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महिला उद्यमिता को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर बढ़ाएगी उत्तराखंड सरकार

देहरादून: उत्तराखंड में महिला उद्यमिता और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘सशक्त बहना उत्सव योजना’ को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं मेहनत से विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार कर रही हैं और इन उत्पादों को बेहतर […]

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  • August 24, 2026 4:40 pm IST, Published 42 minutes ago

देहरादून: उत्तराखंड में महिला उद्यमिता और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘सशक्त बहना उत्सव योजना’ को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं मेहनत से विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार कर रही हैं और इन उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि उनकी मेहनत को उचित पहचान और आर्थिक लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर ‘सशक्त बहना उत्सव’ की शुरुआत की गई थी। इस पहल का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे अपने सामान को लोगों तक पहुंचा सकें और उन्हें विपणन का अवसर मिल सके।

धामी ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार काम कर रही हैं। वे स्थानीय संसाधनों और अपनी मेहनत के आधार पर उत्पाद तैयार कर रही हैं। कई महिलाएं अपने उत्पादों के जरिए स्वयं रोजगार हासिल करने के साथ-साथ दूसरे लोगों को भी रोजगार से जोड़ने का काम कर रही हैं। ऐसे में उनके उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराना सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, कई बार बेहतर उत्पाद तैयार करने के बावजूद छोटे उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन्हें बाजार तक पहुंचाने की होती है। यदि उत्पादों को उचित मंच, ग्राहक और विपणन की सुविधा मिले तो महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ उनके कारोबार का विस्तार भी संभव है।

‘सशक्त बहना उत्सव’ इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए एक मंच के रूप में काम कर रहा है। इसके माध्यम से महिला समूहों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न स्थानीय उत्पादों को लोगों के सामने लाने और उनकी बिक्री के अवसर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इससे महिलाओं को अपने उत्पादों की गुणवत्ता और मांग को समझने में भी मदद मिल सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड की महिलाओं को उनके उत्पादों की मार्केटिंग के लिए पर्याप्त जगह और अवसर उपलब्ध कराया जाए। इससे महिला उद्यमियों को अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को भी व्यापक पहचान मिल सकती है।

महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण मानी जाती है। छोटे स्तर पर शुरू किए गए कई काम समय के साथ रोजगार के साधन बन सकते हैं। जब महिलाओं को उत्पादन के साथ-साथ बाजार और बिक्री का अवसर मिलता है, तो उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ती है और परिवार की आय में भी योगदान मजबूत होता है।

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में स्थानीय उत्पादों और महिला समूहों को बाजार से जोड़ना ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का माध्यम बन सकता है। इससे पलायन जैसी चुनौतियों के बीच स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में भी मदद मिल सकती है।

मुख्यमंत्री ने महिला समूहों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि महिलाएं अच्छे उत्पाद तैयार करने के साथ दूसरों को रोजगार से जोड़ने का काम भी कर रही हैं। सरकार की कोशिश है कि उनकी इस क्षमता को बाजार उपलब्ध कराकर और मजबूत किया जाए।

‘सशक्त बहना उत्सव’ के जरिए स्थानीय उत्पादों को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे हस्तशिल्प, स्थानीय खाद्य पदार्थ, पारंपरिक वस्तुओं और अन्य महिला समूह आधारित उत्पादों को नया बाजार मिलने की संभावना है। हालांकि इस पहल की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उत्पादों को लगातार बाजार, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और डिजिटल बिक्री जैसी सुविधाएं कितनी प्रभावी तरीके से मिलती हैं।

मुख्यमंत्री के बयान से स्पष्ट है कि उत्तराखंड सरकार महिला उद्यमिता को केवल रोजगार तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि महिलाओं को उत्पाद निर्माण से लेकर विपणन तक पूरी प्रक्रिया में मजबूत बनाने पर जोर दे रही है।

सरकार का लक्ष्य है कि मेहनत से उत्पाद तैयार करने वाली प्रदेश की महिलाओं को अपने सामान के लिए बेहतर बाजार मिले और वे आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनें। ‘सशक्त बहना उत्सव’ इसी दिशा में महिला समूहों और स्थानीय उत्पादों को मंच उपलब्ध कराने की एक पहल के रूप में सामने आया है।

 

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