जन धन योजना के 12 साल पूरे

DBT के जरिए 53 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर, 59 करोड़ खातों में 33 करोड़ महिलाएं नई दिल्ली। प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) ने 28 अगस्त 2026 को अपने 12 वर्ष पूरे कर लिए। इस मौके पर सरकार की ओर से योजना की उपलब्धियों को साझा किया गया। केंद्र के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में विभिन्न […]

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  • August 29, 2026 8:05 am IST, Published 2 hours ago

DBT के जरिए 53 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर, 59 करोड़ खातों में 33 करोड़ महिलाएं

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) ने 28 अगस्त 2026 को अपने 12 वर्ष पूरे कर लिए। इस मौके पर सरकार की ओर से योजना की उपलब्धियों को साझा किया गया। केंद्र के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में विभिन्न सरकारी योजनाओं के करोड़ों लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से 53 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या जन धन खाताधारकों की है।

सरकार के प्लेटफॉर्म ‘माईगव इंडिया’ के अनुसार, देश में वर्तमान में करीब 59 करोड़ जन धन खाते हैं। इनमें 33 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर हैं, जो कुल जन धन खातों का लगभग 56 प्रतिशत है।

2014 में शुरू हुई थी योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य देश के हर वयस्क को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक बैंकिंग, बीमा तथा अन्य वित्तीय सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना था।

सरकार के अनुसार, PMJDY दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहलों में से एक बन चुकी है और इसे वैश्विक स्तर पर वित्तीय समावेशन के उदाहरण के तौर पर देखा जाता है।

DBT से बिचौलियों की भूमिका कम हुई

सरकार का कहना है कि जन धन खातों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचने से बिचौलियों की भूमिका कम हुई है। इससे सरकारी सहायता को अधिक पारदर्शी और प्रभावी तरीके से लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिली है।

DBT के जरिए सब्सिडी और विभिन्न सरकारी योजनाओं की सहायता सीधे खातों में भेजी जाती है, जिससे लाभार्थियों को सरकारी कार्यालयों और अन्य माध्यमों पर निर्भरता कम होती है।

जन धन खाते में न्यूनतम बैलेंस की जरूरत नहीं

प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खोले गए खातों में न्यूनतम बैलेंस रखने की अनिवार्यता नहीं है। खाताधारकों से खाते के रखरखाव के लिए कोई शुल्क भी नहीं लिया जाता।

योजना के तहत खाताधारक को RuPay डेबिट कार्ड उपलब्ध कराया जाता है। इसके साथ दुर्घटना बीमा कवर की सुविधा भी दी जाती है। पात्र खाताधारकों को जरूरत के समय ओवरड्राफ्ट सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।

ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में 46 करोड़ खाते

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में करीब 46 करोड़ जन धन खाते हैं। यह कुल जन धन खातों का लगभग 78 प्रतिशत है।

सरकार का कहना है कि इससे पता चलता है कि बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं की पहुंच अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक भी तेजी से पहुंची है।

महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

जन धन योजना की एक प्रमुख उपलब्धि महिलाओं की बैंकिंग व्यवस्था में बढ़ती भागीदारी भी मानी जा रही है। कुल 59 करोड़ जन धन खातों में करीब 33 करोड़ खाते महिलाओं के हैं। यानी योजना के तहत खोले गए आधे से अधिक खाते महिलाओं के नाम पर हैं।

सरकार के मुताबिक, बैंक खाते के जरिए महिलाओं को सरकारी योजनाओं की राशि और अन्य वित्तीय सहायता सीधे प्राप्त करने में मदद मिली है।

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