पुणे। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में आधुनिक और मजबूत बुनियादी ढांचे की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि सड़क परियोजनाओं की योजना केवल वर्तमान जरूरतों को देखकर नहीं, बल्कि अगले 25 से 50 वर्षों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए।
पुणे में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के ‘फेस्टिवल ऑफ थिंकर्स’ कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि विदेशों में आधुनिक और चौड़े हाईवे देखने के बाद उन्हें भारत में भी बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण करने की प्रेरणा मिली।
गडकरी ने अपने संबोधन में दावा किया कि उन्होंने हाल ही में दिल्ली और मेरठ के बीच 40 लेन वाली सड़क बनाई है। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों के आधुनिक हाईवे देखने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि भारत में भी भविष्य की जरूरतों के हिसाब से बड़े और बेहतर हाईवे विकसित किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण की योजना बनाते समय आने वाले दशकों में बढ़ने वाले यातायात को ध्यान में रखना जरूरी है।
गडकरी ने अपने पुराने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि करीब 27 साल पहले उनके कार्यकाल में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का निर्माण हुआ था। उन्होंने दावा किया कि आज भी एक्सप्रेसवे की सड़क अच्छी स्थिति में है और उस पर गड्ढों की समस्या नहीं है।
हालांकि, उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि एक्सप्रेसवे की अच्छी स्थिति की चर्चा सोशल मीडिया पर कम होती है, जबकि मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के ‘मिसिंग लिंक’ के एक हिस्से में भूस्खलन के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया।
गडकरी ने स्पष्ट किया कि संबंधित परियोजना राज्य सरकार के अधीन थी। उन्होंने कहा, “लगता है सोशल मीडिया क्वालिटी कंट्रोल के लिए अच्छा है।”
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के करीब 13.3 किलोमीटर लंबे ‘मिसिंग लिंक’ का उद्घाटन मई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया था। परियोजना का उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्र के कठिन हिस्से को बाईपास कर यात्रा को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाना था।
हालांकि, जुलाई में भारी बारिश के बाद इसके प्रवेश द्वार पर टनल-2 के पास भूस्खलन की घटना सामने आई थी।
गडकरी ने सड़क और बुनियादी ढांचे की निगरानी में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), LiDAR और सैटेलाइट तकनीक की मदद से सड़कों की लगातार निगरानी की जानी चाहिए।
उनके मुताबिक, तकनीक की मदद से सड़क में आने वाली छोटी खामियों की शुरुआती स्तर पर पहचान की जा सकती है, जिससे उन्हें समय रहते ठीक किया जा सके और भविष्य में बड़ी समस्या बनने से रोका जा सके।
गडकरी ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भविष्य के यातायात को देखते हुए आठ लेन की सड़क बनाने पर जोर दिया गया था। लेकिन विदेशों में हाईवे देखने के बाद उन्हें लगा कि भविष्य की जरूरतों के हिसाब से परियोजनाओं को और बड़े पैमाने पर तैयार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर आर्थिक विकास की आधारशिला है। बेहतर सड़कें, तकनीक, शोध और नवाचार न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाते हैं, बल्कि रोजगार के अवसर पैदा करने और गरीबी कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।