• होम
  • Blog
  • निजी कंपनियों की पहुंच में व्यक्तिगत डेटा को लेकर सुप्रीम कोर्ट चिंतित

निजी कंपनियों की पहुंच में व्यक्तिगत डेटा को लेकर सुप्रीम कोर्ट चिंतित

सरकार से नीति बनाने को कहा नई दिल्ली। निजी कंपनियों तक पहुंच रहे नागरिकों के संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने सोमवार को ऐसे कमर्शियल टेक्नोलॉजी सिस्टम के इस्तेमाल पर सवाल उठाए, जो प्रोविडेंट फंड और इनकम टैक्स रिटर्न से जुड़ी निजी जानकारी तक पहुंचकर उसे निकालने और […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • August 25, 2026 8:34 am IST, Published 32 minutes ago

सरकार से नीति बनाने को कहा

नई दिल्ली। निजी कंपनियों तक पहुंच रहे नागरिकों के संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने सोमवार को ऐसे कमर्शियल टेक्नोलॉजी सिस्टम के इस्तेमाल पर सवाल उठाए, जो प्रोविडेंट फंड और इनकम टैक्स रिटर्न से जुड़ी निजी जानकारी तक पहुंचकर उसे निकालने और सत्यापित करने में सक्षम हैं।

यह मामला पीयूष शर्मा की जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इस मामले को डोमेन एक्सपर्ट्स की मदद से देखे और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए उचित नीति तैयार करने पर विचार करे।

निजी कंपनियों द्वारा डेटा के इस्तेमाल पर सवाल

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची एवं वी. मोहना की पीठ ने कहा कि यह मामला मुख्य रूप से नीति से जुड़ा है। हालांकि, सरकारी एजेंसियों के पास कानूनी प्रक्रिया के तहत जमा कराई गई व्यक्तिगत जानकारी तक निजी कंपनियों की पहुंच और उसके संभावित व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता है।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उनकी ओर से की गई जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। उनके मुताबिक, केवल PAN और UAN जैसी जानकारियां एक निजी वेरिफिकेशन सिस्टम को उपलब्ध कराने पर उससे जुड़ी पूरी रोजगार संबंधी जानकारी हासिल की जा सकी।

OTP और स्पष्ट सहमति का मुद्दा

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इस प्रक्रिया में डेटा हासिल करने से पहले OTP आधारित प्रमाणीकरण नहीं किया गया। इसके अलावा, संबंधित व्यक्ति से स्पष्ट सहमति लेने या पहचान सत्यापन के लिए किसी स्पष्ट प्राधिकरण आधारित प्रक्रिया का भी इस्तेमाल नहीं किया गया।

याचिका में सरकारी डेटा की सुरक्षा और निजी कंपनियों द्वारा उसके संभावित इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

रोजगार वेरिफिकेशन सिस्टम पर भी चिंता

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि निजी रोजगार वेरिफिकेशन सिस्टम सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध कानूनी रोजगार और वित्तीय जानकारी पर निर्भर कर रहे हैं। इनका इस्तेमाल रोजगार सत्यापन, मूनलाइटिंग का पता लगाने, दोहरी नौकरी की जांच, लेबर मार्केट प्रोफाइलिंग और रोजगार संबंधी फैसलों के लिए किया जा सकता है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि अलग-अलग कानूनों के तहत सरकार को उपलब्ध कराए गए व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि निजी कंपनियां बिना उचित अनुमति के इस जानकारी तक पहुंच न बना सकें।

केंद्र सरकार को जरूरी कदम उठाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह मामला गंभीर है, लेकिन इसके समाधान के लिए व्यापक नीति और नियामकीय व्यवस्था की जरूरत होगी। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह डोमेन विशेषज्ञों की मदद लेकर इस मुद्दे पर उचित समाधान तलाशे।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता ने इस विषय में केंद्र सरकार को पहले ही दो विस्तृत ज्ञापन भेजे थे।

कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह निजी कंपनियों द्वारा नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए। मामले ने सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है।

Advertisement