TMC के 20 बागी सांसदों को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस भेजा

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC ) के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामला इन सांसदों के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत दाखिल अयोग्यता याचिकाओं से जुड़ा है। TMC की ओर से आरोप […]

Advertisement
Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • August 25, 2026 12:57 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC ) के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामला इन सांसदों के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत दाखिल अयोग्यता याचिकाओं से जुड़ा है। TMC की ओर से आरोप लगाया गया है कि संबंधित सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग के बावजूद इस मामले में निर्णय लेने में देरी हुई है। याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की।

अभिषेक बनर्जी ने अदालत से मांग की थी कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बागी सांसदों के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया जाए। TMC का आरोप है कि पार्टी के टिकट पर लोकसभा पहुंचे इन सांसदों ने बाद में पार्टी से अलग रुख अपनाया और दूसरे राजनीतिक संगठन नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के साथ जुड़ने की घोषणा की। पार्टी ने इसे दलबदल विरोधी प्रावधानों के तहत कार्रवाई का आधार बताया है।

मामले की सुनवाई के दौरान लोकसभा अध्यक्ष की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में पेश हुए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि लोकसभा अध्यक्ष को इस मामले में अलग से नोटिस जारी नहीं किया जाए। उनकी ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित 20 सांसदों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं और उनसे जवाब मांगा गया है। इस दलील के बाद अदालत ने फिलहाल लोकसभा अध्यक्ष को अलग से नोटिस जारी नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि बागी सांसदों से जवाब मांगा है। अब संबंधित सांसदों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। उनके जवाब के आधार पर आगे की सुनवाई में मामले से जुड़े कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर विचार किया जाएगा। इस दौरान यह भी देखा जाएगा कि लोकसभा अध्यक्ष के स्तर पर अयोग्यता की कार्यवाही किस स्थिति में है और उसे पूरा करने में कितना समय लग सकता है।

यह विवाद TMC के भीतर राजनीतिक मतभेद सामने आने के बाद शुरू हुआ। पार्टी ने आरोप लगाया कि 20 सांसदों ने उसके साथ अपना राजनीतिक संबंध खत्म करते हुए अलग राजनीतिक समूह के साथ जाने का कदम उठाया। इसके बाद TMC ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग करते हुए अयोग्यता याचिकाएं दाखिल कीं। पार्टी का कहना है कि यदि कोई सांसद पार्टी से अलग होकर किसी दूसरे राजनीतिक संगठन के साथ जाता है, तो संविधान की दसवीं अनुसूची में मौजूद दलबदल विरोधी प्रावधानों के तहत उसकी सदस्यता पर फैसला किया जा सकता है।

अभिषेक बनर्जी इस मुद्दे को लेकर पहले भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने बागी सांसदों के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर जल्द निर्णय लेने का अनुरोध किया था। TMC का कहना है कि ऐसे मामलों में फैसला लंबित रहने से दलबदल विरोधी कानून के उद्देश्य पर सवाल उठते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह पहलू भी महत्वपूर्ण रहा कि स्पीकर कार्यालय ने संबंधित सांसदों को नोटिस जारी कर प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसे में अदालत के सामने अब सांसदों के जवाब और आगे की कार्रवाई की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। याचिका में अभिषेक बनर्जी की ओर से न्यायिक हस्तक्षेप की मांग मुख्य रूप से प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने से संबंधित है।

मामले का महत्व केवल TMC और उसके बागी सांसदों तक सीमित नहीं है। दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की प्रक्रिया, लोकसभा अध्यक्ष की संवैधानिक भूमिका और ऐसे मामलों में निर्णय लेने की समयसीमा लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस व्यापक सवाल के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों से जुड़े अयोग्यता मामलों में प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़नी चाहिए।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद 20 बागी सांसदों को अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद अदालत मामले की आगे की स्थिति पर विचार करेगी। वहीं, लोकसभा अध्यक्ष के स्तर पर पहले से शुरू की गई कार्रवाई भी आगे की कानूनी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकती है। मामले में अगली सुनवाई के दौरान सांसदों के जवाब और संबंधित पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे का रुख स्पष्ट होने की उम्मीद है।

 

Advertisement