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फर्जी सिम और IMEI छेड़छाड़ पर दूरसंचार विभाग की सख्त चेतावनी, जानें नियम

संचार साथी से जुड़ी CEIR सेवा के माध्यम से IMEI नंबर की जांच की जा सकती है। विभाग के आधिकारिक प्लेटफॉर्म के अनुसार, मोबाइल का IMEI नंबर *#06# डायल करके

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Gauravshali Bharat News
  • September 21, 2026 6:31 pm IST, Published 56 minutes ago

नई दिल्ली: फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मोबाइल सिम कार्ड जारी कराने, किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दूरसंचार कनेक्शन का इस्तेमाल करने और मोबाइल उपकरणों के IMEI नंबर में छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ दूरसंचार विभाग ने लोगों को सतर्क किया है। विभाग ने कहा है कि दूरसंचार संसाधनों का इस तरह दुरुपयोग साइबर अपराध और अन्य अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल हो सकता है। ऐसे मामलों में लागू कानूनी प्रावधानों के तहत दोषी पाए जाने पर जेल और आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है।

दूरसंचार विभाग के मध्य प्रदेश लाइसेंस सेवा क्षेत्र की ओर से की गई कार्रवाई में फर्जी तरीके से मोबाइल कनेक्शन सक्रिय किए जाने का एक मामला सामने आया है। विभाग के मुताबिक, साइबर अपराध से जुड़ी जांच के दौरान पता चला कि छत्तीसगढ़ में एक प्वाइंट ऑफ सेल एजेंट ने लोगों की जानकारी या सहमति के बिना उनके पहचान संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर 25 मोबाइल कनेक्शन सक्रिय किए थे। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित एजेंट के खिलाफ कार्रवाई की गई।

दूरसंचार विभाग और संबंधित सेवा प्रदाताओं ने कार्रवाई करते हुए उस प्वाइंट ऑफ सेल को ब्लैकलिस्ट कर दिया। इसके बाद उसे नए मोबाइल कनेक्शन जारी करने से रोक दिया गया। उसके माध्यम से सक्रिय किए गए 25 कनेक्शनों की डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के जरिए जांच की गई और उन्हें निष्क्रिय कर दिया गया।

विभाग ने लोगों से अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की नियमित जांच करने की अपील की है। इसके लिए संचार साथी पोर्टल और मोबाइल ऐप पर नागरिक-केंद्रित सेवाएं उपलब्ध हैं। दूरसंचार विभाग के अनुसार, अपने नाम पर जारी मोबाइल नंबरों की जानकारी हासिल कर सकते हैं और ऐसे कनेक्शन की पहचान कर सकते हैं जिन्हें उन्होंने नहीं लिया है। यह सुविधा फर्जी या अनधिकृत कनेक्शन की पहचान करने में मदद कर सकती है।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति के नाम पर जारी सिम कार्ड को दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए देना जोखिम भरा हो सकता है। यदि उस नंबर का इस्तेमाल साइबर अपराध या किसी अन्य गैरकानूनी गतिविधि में होता है, तो ग्राहक के लिए भी कानूनी परेशानी पैदा हो सकती है। इसलिए नागरिकों को अपने नाम से जारी सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को बेचने, किराये पर देने या अनधिकृत रूप से हस्तांतरित करने से बचने की सलाह दी गई है।

IMEI यानी इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी मोबाइल हैंडसेट की विशिष्ट पहचान से जुड़ा नंबर होता है। दूरसंचार विभाग के नियमों के तहत इस पहचान संख्या को जानबूझकर बदलना, हटाना या उसमें छेड़छाड़ करना प्रतिबंधित है। विभाग ने निर्माताओं, आयातकों और अन्य संबंधित पक्षों को भी IMEI से जुड़े नियमों के पालन की आवश्यकता बताई है।

सरकार ने नागरिकों को ऐसे उपकरणों से दूर रहने की सलाह दी है जिनमें IMEI नंबर बदलने या छेड़छाड़ करने की सुविधा हो। इसके अलावा जाली या फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम हासिल करने, किसी अन्य व्यक्ति को अपने नाम का सिम देने और कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी या अन्य दूरसंचार पहचान से छेड़छाड़ करने वाले माध्यमों के इस्तेमाल से भी बचने को कहा गया है।

मोबाइल खरीदते समय भी उपभोक्ताओं को हैंडसेट की प्रामाणिकता जांचने की सलाह दी गई है। संचार साथी से जुड़ी CEIR सेवा के माध्यम से IMEI नंबर की जांच की जा सकती है। विभाग के आधिकारिक प्लेटफॉर्म के अनुसार, मोबाइल का IMEI नंबर *#06# डायल करके देखा जा सकता है और KYM सेवा के जरिए उसकी जानकारी सत्यापित की जा सकती है। सत्यापन से डिवाइस के निर्माता, ब्रांड और मॉडल जैसी जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है।

दूरसंचार विभाग पहले भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल किए गए मोबाइल कनेक्शनों के खिलाफ डिजिटल विश्लेषण और पुनः सत्यापन की कार्रवाई करता रहा है। विभाग के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों से जुड़े संदिग्ध कनेक्शनों की पहचान के लिए तकनीकी प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा रहा है और सत्यापन में विफल रहने वाले कनेक्शनों को बंद किया जा सकता है।

विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने मोबाइल नंबर और हैंडसेट से संबंधित जानकारी को लेकर सतर्क रहें। अपने नाम पर जारी कनेक्शनों की जांच करने, अनजान नंबरों की रिपोर्ट करने और मोबाइल खरीदने से पहले IMEI सत्यापित करने जैसे कदम दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने में मदद कर सकते हैं। सरकार का जोर डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ दूरसंचार नेटवर्क को सुरक्षित रखने और साइबर अपराध में मोबाइल कनेक्शनों के संभावित दुरुपयोग को रोकने पर है।

 

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