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राजस्व मामलों में ‘तारीख पर तारीख’ खत्म करने पर सीएम योगी का जोर

लखनऊः उत्तर प्रदेश में आम लोगों से जुड़े राजस्व मामलों के जल्द निस्तारण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने रविवार को शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों में तैनात फील्ड अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक की। बैठक में राजस्व न्यायालयों में […]

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  • August 30, 2026 2:20 pm IST, Published 30 minutes ago

लखनऊः उत्तर प्रदेश में आम लोगों से जुड़े राजस्व मामलों के जल्द निस्तारण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने रविवार को शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों में तैनात फील्ड अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक की। बैठक में राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों, जनशिकायतों के निस्तारण और प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राजस्व से जुड़े पुराने मामलों को लंबित रखने की प्रवृत्ति पर प्रभावी ढंग से रोक लगाई जाए। विशेष रूप से पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर उनका शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनती है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी इसका असर पड़ता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जमीन, संपत्ति और नागरिकों के अधिकारों से जुड़े विवाद आम परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। लंबे समय तक मुकदमे या राजस्व प्रक्रिया चलने से लोगों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए राजस्व न्यायालयों में मामलों की सुनवाई को प्रभावी और समयबद्ध बनाया जाना जरूरी है।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘तारीख पर तारीख’ वाली कार्यप्रणाली को बदलने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जहां किसी मामले के निस्तारण में कानूनी या प्रशासनिक अड़चन नहीं है, वहां अनावश्यक रूप से अगली तारीख देने की व्यवस्था को समाप्त किया जाए। अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए।

इसके साथ ही धारा 33 के अंतर्गत आने वाले अविवादित वरासत मामलों के निस्तारण को मिशन मोड में पूरा करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन मामलों में उत्तराधिकार को लेकर कोई विवाद नहीं है, उन्हें लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत तेजी से कार्रवाई कर लोगों को राहत पहुंचाई जानी चाहिए।

जनशिकायतों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि जनता की समस्याओं का समाधान केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे। शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता और वास्तविक स्थिति की निगरानी किए जाने की जरूरत है। उन्होंने फील्ड अधिकारियों को आम नागरिकों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने का संदेश दिया।

कानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान भी अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने प्रशासन और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने तथा किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं करने पर जोर दिया।

सरकार का फोकस राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण के साथ-साथ आम नागरिकों को समय पर न्याय और प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध कराने पर है। अब अधिकारियों के सामने चुनौती यह होगी कि मुख्यमंत्री के निर्देशों को जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाए और वर्षों से लंबित मामलों को निर्धारित प्राथमिकता के अनुसार निस्तारित किया जा सके।

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