जयपुर: राजस्थान में शिक्षा विभाग के आदेश के खिलाफ कांग्रेस विधायकों ने विरोध मार्च निकाला और आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर स्कूल पहुंचकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े सवालों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया।
कांग्रेस के विरोध मार्च का मुख्य मुद्दा शिक्षा विभाग की ओर से जारी वह आदेश रहा, जिसे लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि स्कूलों की वास्तविक स्थिति जानने और विद्यार्थियों की समस्याओं को समझने के बजाय सरकार लोगों और जनप्रतिनिधियों की आवाजाही पर रोक लगाने की कोशिश कर रही है। इसी के विरोध में पार्टी के विधायक और नेता आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर स्कूल पहुंचे।
स्कूल पहुंचने के बाद सचिन पायलट ने राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई स्कूलों की स्थिति पहले से ही सामने आ चुकी है। कहीं स्कूल भवनों की हालत खराब है तो कहीं विद्यार्थी अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। पायलट ने कहा कि सरकार को इन समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए, न कि स्कूलों में लोगों के पहुंचने पर रोक लगाने की कोशिश करनी चाहिए।
पायलट ने कहा कि राजस्थान में शिक्षा से जुड़ी समस्याएं केवल किसी एक संस्थान तक सीमित नहीं हैं। अलग-अलग इलाकों से स्कूलों में सुविधाओं की कमी, भवनों की खराब स्थिति और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दे सामने आते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने के बजाय सरकार ऐसे कदम उठा रही है, जिससे वास्तविक स्थिति सामने न आए।
कांग्रेस नेता ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को भी गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। यदि किसी स्कूल की छत गिरने जैसी घटना होती है या बच्चों को अपनी मांगों के लिए धरना देना पड़ता है, तो यह व्यवस्था की कमियों की ओर संकेत करता है। ऐसे मामलों में सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
कांग्रेस का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को स्कूलों की स्थिति देखने तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों से बातचीत करने का अवसर मिलना चाहिए। पार्टी नेताओं के अनुसार, जमीनी हालात की जानकारी मिलने से ही सरकार को कमियों को दूर करने में मदद मिल सकती है। कांग्रेस ने शिक्षा विभाग के आदेश को इसी संदर्भ में लोकतांत्रिक निगरानी और जनप्रतिनिधियों की भूमिका से जोड़कर देखा है।
आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर स्कूल पहुंचकर कांग्रेस नेताओं ने विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। पार्टी का कहना है कि विशेष जरूरत वाले बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए सामान्य स्कूलों की तुलना में अतिरिक्त सुविधाओं और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत होती है। ऐसे संस्थानों की स्थिति की नियमित निगरानी और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
विरोध मार्च के दौरान कांग्रेस विधायकों ने राज्य सरकार से शिक्षा विभाग के आदेश पर पुनर्विचार करने और स्कूलों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर संवाद करने की मांग की। पार्टी ने कहा कि सरकार को विपक्ष और जनप्रतिनिधियों की आलोचना को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय शिक्षा व्यवस्था में सुधार के सुझावों के रूप में देखना चाहिए।
राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस पहले भी होती रही है। कांग्रेस का ताजा प्रदर्शन इसी बहस का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षण वातावरण से जुड़े सवालों को वह आगे भी उठाती रहेगी।
फिलहाल कांग्रेस के विरोध मार्च के बाद शिक्षा विभाग के आदेश को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है कि स्कूलों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय लोगों के वहां जाने को लेकर प्रतिबंध क्यों लगाए जा रहे हैं। वहीं, इस पूरे मामले में सरकार का पक्ष सामने आने के बाद विवाद की तस्वीर और स्पष्ट होगी।