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महिलाओं में UTI का खतरा क्यों बढ़ रहा? ये गलती भूलकर न करें

नई दिल्ली। महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी UTI (Urinary Tract Infection) एक आम स्वास्थ्य समस्या है। पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब लगना, अचानक तेज यूरिन प्रेशर महसूस होना और पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसे लक्षण इसे पहचानने में मदद कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में UTI से […]

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  • August 27, 2026 7:00 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली। महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी UTI (Urinary Tract Infection) एक आम स्वास्थ्य समस्या है। पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब लगना, अचानक तेज यूरिन प्रेशर महसूस होना और पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसे लक्षण इसे पहचानने में मदद कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में UTI से बचने के लिए कम पानी पीने और लंबे समय तक पेशाब रोकने को समस्या बढ़ने की वजह बताया गया है। साथ ही दिनभर में तीन लीटर तक पानी पीने की सलाह दी गई है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार पानी पीना महत्वपूर्ण है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए रोजाना तीन लीटर पानी जरूरी नहीं है। शरीर की जरूरत उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

UTI क्या है और महिलाओं में क्यों ज्यादा होता है?

UTI मूत्र मार्ग के किसी हिस्से में होने वाला संक्रमण है। यह मूत्राशय, मूत्रमार्ग और गंभीर स्थिति में किडनी को भी प्रभावित कर सकता है। महिलाओं में UTI का जोखिम पुरुषों की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि महिलाओं का मूत्रमार्ग छोटा होता है। इससे बैक्टीरिया के मूत्राशय तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है।

UTI का सबसे सामान्य कारण बैक्टीरिया होते हैं। इसके अलावा पर्याप्त पानी न पीना, पेशाब की इच्छा को बार-बार रोकना, मूत्राशय को पूरी तरह खाली न करना और कुछ परिस्थितियों में यौन गतिविधि भी संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकती है। गर्भावस्था, मेनोपॉज, डायबिटीज और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।

क्या कम पानी पीना UTI का बड़ा कारण है?

वायरल पोस्ट में कम पानी पीने को UTI बढ़ने की प्रमुख वजह बताया गया है। यह बात पूरी तरह गलत नहीं है, क्योंकि पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना मूत्र मार्ग के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। पानी पर्याप्त मात्रा में लेने से शरीर हाइड्रेट रहता है और नियमित रूप से पेशाब होने में मदद मिलती है। अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ, खासकर पानी, ब्लैडर संक्रमण को रोकने या उसके लक्षणों में राहत देने में मदद कर सकता है।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर महिला को जबरन रोजाना 3 लीटर पानी पीना चाहिए। पानी की जरूरत व्यक्ति की गतिविधि, मौसम, शरीर और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है। जिन लोगों को किडनी या हृदय संबंधी बीमारी जैसी समस्या है, उन्हें पानी की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।

सबसे बड़ी गलती: पेशाब को लंबे समय तक रोकना

व्यस्त दिनचर्या में कई लोग बार-बार पेशाब की इच्छा को नजरअंदाज करते हैं। लंबे समय तक पेशाब रोकने की आदत मूत्राशय के स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं मानी जाती। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पेशाब आने पर उसे अनावश्यक रूप से न रोकें और कोशिश करें कि ब्लैडर पूरी तरह खाली हो।

सोशल मीडिया पोस्ट का यह हिस्सा इसलिए महत्वपूर्ण है कि रोजमर्रा की ऐसी छोटी आदतें मूत्र मार्ग के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, केवल पेशाब रोकने को UTI का एकमात्र कारण मानना सही नहीं होगा।

UTI से बचने के लिए किन बातों का रखें ध्यान?

UTI के जोखिम को कम करने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं। दिनभर पर्याप्त पानी पीना, पेशाब की इच्छा होने पर समय पर शौचालय जाना और पेशाब करते समय ब्लैडर को पूरी तरह खाली करने की कोशिश करना उपयोगी हो सकता है। महिलाओं को शौचालय के बाद सफाई करते समय आगे से पीछे की ओर पोंछने की सलाह दी जाती है, ताकि आंतों के बैक्टीरिया मूत्रमार्ग तक पहुंचने की संभावना कम हो।

इसके अलावा जननांग क्षेत्र को साफ और सूखा रखना, बहुत तंग अंडरवियर से बचना और कुछ मामलों में संभोग के बाद जल्द पेशाब करना भी मददगार हो सकता है। सुगंधित साबुन या अन्य उत्पादों का अत्यधिक इस्तेमाल भी संवेदनशील क्षेत्र में जलन पैदा कर सकता है।

ये लक्षण दिखें तो नजरअंदाज न करें

UTI होने पर पेशाब के दौरान जलन या दर्द, बार-बार पेशाब आना, अचानक पेशाब की तेज इच्छा, धुंधला पेशाब, पेशाब में खून और पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ लोगों में पेशाब का रंग गहरा या गंध अलग भी हो सकती है, हालांकि केवल गहरे रंग या गंध को UTI का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता।

अगर बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी, कमर या पसलियों के नीचे पीठ में दर्द, उल्टी या तेजी से बिगड़ते लक्षण दिखाई दें तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। ये किडनी संक्रमण की ओर संकेत कर सकते हैं और तत्काल चिकित्सकीय सलाह की जरूरत हो सकती है।

UTI होने पर सिर्फ पानी पीना पर्याप्त नहीं

एक महत्वपूर्ण बात यह है कि पानी पीना UTI की रोकथाम और लक्षणों में राहत के लिए मददगार हो सकता है, लेकिन स्थापित बैक्टीरियल संक्रमण का इलाज केवल पानी से नहीं किया जा सकता। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच के आधार पर एंटीबायोटिक या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के पुराने या किसी दूसरे व्यक्ति के एंटीबायोटिक लेना नुकसानदायक हो सकता है।

बार-बार UTI होने पर भी खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय जांच जरूरी है। विशेष रूप से गर्भावस्था, डायबिटीज, बार-बार संक्रमण या किडनी से जुड़े लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

निष्कर्ष

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट ने महिलाओं के लिए पर्याप्त पानी पीने और पेशाब न रोकने जैसे महत्वपूर्ण संदेश की ओर ध्यान खींचा है, लेकिन रोजाना तीन लीटर पानी को सभी महिलाओं के लिए अनिवार्य नियम मानना सही नहीं है। बेहतर तरीका है कि शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त तरल लें, डिहाइड्रेशन से बचें और पेशाब को लंबे समय तक न रोकें। UTI के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे सुरक्षित कदम है।

डिस्क्लेमर: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी व्यक्ति की बीमारी, पानी की दैनिक जरूरत या उपचार का निर्णय उसकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर ही बेहतर तरीके से कर सकते हैं।

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