रक्षा आत्मनिर्भरता की बड़ी उपलब्धि,तैयार हुई AK-203

अमेठी: भारतीय सेना के स्वदेशी हथियार निर्माण अभियान को बड़ी उपलब्धि मिली है। उत्तर प्रदेश के अमेठी स्थित कोरवा की राइफल फैक्ट्री में पहली 100 प्रतिशत स्वदेशी AK-203 असॉल्ट राइफल तैयार की गई है। इस राइफल को ‘शेर’ नाम दिया गया है। बताया गया है कि तैयार की गई राइफल का फायरिंग परीक्षण भी सफलतापूर्वक […]

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  • August 24, 2026 6:30 pm IST, Published 16 minutes ago

अमेठी: भारतीय सेना के स्वदेशी हथियार निर्माण अभियान को बड़ी उपलब्धि मिली है। उत्तर प्रदेश के अमेठी स्थित कोरवा की राइफल फैक्ट्री में पहली 100 प्रतिशत स्वदेशी AK-203 असॉल्ट राइफल तैयार की गई है। इस राइफल को ‘शेर’ नाम दिया गया है। बताया गया है कि तैयार की गई राइफल का फायरिंग परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।

AK-203 को भारतीय सेना की आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण असॉल्ट राइफलों में माना जाता है। इसका स्थानीय स्तर पर निर्माण भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अमेठी की कोरवा फैक्ट्री में स्वदेशी उत्पादन शुरू होने से सेना के लिए आधुनिक छोटे हथियारों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इस उपलब्धि का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका स्वदेशीकरण है। राइफल के 100 प्रतिशत घरेलू निर्माण का अर्थ है कि इसके उत्पादन में भारतीय रक्षा औद्योगिक आधार और देश में विकसित विनिर्माण क्षमताओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे आयात पर निर्भरता कम करने और देश में रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने की सरकार की नीति को मजबूती मिलेगी।

AK-203 परियोजना को भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग के तहत विकसित उत्पादन व्यवस्था से जोड़ा गया है। हालांकि शुरुआती चरण में इस राइफल के उत्पादन में विदेशी तकनीकी सहयोग की भूमिका रही है, लेकिन अब कोरवा स्थित फैक्ट्री में इसके पूर्ण स्वदेशी निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

फायरिंग टेस्ट की सफलता भी इस उपलब्धि का अहम हिस्सा है। किसी भी असॉल्ट राइफल को सैन्य उपयोग के लिए शामिल करने से पहले उसकी कार्यक्षमता, विश्वसनीयता और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न परीक्षण किए जाते हैं। ‘शेर’ के फायरिंग परीक्षण के सफल होने के बाद इसके उत्पादन और आगे की स्वीकृति प्रक्रिया को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं।

अमेठी में रक्षा उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों का विस्तार क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़े रक्षा संयंत्रों के आसपास आपूर्ति श्रृंखला, तकनीकी सेवाओं और अन्य सहायक गतिविधियों के माध्यम से रोजगार और औद्योगिक अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्रों में अपनी भूमिका मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

भारत पिछले कुछ वर्षों से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य विदेशी हथियारों और सैन्य उपकरणों पर निर्भरता कम करना तथा देश में ही आधुनिक रक्षा प्रणालियों का निर्माण बढ़ाना है। इसके तहत घरेलू कंपनियों, सरकारी रक्षा प्रतिष्ठानों और निजी उद्योगों की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

स्वदेशी AK-203 का निर्माण इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। भारतीय सेना के लिए आधुनिक असॉल्ट राइफलें सैनिकों की व्यक्तिगत हथियार क्षमता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में देश में इनके उत्पादन से आपूर्ति को अधिक व्यवस्थित और लंबे समय तक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है। ‘शेर’ नाम दिए जाने से यह राइफल देश की सैन्य पहचान और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन के प्रतीक के रूप में भी प्रस्तुत की जा रही है। हालांकि राइफल को बड़े पैमाने पर सेना में शामिल किए जाने से पहले निर्धारित तकनीकी और सैन्य मानकों के अनुसार आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।

कोरवा फैक्ट्री में पहली 100 प्रतिशत स्वदेशी AK-203 का तैयार होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल एक हथियार के निर्माण तक सीमित उपलब्धि नहीं है। यह भारत के रक्षा विनिर्माण तंत्र में बढ़ती घरेलू क्षमता का संकेत है। इससे भविष्य में अन्य आधुनिक हथियारों के देश में उत्पादन के लिए भी आधार मजबूत हो सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, स्वदेशी उत्पादन का फायदा केवल हथियारों की उपलब्धता तक सीमित नहीं रहता। इससे रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति और तकनीकी सहायता के क्षेत्र में भी घरेलू क्षमता विकसित करने का अवसर मिलता है। लंबे समय में इससे रक्षा क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत हो सकती है।

फिलहाल अमेठी की कोरवा फैक्ट्री से निकली पहली स्वदेशी AK-203 ‘शेर’ के सफल फायरिंग टेस्ट को भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। आगे इसके उत्पादन, परीक्षण और सेना में शामिल किए जाने की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

 

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