नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस के प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस के रुख को संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत की संसद द्वारा लिए गए फैसलों का सम्मान किया जाना चाहिए। फडणवीस ने आरोप लगाया कि ऐसे फैसले देश की स्वतंत्रता के बाद भी पुरानी मानसिकता को बनाए रखने का संकेत देते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब भारत में ब्रिटिश शासन नहीं है और देश अपने संविधान तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं के आधार पर आगे बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, स्वतंत्र भारत की संसद जो निर्णय लेती है, उसे संवैधानिक व्यवस्था के तहत महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद के फैसले को स्वीकार नहीं करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति उचित रवैया नहीं है।
फडणवीस ने अपने बयान में कांग्रेस पर वैचारिक हमला भी किया। उन्होंने कहा कि पार्टी का रुख उस मानसिकता को दिखाता है, जिसे वह लंबे समय से ‘मानसिक गुलामी’ के रूप में देखते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का मौजूदा रुख इसी सोच को सामने लाता है और इसके साथ ही संविधान की भावना को लेकर भी सवाल खड़े करता है।
‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण गीत रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने लोगों में राष्ट्रीय चेतना और एकजुटता की भावना पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आजादी के बाद भी ‘वंदे मातरम्’ को देश के राष्ट्रीय गीत के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है। इसी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व के कारण इससे जुड़े राजनीतिक या सार्वजनिक बयान अक्सर चर्चा का विषय बन जाते हैं।
महाराष्ट्र में इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं। फडणवीस ने कांग्रेस के प्रस्ताव को केवल राजनीतिक निर्णय के तौर पर नहीं देखा, बल्कि इसे देश की संवैधानिक व्यवस्था और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति दृष्टिकोण से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं के फैसलों को स्वीकार करना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री के बयान का एक प्रमुख हिस्सा संसद की भूमिका से जुड़ा रहा। उन्होंने कहा कि देश की संसद स्वतंत्र भारत की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थाओं में से एक है और उसके निर्णयों को नजरअंदाज करना उचित नहीं माना जा सकता। फडणवीस ने कांग्रेस के रुख को लेकर यह भी कहा कि एक तरफ संविधान और लोकतंत्र की बात की जाती है, जबकि दूसरी ओर संसद के निर्णय को स्वीकार करने से इनकार किया जाता है।
इस बयान के बाद ‘वंदे मातरम्’ को लेकर राजनीतिक बहस केवल महाराष्ट्र तक सीमित रहने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन सकती है। एक तरफ भाजपा इस मुद्दे को राष्ट्रवाद और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस के प्रस्ताव के पीछे उसका अपना राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से देखें तो राष्ट्रीय गीत और देशभक्ति से जुड़े मुद्दे भारतीय राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील रहे हैं। अलग-अलग राजनीतिक दल इन विषयों को अपने विचारों और नीतियों के अनुसार प्रस्तुत करते रहे हैं। ऐसे में फडणवीस का बयान महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस पर सीधा हमला माना जा रहा है।
फिलहाल ‘वंदे मातरम्’ को लेकर महाराष्ट्र में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस के प्रस्ताव पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए इसे संविधान और स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ दिया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया सामने आने के बाद विवाद और तेज होने की संभावना है।