चित्तौड़गढ़: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने उनकी 21 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। इस प्रतिमा की स्थापना पर एक करोड़ पचास लाख रुपये से अधिक की लागत आने की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा समेत कई प्रमुख नेता और गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर अटल बिहारी वाजपेयी के राष्ट्रसेवा, सुशासन और विकास के योगदान को याद किया गया।
अमित शाह ने कार्यक्रम के दौरान राजस्थान के 15 जिलों में करीब 5,755 करोड़ रुपये की 944 विकास परियोजनाओं का ई-शिलान्यास और ई-लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली, सिंचाई, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी इन परियोजनाओं से प्रदेश में विकास को गति मिलेगी। इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी मजबूत करने के साथ किसानों, युवाओं और आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाना है।
अमित शाह ने अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक जीवन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सत्ता और विपक्ष दोनों में रहते हुए अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। पत्रकार, कवि, सांसद और प्रधानमंत्री के रूप में वाजपेयी ने राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी। शाह ने उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में पोखरण परमाणु परीक्षण, राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार और स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना को शामिल किया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी की राजनीति में राष्ट्रवाद और सुशासन प्रमुख आधार रहे।
शाह ने वाजपेयी सरकार के दौरान जनजातीय मामलों के लिए अलग मंत्रालय बनाए जाने को भी महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदायों के कल्याण को संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में यह अहम पहल थी। उन्होंने वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा जनजातीय कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम में अमित शाह ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर विपक्ष पर राजनीतिक हमला भी बोला। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश के स्वतंत्रता संघर्ष से गहराई से जुड़ा हुआ है।
राजस्थान में जलापूर्ति और सिंचाई से जुड़ी योजनाओं का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर पानी की समस्या को दूर करने की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने ‘हर घर नल से जल’ योजना के तहत राज्य में हुए विस्तार का उल्लेख किया और कहा कि इससे उन परिवारों को राहत मिल रही है, जिन्हें पहले पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।
अलवर में 17 जिलों के लिए 6,453 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का ई-शिलान्यास और ई-लोकार्पण किया गया। इन परियोजनाओं का फोकस सड़क, बिजली, सिंचाई, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े कार्यों पर रहा। सरकार का कहना है कि इनसे क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, किसानों को खेतों तक सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और विद्युत आपूर्ति को मजबूत किया जा सकेगा।
किसानों के लिए भी इस अवसर पर वित्तीय सहायता से जुड़े महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 152 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत प्रदेश के करीब 67 लाख किसानों को 667 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी DBT के माध्यम से हस्तांतरित की गई। सरकार के अनुसार, इससे किसानों को आर्थिक सहायता मिलने के साथ कृषि गतिविधियों के लिए वित्तीय स्थिरता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए प्रदेश में चार नए जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों की घोषणा भी की गई। सरकार का दावा है कि इन संस्थाओं के माध्यम से किसानों को समय पर वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराने और कम ब्याज पर ऋण की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहकारी संस्थाओं से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया गया।
युवाओं के लिए भी रोजगार से जुड़ी पहल की गई। रोजगार उत्सव के दौरान 10,548 युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। सरकार के मुताबिक, युवाओं को सरकारी और अन्य रोजगार अवसरों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ कौशल विकास और औद्योगिक निवेश पर भी जोर दिया जा रहा है।
सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अलवर में ‘अलवर सरस डेयरी’ के नए प्लांट का ई-शिलान्यास किया गया। करीब 200 करोड़ रुपये की लागत वाले इस संयंत्र में प्रतिदिन तीन लाख लीटर दूध के प्रसंस्करण की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। इसके साथ ही सरस डेयरी से जुड़ी चार अन्य परियोजनाओं का भी ई-लोकार्पण किया गया, जिनकी लागत करीब 274 करोड़ रुपये बताई गई। आधुनिक तकनीक से लैस इन डेयरी परियोजनाओं से दूध के प्रसंस्करण को अधिक वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने तथा दुग्ध क्षेत्र से जुड़े किसानों की आय को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
अमित शाह ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में है। ‘सहकार से समृद्धि’ की सोच के तहत किसानों, दुग्ध उत्पादकों और ग्रामीण समुदायों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया। निवेश, रोजगार, जल, स्वास्थ्य, कृषि और सहकारिता से जुड़े कदमों को प्रदेश के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया।
कुल मिलाकर, अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर राजस्थान में आयोजित कार्यक्रम राजनीतिक श्रद्धांजलि के साथ-साथ विकास योजनाओं के बड़े आयोजन में बदल गया। एक तरफ वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण कर उनके योगदान को याद किया गया, तो दूसरी ओर हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं, किसानों को वित्तीय सहायता, युवाओं को नियुक्ति पत्र और डेयरी क्षेत्र में नए निवेश के जरिए सरकार ने विकास का संदेश दिया। सड़क, सिंचाई, बिजली, स्वास्थ्य, कृषि और सहकारिता से जुड़ी परियोजनाओं के माध्यम से राजस्थान में बुनियादी सुविधाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य सामने रखा गया है।