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पैकेट वाला खाना खरीदने से पहले देखें ये लाल निशान, FSSAI का बड़ा प्रस्ताव

नई दिल्ली। पैकेटबंद खाद्य पदार्थ खरीदने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए आने वाले समय में पैकेजिंग पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के फ्रंट पर लाल रंग का षट्भुजाकार (Hexagon) चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा है। […]

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  • August 29, 2026 8:00 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली। पैकेटबंद खाद्य पदार्थ खरीदने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए आने वाले समय में पैकेजिंग पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के फ्रंट पर लाल रंग का षट्भुजाकार (Hexagon) चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा है। इस लेबल का उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह आसानी से बताना है कि किसी उत्पाद में चीनी, नमक या संतृप्त वसा की मात्रा तय सीमा से अधिक है।

पैकेट के सामने दिखेगा बड़ा लाल चेतावनी निशान

FSSAI के प्रस्ताव के मुताबिक, जिन पैकेटबंद खाद्य उत्पादों में चिंता वाले पोषक तत्वों की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होगी, उनके फ्रंट पर लाल रंग का स्पष्ट चेतावनी चिन्ह लगाया जा सकता है। इस चिन्ह में ‘HIGH SUGAR’, ‘HIGH SALT’ या ‘HIGH FAT’ जैसी जानकारी दी जाएगी। अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों के लिए ‘HIGHLY SWEETENED BEVERAGE’ जैसी चेतावनी का भी प्रस्ताव है।

इसका मकसद यह है कि ग्राहक को खरीदारी के दौरान पैकेट पलटकर लंबी न्यूट्रिशन टेबल पढ़ने की जरूरत न पड़े। सामने दिखाई देने वाला लाल संकेत उसे तुरंत यह समझने में मदद कर सके कि संबंधित खाद्य पदार्थ में कुछ पोषक तत्व अधिक मात्रा में मौजूद हैं।

दो चरणों में लागू करने की तैयारी

FSSAI ने चेतावनी लेबल की व्यवस्था को दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव रखा है। पहले चरण में ऐसे उत्पादों को चेतावनी लेबल के दायरे में लाने की बात कही गई है, जिनमें निर्धारित सीमा से अधिक दो या उससे ज्यादा संबंधित पोषक तत्व पाए जाते हैं। दूसरे चरण में इसका दायरा बढ़ाकर ऐसे उत्पादों तक ले जाने का प्रस्ताव है, जिनमें इनमें से किसी एक पोषक तत्व की मात्रा भी निर्धारित सीमा से अधिक हो।

हालांकि, इस व्यवस्था की अंतिम रूपरेखा और इसे लागू करने की तारीख अभी स्पष्ट नहीं है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार फिलहाल यह FSSAI का प्रस्ताव है, कोई अंतिम अधिसूचना नहीं।

लेबल पर बड़े अक्षरों में होगी चेतावनी

प्रस्ताव में चेतावनी को उपभोक्ताओं के लिए आसानी से दिखाई देने वाला बनाने पर जोर दिया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी में इस्तेमाल होने वाला फॉन्ट पैकेट के पीछे दी जाने वाली न्यूट्रिशन इंफॉर्मेशन टेबल के फॉन्ट से कम से कम एक पॉइंट बड़ा रखने का प्रस्ताव है। इससे लाल चेतावनी चिन्ह और उसमें लिखी जानकारी खरीदारी के दौरान आसानी से नजर आ सकेगी।

आखिर क्यों पड़ी ऐसी चेतावनी की जरूरत?

पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में चीनी, नमक और वसा की अधिक मात्रा को लेकर लंबे समय से स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता रही है। खासकर बच्चों और युवाओं में अत्यधिक प्रोसेस्ड और ज्यादा चीनी, नमक या वसा वाले खाद्य पदार्थों की खपत को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग का विचार इसी वजह से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका उद्देश्य उपभोक्ता को सरल, स्पष्ट और तुरंत समझ आने वाली जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वह अलग-अलग उत्पादों के बीच बेहतर विकल्प चुन सके। FSSAI ने भी अपने प्रस्ताव में चेतावनी व्यवस्था को सरल और आसानी से समझ आने वाली जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जोड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद आया प्रस्ताव

इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। अदालत ने पहले FSSAI और केंद्र से पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी को लेकर सवाल किए थे। अदालत ने खास तौर पर बच्चों के स्वास्थ्य और अत्यधिक चीनी, नमक तथा संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थों को लेकर चिंता जताई थी।

इसके बाद FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अनुपालन हलफनामा दाखिल करते हुए लाल रंग के चेतावनी लेबल का प्रस्ताव रखा। इससे पहले अगस्त में नियामक की ओर से पोषण संबंधी जानकारी को पैकेट पर प्रदर्शित करने का अलग प्रस्ताव सामने आया था, जिस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सवाल उठाए थे।

किन उत्पादों को मिल सकती है छूट?

प्रस्ताव में कुछ सिंगल-इंग्रीडिएंट खाद्य पदार्थों को चेतावनी लेबल की अनिवार्यता से बाहर रखने की बात कही गई है। इनमें घी, खाद्य तेल, नमक, चीनी, गुड़ और शहद जैसे उत्पाद शामिल हैं, हालांकि इनके लिए अन्य लागू खाद्य सुरक्षा और लेबलिंग नियम जारी रहेंगे।

इसका मतलब यह नहीं है कि इन उत्पादों को स्वास्थ्य की दृष्टि से असीमित मात्रा में सेवन के लिए सुरक्षित घोषित किया गया है। प्रस्ताव का उद्देश्य मुख्य रूप से ऐसे पैकेटबंद उत्पादों की पहचान आसान बनाना है, जिनमें निर्धारित पोषण सीमाओं से अधिक संबंधित पोषक तत्व मौजूद हों।

ग्राहक के लिए क्या बदलेगा?

अगर यह प्रस्ताव अंतिम नियम के रूप में लागू होता है, तो सुपरमार्केट या दुकान में पैकेट उठाते समय ग्राहक को सामने ही लाल चेतावनी दिखाई दे सकती है। उदाहरण के लिए किसी उत्पाद में निर्धारित सीमा के अनुसार चीनी अधिक होने पर उस पर HIGH SUGAR, नमक अधिक होने पर HIGH SALT और संतृप्त वसा अधिक होने पर HIGH FAT लिखा दिखाई दे सकता है।

इससे उपभोक्ता को उत्पाद चुनने से पहले अधिक स्पष्ट जानकारी मिलेगी। हालांकि, किसी पैकेट पर चेतावनी होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह खाद्य पदार्थ तत्काल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इसका अर्थ यह होगा कि उसमें संबंधित पोषक तत्व की मात्रा नियामक द्वारा तय सीमा से अधिक है।

अभी क्या है स्थिति?

फिलहाल इसे FSSAI का प्रस्ताव समझना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्ताव रखा गया है, लेकिन अंतिम नियम, अधिसूचना और लागू होने की समयसीमा अभी सामने नहीं आई है।

यदि प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो भारतीय बाजार में पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग का स्वरूप बदल सकता है। लाल चेतावनी चिन्ह ग्राहकों को खरीदारी के समय ही उत्पाद में मौजूद अधिक चीनी, नमक या वसा के बारे में सचेत करने का एक प्रमुख माध्यम बन सकता है।

निष्कर्ष: आने वाले समय में चिप्स, स्नैक्स, पैकेटबंद खाद्य पदार्थों और मीठे पेय जैसे उत्पाद खरीदते समय सामने लगा लाल चेतावनी चिन्ह उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संकेत बन सकता है। लेकिन अभी इसे लागू नियम नहीं, बल्कि FSSAI द्वारा सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया प्रस्ताव माना जाना चाहिए।

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