अयोध्या स्कूलों में यू-ट्यूबर्स की एंट्री बंद, नया आदेश जारी

अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के परिषदीय और सरकारी स्कूलों को लेकर एक नया निर्देश इन दिनों चर्चा में है। सामने आई जानकारी के अनुसार, विद्यालय परिसरों में बिना अनुमति बाहरी व्यक्तियों, यू-ट्यूबर्स, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और अन्य लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही स्कूल […]

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  • August 20, 2026 11:08 am IST, Published 13 minutes ago

अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के परिषदीय और सरकारी स्कूलों को लेकर एक नया निर्देश इन दिनों चर्चा में है। सामने आई जानकारी के अनुसार, विद्यालय परिसरों में बिना अनुमति बाहरी व्यक्तियों, यू-ट्यूबर्स, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और अन्य लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही स्कूल परिसर में फोटो और वीडियो बनाने के लिए भी सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति लेना जरूरी बताया गया है।

इस आदेश के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेज हो गई है। खासतौर पर यू-ट्यूबर्स और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के स्कूलों में प्रवेश को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विभाग की ओर से इस तरह के निर्देश का उद्देश्य विद्यालय में पढ़ाई का माहौल बनाए रखना, विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बिना अनुमति फोटो-वीडियोग्राफी जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण रखना बताया जा रहा है।

बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश पर रोक

वायरल हो रही जानकारी के मुताबिक, किसी भी बाहरी व्यक्ति को बिना अनुमति विद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति को स्कूल में जाकर फोटो, वीडियो, रिपोर्टिंग या किसी अन्य उद्देश्य से रिकॉर्डिंग करनी है, तो उसे पहले संबंधित अधिकारी से अनुमति लेनी होगी।

इसका मतलब यह है कि अब केवल पत्रकार, यू-ट्यूबर या सोशल मीडिया क्रिएटर होने के आधार पर स्कूल परिसर में प्रवेश स्वत: मान्य नहीं होगा। संबंधित व्यक्ति को अपने उद्देश्य की जानकारी देकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति प्राप्त करनी होगी।

स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई और गतिविधियों के दौरान बाहरी लोगों की मौजूदगी से कई बार व्यवधान पैदा होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग का तर्क है कि स्कूल को अनधिकृत गतिविधियों से मुक्त रखना जरूरी है।

फोटो और वीडियो बनाने के नियम भी होंगे सख्त

नए निर्देश की सबसे अहम बात स्कूल परिसर में फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग से जुड़ी है। जानकारी के अनुसार, बिना अनुमति स्कूल में फोटो या वीडियो बनाने पर भी रोक रहेगी।

सोशल मीडिया के दौर में स्कूलों से जुड़े वीडियो तेजी से वायरल होते हैं। कई बार शिक्षक, विद्यार्थी, स्कूल भवन, कक्षाओं और अन्य गतिविधियों के वीडियो बनाकर उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाता है। ऐसे मामलों में विद्यार्थियों की निजता, शिक्षकों की गरिमा और स्कूल की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी उठते हैं।

इसी वजह से अब रिकॉर्डिंग को अनुमति की प्रक्रिया से जोड़ने की बात सामने आई है। किसी वैध और अधिकृत उद्देश्य से फोटो या वीडियो तैयार करने के लिए संबंधित अधिकारी से अनुमति लेना आवश्यक होगा।

आखिर क्यों लिया गया ऐसा फैसला?

स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बनाए रखना शिक्षा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है। यदि कोई बाहरी व्यक्ति बिना अनुमति विद्यालय परिसर में पहुंचकर वीडियो बनाता है या शिक्षकों और विद्यार्थियों से बातचीत करता है, तो इससे कक्षाओं में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।

इसके अलावा सोशल मीडिया पर किसी घटना का अधूरा या संदर्भ से बाहर वीडियो सामने आने पर स्कूल और शिक्षकों को लेकर गलत धारणा भी बन सकती है। विभाग की ओर से ऐसे मामलों को नियंत्रित करने के लिए अनुमति आधारित व्यवस्था अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।

हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी सरकारी स्कूलों में अनधिकृत प्रवेश और सोशल मीडिया रिकॉर्डिंग को लेकर इसी तरह के निर्देश सामने आए हैं। उदाहरण के तौर पर आगरा में जुलाई 2026 में बेसिक शिक्षा विभाग ने 2,400 से अधिक सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में यू-ट्यूबर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और अन्य बाहरी लोगों के अनधिकृत प्रवेश पर रोक लगाई थी तथा फोटो-वीडियो के लिए पूर्व लिखित अनुमति की व्यवस्था की गई थी। विभाग ने इसके पीछे पढ़ाई में व्यवधान और विद्यार्थियों के ध्यान भटकने जैसी वजहों का उल्लेख किया था।

क्या पत्रकारों और मीडिया को भी लेनी होगी अनुमति?

यह सवाल भी इस आदेश के बाद महत्वपूर्ण हो गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रतिबंध का मुख्य केंद्र अनधिकृत प्रवेश है। यानी यदि किसी मीडिया संस्थान, पत्रकार, यू-ट्यूबर या कंटेंट क्रिएटर को स्कूल में जाकर रिपोर्टिंग या रिकॉर्डिंग करनी है, तो उसे पहले सक्षम अधिकारी से अनुमति प्राप्त करनी होगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य सभी बाहरी व्यक्तियों के लिए एक समान अनुमति प्रक्रिया लागू करना बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग श्रेणी के लोगों के लिए अनुमति की प्रक्रिया क्या होगी, इसकी विस्तृत जानकारी संबंधित विभागीय निर्देशों से ही स्पष्ट होगी।

विद्यार्थियों की सुरक्षा और निजता भी बड़ा मुद्दा

स्कूल परिसरों में बच्चों की मौजूदगी के कारण फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग का मामला संवेदनशील माना जाता है। बच्चों की तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर किस संदर्भ में इस्तेमाल होंगे, यह हमेशा स्पष्ट नहीं होता। ऐसे में बिना अनुमति रिकॉर्डिंग पर रोक लगाने को विद्यार्थियों की निजता और सुरक्षा से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

स्कूल प्रबंधन के लिए भी यह व्यवस्था जिम्मेदारी तय करने में मदद कर सकती है। यदि किसी बाहरी व्यक्ति को रिकॉर्डिंग की अनुमति दी जाती है, तो उसके उद्देश्य और गतिविधि का रिकॉर्ड रखा जा सकता है। इससे भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में जवाबदेही तय करना आसान हो सकता है।

सोशल मीडिया क्रिएटर्स के लिए क्या बदलेगा?

इस आदेश के बाद स्कूलों में कंटेंट बनाने वाले सोशल मीडिया क्रिएटर्स को विशेष सावधानी बरतनी होगी। बिना अनुमति स्कूल परिसर में जाकर वीडियो बनाना या शिक्षकों और विद्यार्थियों की रिकॉर्डिंग करना उचित नहीं होगा।

यदि किसी क्रिएटर का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था, सरकारी स्कूलों की सुविधाओं, शिक्षण व्यवस्था या किसी विशेष अभियान पर वीडियो बनाना है, तो उसे संबंधित विभाग से अनुमति लेकर ही आगे बढ़ना होगा।

अयोध्या में बेसिक शिक्षा विभाग पहले भी विद्यालयों से जुड़े विभिन्न अभियानों पर निर्देश जारी करता रहा है। जिले में स्कूल चलो अभियान के दौरान विभाग ने नामांकन, विद्यार्थियों की उपस्थिति और ड्रॉपआउट कम करने पर भी विशेष जोर दिया था।

वायरल आदेश को लेकर क्या ध्यान रखना जरूरी है?

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी और आधिकारिक आदेश में अंतर हो सकता है। इसलिए किसी वायरल पोस्ट को अंतिम सरकारी आदेश मानने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रति या जिला प्रशासन की पुष्टि देखना जरूरी है।

अयोध्या जिला प्रशासन की वेबसाइट पर बेसिक शिक्षा से संबंधित सूचनाएं और सरकारी नोटिस उपलब्ध कराए जाते हैं।

फिलहाल सामने आई जानकारी का सार यही है कि बिना अनुमति बाहरी लोगों के स्कूल में प्रवेश और फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग पर रोक लगाने की बात कही गई है। यदि कोई व्यक्ति स्कूल परिसर में किसी वैध उद्देश्य से जाना चाहता है, तो उसे पहले सक्षम अधिकारी से अनुमति लेने की प्रक्रिया अपनानी होगी।

यह फैसला एक ओर स्कूलों में अनुशासन, बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई का माहौल बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पारदर्शिता और मीडिया/सोशल मीडिया की भूमिका को लेकर भी चर्चा पैदा कर सकता है। ऐसे में आदेश के अंतिम आधिकारिक प्रारूप और उसके क्रियान्वयन से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।

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