ढाका। बांग्लादेश के औद्योगिक क्षेत्र पर संकट लगातार गहराता जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में देश के सात प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में 457 औद्योगिक इकाइयां स्थायी रूप से बंद हो चुकी हैं। इनमें 108 इकाइयां गारमेंट और कपड़ा उद्योग से जुड़ी हैं। फैक्ट्रियों के बंद होने का सीधा असर रोजगार पर पड़ा है।
जनवरी से अगस्त 2026 के बीच ही 95 फैक्ट्रियां बंद हुईं, जिससे करीब 61,881 लोगों की सीधी नौकरी चली गई। उद्योगों के सामने बढ़ती उत्पादन लागत, ऊर्जा संकट और गैस की कमी बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।
पिछले दो वर्षों में बंद हुई 457 औद्योगिक इकाइयों में केवल कपड़ा और गारमेंट सेक्टर शामिल नहीं हैं। इनमें 287 इकाइयां अन्य मैन्युफैक्चरिंग कारोबार से जुड़ी थीं।
इससे साफ है कि बांग्लादेश का औद्योगिक संकट किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। बढ़ती लागत और ऊर्जा की कमी का असर अलग-अलग तरह के कारखानों पर पड़ रहा है।
बांग्लादेश में उद्योगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी गैस की कमी बनी हुई है। अगस्त की शुरुआत में गाजीपुर क्षेत्र में गैस का दबाव बेहद कम होने के कारण करीब 700 से 800 फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित हुआ। कई इकाइयों को काम रोकना पड़ा, जबकि कुछ जगह कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजा गया।
गैस की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से बॉयलर और अन्य मशीनें पूरी क्षमता से नहीं चल पातीं। इससे उत्पादन घट जाता है और कंपनियों के लिए विदेशी खरीदारों के ऑर्डर समय पर पूरा करना मुश्किल हो जाता है।
फैक्ट्रियों के सामने समस्या यह भी है कि लंबे समय तक काम बंद रखना उनके लिए आसान नहीं है। उत्पादन बंद होने के बावजूद कर्मचारियों की तनख्वाह, बैंक कर्ज और दूसरे खर्च जारी रहते हैं।
गैस की जगह डीजल या एलपीजी का इस्तेमाल करने पर उत्पादन लागत और बढ़ जाती है। ऐसे में लंबे समय तक ऊर्जा संकट बना रहा तो पहले से बंद फैक्ट्रियों के दोबारा शुरू होने की संभावना भी प्रभावित हो सकती है।
ऊर्जा संकट का असर सिर्फ फैक्ट्रियों के उत्पादन तक सीमित नहीं है। यदि बांग्लादेश की कंपनियां विदेशी खरीदारों के ऑर्डर समय पर पूरा नहीं कर पातीं, तो खरीदार दूसरे देशों की फैक्ट्रियों का रुख कर सकते हैं।
इससे बांग्लादेश के निर्यात कारोबार पर दबाव बढ़ सकता है। कंपनियों की कमाई घटने के साथ कर्मचारियों की तनख्वाह, कर्ज और दूसरे खर्चों को संभालना भी मुश्किल हो सकता है।
बांग्लादेश के निर्यात कारोबार में कपड़ा और तैयार परिधानों की बड़ी हिस्सेदारी है। धागा बनाने, कपड़े की रंगाई और अन्य शुरुआती प्रक्रियाओं में गैस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
यदि इन इकाइयों को पर्याप्त गैस नहीं मिली तो इसका असर आगे तैयार कपड़े बनाने वाली फैक्ट्रियों पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से उद्योग संगठनों ने गैस आपूर्ति में ऐसी इकाइयों को प्राथमिकता देने की मांग की है।
उद्योग संगठनों ने सरकार से फैक्ट्रियों को रोजाना गैस की उपलब्धता और दबाव की जानकारी देने की मांग की है, ताकि कंपनियां उसी के अनुसार उत्पादन की योजना बना सकें। छोटी और मझोली फैक्ट्रियों को बैंक कर्ज चुकाने में राहत देने और मजदूरों से जुड़े विवादों का जल्द समाधान करने की मांग भी की गई है।
बांग्लादेश के उद्योगों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल गैस और बिजली संकट के समाधान का है। कई फैक्ट्रियां फिलहाल कम क्षमता पर चल रही हैं। यदि ऊर्जा संकट लंबे समय तक जारी रहा और विदेशी ऑर्डर भी कमजोर हुए, तो आने वाले समय में कई और औद्योगिक इकाइयां बंद हो सकती हैं।
इसका असर केवल रोजगार पर नहीं पड़ेगा, बल्कि स्थानीय कारोबार और बांग्लादेश की निर्यात आय पर भी दबाव बढ़ सकता है।