हो।
अस्पताल प्रशासन ने संबंधित एजेंसी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। आगे की कार्रवाई एजेंसी की ओर से मिलने वाले जवाब और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन की कार्रवाई
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मामले का सामने आना यह भी दिखाता है कि अस्पतालों में होने वाली गतिविधियां अब कैमरे और सोशल मीडिया की नजर से आसानी से बच नहीं सकतीं। हालांकि वायरल वीडियो किसी घटना की पूरी तस्वीर नहीं बताते, इसलिए प्रशासनिक जांच के जरिए वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।
सेक्टर-39 जिला अस्पताल पहले भी विभिन्न व्यवस्थागत मुद्दों को लेकर खबरों में रहा है। वर्ष 2024 में अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की कमी के कारण मरीजों की देखभाल और दवा देने की प्रक्रिया प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई थी
फिलहाल अस्पताल प्रशासन की कार्रवाई के बाद निगाहें जांच और संबंधित एजेंसी के स्पष्टीकरण पर हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि जांच में घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में कोई गैर-मेडिकल कर्मचारी दवा या इंजेक्शन तैयार करने जैसी प्रक्रिया में शामिल न हो।
मरीज अस्पताल में इलाज और सुरक्षा के भरोसे पहुंचते हैं। इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही की आशंका सामने आने पर पारदर्शी जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। वायरल वीडियो ने भले ही एक कर्मचारी की गतिविधि को सामने ला दिया हो, लेकिन इसके बाद उठने वाला बड़ा सवाल अस्पताल की पूरी व्यवस्था से जुड़ा है—क्या प्रत्येक कर्मचारी अपनी निर्धारित जिम्मेदारी के अनुसार ही काम कर रहा है और मरीजों की सुरक्षा के लिए बनाए गए प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हो रहा है?