नई दिल्ली/वॉशिंगटन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिका दौरे से पहले अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी संस्था की ओर से संघ को लेकर की गई मांग ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) से जुड़े अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से RSS के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कदम उठाने और उसके नेताओं के साथ उच्चस्तरीय बैठकें नहीं करने की अपील की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को लेकर तैयारियां चल रही हैं।
भागवत के दौरे से पहले क्यों गरमाया मामला?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक USCIRF की ओर से अमेरिकी प्रशासन से RSS नेताओं के साथ उच्चस्तरीय मुलाकातों और राजनयिक स्तर के संपर्क से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है। साथ ही संघ से जुड़े व्यक्तियों या संस्थाओं के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों की मांग भी दोहराई गई है। इस बयान ने भारत और अमेरिका के बीच धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
USCIRF की 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में भी RSS का नाम लक्षित प्रतिबंधों के संभावित दायरे में शामिल किया गया है। रिपोर्ट में अमेरिकी सरकार से ऐसे व्यक्तियों और संस्थाओं पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जिन्हें आयोग धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े गंभीर उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार या सहायक मानता है। इनमें RSS और भारत की खुफिया एजेंसी RAW का उल्लेख किया गया है।
क्या अमेरिका ने RSS पर प्रतिबंध लगा दिया है?
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी सरकार ने RSS पर कोई नया प्रतिबंध लगाने की घोषणा नहीं की है। फिलहाल मामला USCIRF की सिफारिशों और मांगों से जुड़ा है। USCIRF अमेरिकी कांग्रेस द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र और द्विदलीय आयोग है, जिसका काम दुनिया के अलग-अलग देशों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति की निगरानी करना और राष्ट्रपति, विदेश मंत्री तथा कांग्रेस को नीतिगत सिफारिशें देना है। अंतिम सरकारी कार्रवाई का अधिकार अमेरिकी प्रशासन और संबंधित संस्थाओं के पास होता है।
यानी सोशल मीडिया या कुछ पोस्टों में यदि इसे सीधे “अमेरिका ने RSS पर बैन लगा दिया” कहा जा रहा है, तो वह तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। मौजूदा स्थिति में इसे RSS पर प्रतिबंध लगाने की अमेरिकी आयोग की मांग या सिफारिश के रूप में समझना ज्यादा सटीक है।
29 अगस्त को न्यूयॉर्क में कार्यक्रम
मोहन भागवत के आगामी विदेश दौरे को RSS के शताब्दी वर्ष से भी जोड़कर देखा जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भागवत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा पर जाने वाले हैं। अमेरिका में 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में ‘Universal Oneness Celebrations’ कार्यक्रम में उनके संबोधित करने की जानकारी सामने आई है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
इस कार्यक्रम को भारतीय समुदाय के बीच सामाजिक एकता, नागरिक जिम्मेदारी और वैश्विक सद्भाव जैसे विषयों से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में यात्रा से ठीक पहले USCIRF की ओर से आई मांग ने कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा बढ़ा दी है।
USCIRF पहले भी उठाता रहा है सवाल
RSS को लेकर USCIRF का रुख नया नहीं है। आयोग लंबे समय से भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट और टिप्पणियां जारी करता रहा है। USCIRF की भारत संबंधी रिपोर्टों में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति, कानून-व्यवस्था, धार्मिक हिंसा और हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों की भूमिका जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है।
मार्च 2026 में जारी USCIRF की वार्षिक रिपोर्ट में भारत को ‘Country of Particular Concern’ यानी धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघनों से जुड़ी श्रेणी में रखने की सिफारिश भी दोहराई गई। इसी रिपोर्ट में RSS और RAW से जुड़े व्यक्तियों या संस्थाओं के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों की बात कही गई थी। इनमें संपत्तियों को फ्रीज करना और अमेरिका में प्रवेश पर रोक जैसे विकल्प शामिल हैं।
भारत पहले भी कर चुका है USCIRF की रिपोर्टों पर सवाल
USCIRF की भारत संबंधी रिपोर्टों को लेकर भारत का रुख पहले से ही आलोचनात्मक रहा है। भारत सरकार और भारतीय पक्ष कई बार आयोग की रिपोर्टों और निष्कर्षों पर आपत्ति जता चुके हैं। भारतीय पक्ष का तर्क रहा है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों का आकलन भारतीय परिस्थितियों और संवैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर USCIRF का कहना है कि उसका उद्देश्य दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करना और अमेरिकी नीति निर्माताओं को सिफारिश देना है। आयोग ने भारत को लेकर अपने रुख में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों और कथित उल्लंघनों को प्रमुख आधार बनाया है।
भागवत के दौरे पर अब सबकी नजर
USCIRF की ताजा मांग के बाद अब मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर अंतरराष्ट्रीय नजरें टिक गई हैं। एक तरफ RSS अपने शताब्दी वर्ष के दौरान वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संपर्क बढ़ाने की दिशा में कार्यक्रम कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की सिफारिशें इस यात्रा को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर रही हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट है कि USCIRF की मांग और अमेरिकी सरकार का अंतिम निर्णय दो अलग-अलग विषय हैं। अमेरिकी प्रशासन यदि इस मुद्दे पर कोई औपचारिक फैसला लेता है, तो उसका भारत-अमेरिका संबंधों और दोनों देशों के बीच धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवाद पर असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
मोहन भागवत के अमेरिका दौरे से पहले RSS को लेकर USCIRF की ओर से प्रतिबंधों और उच्चस्तरीय मुलाकातों से दूरी की मांग ने विवाद को बढ़ा दिया है। हालांकि, अभी RSS पर अमेरिका में कोई नया प्रतिबंध लागू होने की पुष्टि नहीं है। मौजूदा घटनाक्रम USCIRF की सिफारिशों और अमेरिकी सरकार से की गई अपीलों तक सीमित है। आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन का रुख और भागवत की प्रस्तावित यात्रा इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।