1.25 लाख ऑटो-टैक्सी चालकों ने सीखी मराठी

105 दिन के अभियान में पास की परीक्षा; एकनाथ शिंदे बोले- ‘मराठी मजबूरी नहीं, श्रद्धा की भाषा’ ठाणे। महाराष्ट्र सरकार और स्थानीय संगठनों की संयुक्त पहल के तहत चलाए गए 105 दिवसीय मराठी भाषा दक्षता अभियान में करीब 1.25 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों ने मराठी भाषा सीखी और परीक्षा पास की। अभियान के समापन […]

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  • August 18, 2026 6:16 am IST, Published 6 minutes ago

105 दिन के अभियान में पास की परीक्षा; एकनाथ शिंदे बोले- ‘मराठी मजबूरी नहीं, श्रद्धा की भाषा’

ठाणे। महाराष्ट्र सरकार और स्थानीय संगठनों की संयुक्त पहल के तहत चलाए गए 105 दिवसीय मराठी भाषा दक्षता अभियान में करीब 1.25 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों ने मराठी भाषा सीखी और परीक्षा पास की। अभियान के समापन अवसर पर गैर-मराठी पृष्ठभूमि के सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

ठाणे में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मराठी श्रद्धा और प्रेम की भाषा है, मजबूरी की नहीं। उन्होंने कहा कि गैर-मराठी भाषी लोगों द्वारा स्वेच्छा से मराठी सीखना महाराष्ट्र की सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता को दर्शाता है।

105 दिन चला अभियान

यह अभियान ‘हिंदू हृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा पाठ्यक्रम अभियान’ के तहत चलाया गया था। करीब साढ़े तीन महीने चले इस अभियान में परिवहन क्षेत्र से जुड़े 1,65,600 से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से लगभग 1.25 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों ने प्रशिक्षण पूरा करने के साथ परीक्षा भी सफलतापूर्वक पास की।

‘भाषा प्रेम से सीखी जाती है, कानून से नहीं’

एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की पहल की सराहना करते हुए कहा कि मराठी को बढ़ावा देने के लिए कानूनी दबाव के बजाय सकारात्मक और स्वैच्छिक दृष्टिकोण अपनाया गया। उन्होंने कहा कि भाषा किसी मजबूरी या कानून के कारण नहीं, बल्कि प्रेम और सम्मान से सीखी जाती है।

शिंदे ने कहा कि इस तरह के अभियान से महाराष्ट्र में रहने वाले अलग-अलग भाषाई समुदायों के बीच संवाद और आपसी जुड़ाव मजबूत होगा।

मराठी सीखने वालों का मजाक न उड़ाने की अपील

उपमुख्यमंत्री ने मराठी भाषी लोगों से भी अपील की कि जो लोग मराठी सीखने का प्रयास कर रहे हैं, उनका मजाक न उड़ाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और मराठी सीखने वालों से महाराष्ट्र की आधिकारिक भाषा में संवाद करने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाषा किसी समुदाय को बांटने का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने का जरिया बननी चाहिए।

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