रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में नए और चौंकाने वाले दावे सामने आ रहे हैं। CID की जांच के दौरान टीडीपीएल (TDPL) के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर और वर्तमान में सरकारी सेवा में रहे अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी से पूछताछ में कथित परीक्षा सिंडिकेट से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान परीक्षाओं में अभ्यर्थियों से कथित तौर पर पैसे वसूलने और उन्हें सफलता दिलाने के नेटवर्क के बारे में जानकारी सामने आई है।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि जांच का दायरा केवल 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा तक सीमित नहीं रहने की बात सामने आ रही है। जांच एजेंसी कथित तौर पर JPSC और JSSC की पहले आयोजित कई परीक्षाओं में भी संभावित अनियमितताओं की कड़ियां तलाश रही है। इस पूरे प्रकरण में परीक्षा कराने वाली एजेंसी और उससे जुड़े लोगों की भूमिका जांच के केंद्र में है।
रिमांड के दौरान पूछताछ में कथित बड़ा खुलासा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, CID ने अभय तिवारी को रिमांड पर लेकर लंबी पूछताछ की। इसी दौरान उसने कथित तौर पर परीक्षा में अनियमितता और अभ्यर्थियों से पैसों की वसूली से जुड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी दी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं में भी अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रति अभ्यर्थी करीब 15 लाख रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये सभी बातें जांच के दौरान सामने आए आरोप और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। अंतिम रूप से किसी व्यक्ति की भूमिका और आरोपों की पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
जांच से जुड़े रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अभय तिवारी ने एक व्यक्ति आदित्य पांडेय के संपर्क में आने और उसके माध्यम से अभ्यर्थियों तक पहुंच बनाने की बात बताई। कथित नेटवर्क में बिचौलियों के जरिए अभ्यर्थियों से संपर्क किए जाने और पैसों के लेनदेन की जांच की जा रही है।
परीक्षा एजेंसी में पद और सरकारी नौकरी ने बढ़ाए सवाल
अभय तिवारी का मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह सरकारी सेवा में आने से पहले परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर काम कर चुका था। इसी कारण जांच एजेंसी इस बात को महत्वपूर्ण मान रही है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े व्यक्ति को परीक्षा देने और परिणाम से संबंधित जानकारी तक किस स्तर तक पहुंच हासिल थी।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अभय तिवारी ने JPSC और JSSC की कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी। इनमें शिक्षक भर्ती, CGL और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम भी सामने आए हैं। इसी वजह से जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि उसकी कथित सफलताओं में कहीं परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े पद और संपर्कों का गलत इस्तेमाल तो नहीं हुआ।
इससे पहले भी मीडिया रिपोर्टों में आरोप लगाए गए थे कि परीक्षा प्रक्रिया में OMR शीट से छेड़छाड़, डिजिटल रिकॉर्ड में हेरफेर और अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने जैसी संभावित गतिविधियों की जांच की जा रही है।
JPSC के साथ JSSC परीक्षाएं भी जांच के दायरे में
इस मामले ने JPSC के साथ-साथ JSSC की परीक्षाओं को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या एक ही नेटवर्क ने अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं को प्रभावित किया था।
मामले की जांच में परीक्षा संचालन करने वाली कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई है। कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने और बाद में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। TDPL के निदेशकों और अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई है।
जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि परीक्षा में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई थी तो उसका तरीका क्या था, किस स्तर पर इसकी योजना बनाई गई और इसमें कितने लोग शामिल थे। इसके साथ ही कथित तौर पर वसूली गई रकम का इस्तेमाल कहां और किन लोगों के बीच हुआ, इसका पता लगाने के लिए वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
अभ्यर्थियों से कथित वसूली की जांच क्यों अहम?
सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में लाखों युवा मेहनत और वर्षों की तैयारी के बाद शामिल होते हैं। ऐसे में यदि किसी परीक्षा में पैसे या प्रभाव के आधार पर सफलता दिलाने का नेटवर्क साबित होता है तो इसका सीधा असर हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है।
इसी वजह से जांच में कथित 15 लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी की वसूली का दावा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि जांच में ऐसे लेनदेन के ठोस साक्ष्य मिलते हैं तो इससे कथित नेटवर्क के आकार और उसमें शामिल लोगों की संख्या का अंदाजा लगाया जा सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ऐसे अभ्यर्थियों को पहले से परीक्षा प्रक्रिया, प्रश्नपत्र या मूल्यांकन से संबंधित कोई अनुचित सहायता उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि, इन पहलुओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
कई परीक्षाओं के परिणाम पर भी उठ सकते हैं सवाल
जांच का दायरा बढ़ने की स्थिति में JPSC और JSSC की पिछली कुछ परीक्षाओं के परिणाम भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, केवल किसी व्यक्ति के किसी परीक्षा में सफल होने से यह साबित नहीं होता कि उसने अनियमितता की है। प्रत्येक मामले में स्वतंत्र साक्ष्य और जांच जरूरी होगी।
यही कारण है कि जांच एजेंसी कथित नेटवर्क में शामिल लोगों, अभ्यर्थियों, बिचौलियों और परीक्षा संचालन से जुड़े कर्मचारियों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है।
14वीं JPSC परीक्षा विवाद से शुरू हुई जांच
पूरे मामले की ताजा कड़ी 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर उठे विवाद से जुड़ी है। शिकायतों और कथित अनियमितताओं के बाद CID ने जांच तेज की। JPSC मुख्यालय और परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी के ठिकानों पर कार्रवाई की गई और कई लोगों से पूछताछ की गई।
अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद जांच को नया मोड़ मिला। उसके कथित पुराने संपर्कों, परीक्षा एजेंसी में उसकी भूमिका और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में उसकी सफलता को लेकर जांच एजेंसी कई बिंदुओं पर जानकारी जुटा रही है।
अब जांच की दिशा इस बात पर टिकी है कि पूछताछ में सामने आए दावों के समर्थन में CID को कितने ठोस दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय रिकॉर्ड मिलते हैं। यदि साक्ष्य आरोपों की पुष्टि करते हैं तो यह मामला झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और परीक्षा संचालन व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल बन सकता है।
महत्वपूर्ण: इस खबर में उल्लिखित वसूली, परीक्षा में हेरफेर और नेटवर्क से जुड़े दावे जांच/मीडिया रिपोर्टों में सामने आए आरोपों पर आधारित हैं। आरोप सिद्ध होने तक संबंधित व्यक्तियों को कानूनी रूप से आरोपी ही माना जाएगा।