काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 682 हो गई है, जबकि करीब 3,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
इस बीच बाढ़ की तबाही से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है, जिसमें करीब 800 मीटर लंबे ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर घाटी में गिरता हुआ दिखाई दे रहा है। माना जा रहा है कि ग्लेशियर टूटने के बाद भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान, मलबा और पानी तेजी से नीचे की ओर आया, जिससे अचानक बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा हुई।
सामने आए वीडियो को तिब्बत में एक टूर गाइड ग्रुप ने ऊंचाई वाले इलाके से रिकॉर्ड किया था। वीडियो में ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटता और घाटी की ओर गिरता दिखाई देता है।
ग्लेशियर टूटने के बाद बड़ी मात्रा में बर्फ और चट्टानों का मलबा पानी के साथ नीचे की ओर बहा। इसके चलते कई क्षेत्रों में अचानक बाढ़ आ गई। भूस्खलन ने हालात को और गंभीर बना दिया।
नेपाल और चीन की सीमा से लगे प्रभावित इलाकों में बाढ़ और मलबे के कारण सड़क संपर्क समेत कई सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में अब तक 675 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि तिब्बत में 7 लोगों की मौत हुई है। इस तरह कुल मृतकों की संख्या 682 बताई जा रही है।
करीब 3,000 लोगों के अभी भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। राहत और बचाव एजेंसियां लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं।
आपदा के बाद कई भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों में भारतीय नागरिकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े बताए गए हैं। एक जगह 287 भारतीयों के लापता होने की बात कही गई है, जबकि दूसरी जानकारी में यह संख्या 187 बताई गई है।
इसके अलावा करीब 400 भारतीय नागरिकों के तिब्बत में फंसे होने की जानकारी दी गई है। संबंधित एजेंसियां प्रभावित भारतीयों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास में जुटी हैं।
भीषण बाढ़ के बाद नेपाल और चीन के प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान जारी है। प्रशासन की टीमें लापता लोगों की तलाश कर रही हैं और प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
कई इलाकों में सड़क और संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें भी सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों के लिए ग्लेशियर का इस तरह टूटना चिंता का विषय है। ग्लेशियर टूटने के बाद बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान और पानी अचानक नीचे आने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
नेपाल और तिब्बत का हिमालयी क्षेत्र भौगोलिक रूप से संवेदनशील है। यहां ग्लेशियर, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा बना रहता है।
आपदा से जुड़े मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े राहत एवं बचाव अभियान के आगे बढ़ने के साथ बदल सकते हैं। भारतीय नागरिकों के लापता होने की संख्या को लेकर भी उपलब्ध रिपोर्टों में अंतर है। ऐसे में अंतिम आधिकारिक आंकड़े संबंधित सरकारों और राहत एजेंसियों की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होंगे।