नई दिल्ली। मोबाइल फोन खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए सितंबर का महीना अहम साबित हो सकता है। वस्तु एवं सेवा कर यानी GST से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर 12 सितंबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में चर्चा होने की संभावना है। इनमें मोबाइल हैंडसेट पर लागू जीएसटी दर को कम करने का प्रस्ताव भी शामिल बताया जा रहा है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो आने वाले समय में मोबाइल फोन की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।
मौजूदा समय में मोबाइल फोन पर 18 प्रतिशत GST लागू है। मोबाइल उद्योग से जुड़े पक्ष लंबे समय से इस दर को कम करने की मांग करते रहे हैं। ऐसे में आगामी बैठक को स्मार्टफोन खरीदारों और मोबाइल कंपनियों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि काउंसिल बैठक में इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलेगी या नहीं।
12 सितंबर को होगी GST काउंसिल की अहम बैठक
जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक 12 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली है। इस बैठक में टैक्स व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाना है। इससे पहले हुई बैठक में जीएसटी की विभिन्न दरों और टैक्स व्यवस्था में बदलाव को लेकर महत्वपूर्ण फैसले सामने आए थे।
अब आगामी बैठक में कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं से जुड़े कई विषयों पर चर्चा की उम्मीद है। इनमें इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC रिटर्न को सरल बनाने का मुद्दा भी शामिल है। इसके अलावा मोबाइल हैंडसेट पर लगने वाले जीएसटी को कम करने की संभावना ने बाजार में चर्चा बढ़ा दी है।
हालांकि, मोबाइल फोन पर टैक्स कम करने का फैसला तभी माना जाएगा जब जीएसटी काउंसिल इस पर औपचारिक निर्णय लेगी। इसलिए फिलहाल उपभोक्ताओं को इसे संभावित बदलाव के तौर पर ही देखना चाहिए।
मोबाइल फोन पर घट सकता है 18 प्रतिशत GST
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, 12 सितंबर को होने वाली बैठक में मोबाइल हैंडसेट पर मौजूदा 18 प्रतिशत जीएसटी दर को कम करने पर विचार किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो मोबाइल फोन खरीदने वाले ग्राहकों को सीधे तौर पर राहत मिल सकती है।
मोबाइल फोन की कीमत पर जीएसटी का असर काफी महत्वपूर्ण होता है। किसी स्मार्टफोन की बेस कीमत जितनी अधिक होती है, उस पर लगने वाला टैक्स भी उतना ही अधिक होता है। ऐसे में जीएसटी दर में कुछ प्रतिशत की कटौती भी अंतिम कीमत में अंतर पैदा कर सकती है।
हालांकि, यह भी जरूरी है कि टैक्स में कमी का पूरा फायदा ग्राहकों तक पहुंचे। अंतिम कीमत में कमी कितनी होगी, यह मोबाइल निर्माता, मॉडल की कीमत और कंपनियों की प्राइसिंग रणनीति पर निर्भर करेगा।
चिप मेमोरी की बढ़ती कीमत बनी बड़ी चुनौती
मोबाइल फोन की कीमतों को लेकर एक और बड़ी चिंता चिप और मेमोरी की बढ़ती लागत है। पिछले एक साल में चिप मेमोरी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का असर मोबाइल हैंडसेट की लागत पर पड़ा है। उद्योग के सामने एक तरफ उत्पादन लागत बढ़ने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ ग्राहकों के लिए स्मार्टफोन को किफायती बनाए रखना भी जरूरी है।
बताया जा रहा है कि मेमोरी कंपोनेंट की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण मोबाइल हैंडसेट की लागत प्रभावित हुई है। इसका असर कंपनियों की कीमत तय करने की रणनीति पर भी पड़ सकता है। अगर जीएसटी में कमी होती है, तो यह बढ़ती लागत के दबाव को कुछ हद तक संतुलित करने में मदद कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल फोन बाजार में कीमतों का निर्धारण केवल टैक्स से नहीं होता। इसमें कंपोनेंट की लागत, आयात लागत, विनिमय दर, लॉजिस्टिक्स, ब्रांड मार्जिन और बाजार में मांग जैसे कई कारक शामिल होते हैं।
खरीदारों के लिए क्या बदल सकता है?
अगर जीएसटी काउंसिल मोबाइल फोन पर टैक्स कम करने का फैसला करती है, तो इसका सबसे सीधा फायदा स्मार्टफोन खरीदारों को मिल सकता है। खासतौर पर मिड-रेंज और प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों के लिए टैक्स में कटौती से अच्छी-खासी बचत संभव है।
उदाहरण के तौर पर, किसी मोबाइल फोन की टैक्स से पहले कीमत 30,000 रुपये है और उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है, तो टैक्स की राशि 5,400 रुपये होती है। यदि भविष्य में टैक्स दर कम होती है, तो इसी आधार पर ग्राहक को कम टैक्स देना पड़ेगा। हालांकि, वास्तविक कीमत में कितना बदलाव होगा, यह काउंसिल के अंतिम फैसले और कंपनियों की कीमतों पर निर्भर करेगा।
इसलिए फिलहाल ग्राहकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 12 सितंबर की बैठक में क्या फैसला होता है।
ITC रिटर्न को आसान बनाने पर भी चर्चा संभव
जीएसटी व्यवस्था से जुड़े कारोबारियों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC रिटर्न भी एक अहम मुद्दा है। मौजूदा व्यवस्था में कई कारोबारियों को जीएसटी रिटर्न और ITC से संबंधित प्रक्रियाओं में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
आगामी बैठक में जीएसटी रिटर्न प्रक्रिया को इनकम टैक्स रिटर्न की तरह सरल बनाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की संभावना है। अगर रिटर्न फाइलिंग और टैक्स क्रेडिट की प्रक्रिया आसान होती है, तो छोटे और मध्यम कारोबारियों को विशेष रूप से राहत मिल सकती है।
सरकार की कोशिश जीएसटी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने की रही है। ऐसे में आगामी बैठक में टैक्स दरों के साथ-साथ अनुपालन प्रक्रिया में सुधार पर भी ध्यान रहने की उम्मीद है।
क्या अभी मोबाइल खरीदना रोक दें?
जीएसटी में संभावित बदलाव की खबर के बाद कई ग्राहक मोबाइल खरीदने को लेकर असमंजस में हो सकते हैं। अगर किसी ग्राहक को तत्काल फोन की जरूरत नहीं है, तो 12 सितंबर की बैठक के फैसले का इंतजार करना एक विकल्प हो सकता है। लेकिन केवल संभावित टैक्स कटौती के आधार पर खरीदारी टालना जरूरी नहीं है, क्योंकि अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार में मोबाइल फोन की कीमतों पर डिस्काउंट, बैंक ऑफर और एक्सचेंज बोनस का भी बड़ा प्रभाव होता है। कई बार इन ऑफर्स के कारण ग्राहक को टैक्स में संभावित कमी से भी अधिक बचत मिल सकती है।
फैसला आने तक बनी रहेगी कीमतों पर नजर
फिलहाल मोबाइल फोन पर 18 प्रतिशत जीएसटी को कम किए जाने की संभावना ने उपभोक्ताओं की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। यदि जीएसटी काउंसिल इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो स्मार्टफोन बाजार में इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
हालांकि, 12 सितंबर की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा कि मोबाइल फोन पर जीएसटी घटेगा या नहीं। इसलिए अभी इसे संभावित राहत के तौर पर देखना बेहतर होगा। काउंसिल के अंतिम निर्णय के बाद ही मोबाइल फोन की कीमतों पर वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।