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बिहार में 10 लाख व्यूज पर ₹1 लाख, क्रिएटर्स के लिए बड़ा मौका

पटना: सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स के लिए बिहार से बड़ी खबर सामने आई है। बिहार सरकार ने सोशल मीडिया एवं ऑनलाइन मीडिया से जुड़े नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत सरकारी योजनाओं, कार्यक्रमों और उपलब्धियों से संबंधित कंटेंट तैयार करने वाले एम्पैनल्ड सोशल मीडिया क्रिएटर्स को व्यूज के आधार […]

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  • August 20, 2026 9:00 pm IST, Published 46 minutes ago

पटना: सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स के लिए बिहार से बड़ी खबर सामने आई है। बिहार सरकार ने सोशल मीडिया एवं ऑनलाइन मीडिया से जुड़े नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत सरकारी योजनाओं, कार्यक्रमों और उपलब्धियों से संबंधित कंटेंट तैयार करने वाले एम्पैनल्ड सोशल मीडिया क्रिएटर्स को व्यूज के आधार पर भुगतान किया जा सकेगा। नई व्यवस्था के मुताबिक एक लाख व्यूज पर अधिकतम 10 हजार रुपये और 10 लाख व्यूज पर अधिकतम एक लाख रुपये तक भुगतान का प्रावधान किया गया है।

1 लाख व्यूज पर ₹10 हजार, 10 लाख पर ₹1 लाख

बिहार कैबिनेट की मंजूरी के बाद सोशल मीडिया क्रिएटर्स के लिए यह प्रावधान चर्चा में है। सरकार की ओर से जिन योजनाओं, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को डिजिटल माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाएगा, उनसे जुड़े कंटेंट की पहुंच यानी व्यूज को भुगतान के आधार से जोड़ा गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक लाख व्यूज हासिल करने वाले योग्य वीडियो के लिए 10 हजार रुपये तक और 10 लाख व्यूज पर एक लाख रुपये तक भुगतान किया जा सकता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी भी वायरल वीडियो पर स्वतः पैसा मिलेगा। इसके लिए क्रिएटर का निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध या एम्पैनल्ड होना और कंटेंट का तय मानकों को पूरा करना जरूरी होगा।

हर वीडियो पर नहीं मिलेगा पैसा

नई व्यवस्था को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल व्यूज की संख्या ही भुगतान का आधार नहीं होगी। रिपोर्टों में बताया गया है कि कंटेंट की गुणवत्ता, विषय की प्रासंगिकता और व्यूज की आधिकारिक पुष्टि जैसे मानकों को भी देखा जाएगा।

यानी अगर किसी क्रिएटर के वीडियो पर बड़ी संख्या में व्यूज आते हैं, लेकिन वीडियो सरकार की योजनाओं या संबंधित निर्धारित विषय से जुड़ा नहीं है, तो उस पर इस प्रोत्साहन व्यवस्था के तहत भुगतान का दावा नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा व्यूज की वास्तविकता और आधिकारिक सत्यापन भी महत्वपूर्ण होगा। फर्जी व्यूज, कृत्रिम तरीके से बढ़ाई गई पहुंच या नियमों के विपरीत तैयार किए गए कंटेंट को भुगतान के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सरकार की योजनाओं को सोशल मीडिया से मिलेगी नई पहुंच

बिहार सरकार की इस पहल का बड़ा उद्देश्य सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पहुंचाना है। आज YouTube, Facebook, Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोगों तक सूचना पहुंचाने के बेहद प्रभावी माध्यम बन चुके हैं।

सरकार पहले से ही सोशल मीडिया एवं ऑनलाइन मीडिया नीति के जरिए ऐसे प्लेटफॉर्म और क्रिएटर्स को सूचीबद्ध करने की व्यवस्था रखती है, जो सरकारी योजनाओं और लोकहितकारी कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार में योगदान कर सकते हैं। बिहार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की वेबसाइट के अनुसार, सोशल मीडिया अकाउंट के लिए कम से कम एक लाख फॉलोअर्स या सब्सक्राइबर्स जैसी पात्रता भी निर्धारित की गई है।

क्रिएटर्स के लिए क्यों खास है यह फैसला?

सोशल मीडिया क्रिएटर्स के लिए यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब सरकारी योजनाओं से जुड़े कंटेंट को तैयार करने में आर्थिक प्रोत्साहन का एक नया अवसर सामने आया है।

मान लीजिए कोई योग्य क्रिएटर बिहार सरकार की किसी जनकल्याणकारी योजना, विकास परियोजना या सार्वजनिक कार्यक्रम पर वीडियो तैयार करता है और वह वीडियो निर्धारित मानकों के अनुसार एक लाख व्यूज हासिल करता है। ऐसी स्थिति में उसे तय नियमों के तहत 10 हजार रुपये तक भुगतान मिल सकता है। इसी तरह 10 लाख व्यूज तक पहुंचने पर भुगतान एक लाख रुपये तक हो सकता है।

हालांकि, इसे गारंटीड कमाई के तौर पर देखना सही नहीं होगा। भुगतान के लिए पात्रता, कंटेंट की स्वीकृति, व्यूज का सत्यापन और अन्य विभागीय शर्तें पूरी करना आवश्यक होगा।

पहले से मौजूद नीति में भी है एम्पैनलमेंट की व्यवस्था

बिहार सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की सोशल मीडिया और ऑनलाइन मीडिया नीति के तहत सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स, वेब मीडिया कंपनियों और मोबाइल एप संचालकों के लिए एम्पैनलमेंट की व्यवस्था मौजूद है।

विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार Facebook, Instagram, X और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म पर कम से कम एक लाख फॉलोअर्स या सब्सक्राइबर्स वाले अकाउंट पात्रता के दायरे में आ सकते हैं। वेबसाइट या मोबाइल एप के लिए भी यूजर संख्या से संबंधित मानदंड निर्धारित हैं।

इससे साफ है कि सरकार सोशल मीडिया को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं और जनहितकारी संदेशों के प्रसार के प्रभावी प्लेटफॉर्म के रूप में भी इस्तेमाल करना चाहती है।

क्रिएटर्स को किन बातों का रखना होगा ध्यान?

इस योजना से लाभ लेने की इच्छा रखने वाले क्रिएटर्स को सबसे पहले यह समझना होगा कि सिर्फ वायरल होना पर्याप्त नहीं है। उन्हें सरकार की ओर से निर्धारित पात्रता और एम्पैनलमेंट प्रक्रिया को पूरा करना होगा।

कंटेंट तथ्यात्मक, गुणवत्तापूर्ण और संबंधित सरकारी योजना या कार्यक्रम से जुड़ा होना चाहिए। साथ ही व्यूज की आधिकारिक पुष्टि के लिए सोशल मीडिया एनालिटिक्स और अन्य आवश्यक दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।

बिहार सरकार की मौजूदा एम्पैनलमेंट व्यवस्था में मीडिया संस्थान या व्यक्तिगत क्रिएटर से पहचान, पंजीकरण, बैंक खाता और सोशल मीडिया एनालिटिक्स जैसे दस्तावेज मांगे जाते हैं।

सोशल मीडिया अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बढ़ावा

सरकार का यह कदम बिहार में डिजिटल कंटेंट निर्माण के क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण हो सकता है। छोटे शहरों और जिलों में काम करने वाले स्थानीय क्रिएटर्स को अपने क्षेत्र की सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को डिजिटल माध्यम से सामने लाने का अवसर मिल सकता है।

हालांकि, इस मॉडल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भुगतान की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रहती है और व्यूज तथा कंटेंट की गुणवत्ता का सत्यापन किस तरह किया जाता है। क्रिएटर्स के लिए भी जरूरी होगा कि वे केवल अधिक व्यूज हासिल करने के बजाय विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी देने पर ध्यान दें।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर बिहार सरकार का यह फैसला सोशल मीडिया क्रिएटर्स के लिए एक नया अवसर लेकर आया है। एक लाख व्यूज पर 10 हजार रुपये और 10 लाख व्यूज पर एक लाख रुपये तक भुगतान की व्यवस्था ने डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में काफी उत्सुकता पैदा की है। लेकिन यह लाभ निर्धारित नियमों और पात्रता पूरी करने वाले एम्पैनल्ड क्रिएटर्स को ही मिलेगा। इसलिए क्रिएटर्स के लिए सबसे जरूरी है कि वे आधिकारिक नियमों को समझें, सही तरीके से सूचीबद्ध हों और तथ्यात्मक एवं गुणवत्तापूर्ण कंटेंट तैयार करें।

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