मोबाइल की किस्त नहीं भरी तो युवक को बनाया बंधक, खून निकाला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निगोहां क्षेत्र से मोबाइल फोन की EMI को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। परिवार का आरोप है कि मोबाइल की एक किस्त बकाया होने के बाद 27 वर्षीय युवक नवल को घर से ले जाया गया। आरोप है कि उसे कई दिनों तक बंधक बनाकर […]

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  • September 16, 2026 8:53 am IST, Published 37 minutes ago

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निगोहां क्षेत्र से मोबाइल फोन की EMI को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। परिवार का आरोप है कि मोबाइल की एक किस्त बकाया होने के बाद 27 वर्षीय युवक नवल को घर से ले जाया गया। आरोप है कि उसे कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया, जबरन काम कराया गया और उसे लखनऊ के एक ब्लड बैंक में ले जाकर एक यूनिट खून भी निकलवाया गया। मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एक किस्त बनी विवाद की वजह

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नवल के परिवार ने करीब एक साल पहले निगोहां स्थित एक मोबाइल दुकान से लगभग 21,500 रुपये का Samsung मोबाइल फोन जीरो डाउन पेमेंट व्यवस्था के तहत लिया था। फोन की 12 महीने की EMI तय की गई थी और मासिक किस्त करीब 2,799 रुपये बताई गई है। परिवार का कहना है कि एक किस्त समय पर जमा नहीं हो सकी थी। इसके बाद मोबाइल से जुड़े लोगों द्वारा फोन वापस ले लिया गया था।

परिवार के अनुसार, 8 सितंबर को कुछ लोग नवल को उसके घर से अपने साथ ले गए। इसके बाद वह कई दिनों तक घर नहीं लौटा। परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की और उसके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की।

ब्लड बैंक ले जाने का भी आरोप

नवल और उसके परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, युवक को पहले लखनऊ के एक ब्लड बैंक ले जाया गया। वहां कथित तौर पर उसका एक यूनिट खून निकलवाया गया। इसके बाद उसे सदर क्षेत्र के एक मकान में ले जाकर रखा गया।

परिवार का आरोप है कि वहां नवल को बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई और उससे जबरन काम कराया गया। हालांकि, खून निकालने और जबरन मजदूरी कराने से जुड़े आरोपों की पुलिस जांच कर रही है। इसलिए इन आरोपों को जांच पूरी होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

परिवार से पहले EMI, फिर मांगे गए अतिरिक्त पैसे

मामले में परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि नवल को अपने कब्जे में रखने के बाद उसके बड़े भाई से संपर्क किया गया। उससे मोबाइल की बकाया 2,799 रुपये की किस्त ऑनलाइन जमा कराने को कहा गया। परिवार के मुताबिक, रकम भेजने के बाद भी नवल को तत्काल नहीं छोड़ा गया और कथित तौर पर 12 हजार रुपये अतिरिक्त मांगे गए।

परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि युवक को नुकसान पहुंचाने और पुलिस से संपर्क करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। इन धमकियों से जुड़े आरोपों की भी जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।

पांच दिन बाद घर पहुंचा युवक

रिपोर्टों के अनुसार, नवल करीब पांच दिनों तक परिवार से दूर रहा। बाद में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद वह घर पहुंचा। India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, युवक को कथित तौर पर एक Rapido कैब के जरिए वापस लाया गया और परिवार के सदस्य को उसका किराया भी देना पड़ा।

घटना के बाद परिवार ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिवार का कहना है कि शुरुआत में शिकायत को लेकर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद नवल की मां ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से संपर्क किया।

DCP के निर्देश के बाद दर्ज हुई FIR

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार की शिकायत के बाद DCP South Mohammad Mushtaq के स्तर से मामले में तत्काल FIR दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच के लिए टीम गठित की।

Additional DCP, South Zone Vasant Kumar Rallapalli के अनुसार, FIR में एक अज्ञात व्यक्ति और शुबham सिंह को आरोपी बनाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की मानव तस्करी, अवैध श्रम, गलत तरीके से बंधक बनाने और चोट पहुंचाने से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।

पुलिस जांच में सामने आएगी पूरी सच्चाई

इस मामले में अभी पुलिस की जांच जारी है। परिवार और पीड़ित की ओर से लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी। पुलिस कथित घटनाक्रम, मोबाइल की खरीद और EMI व्यवस्था, पैसे के लेनदेन, युवक को ले जाने वाले लोगों तथा ब्लड बैंक से जुड़े तथ्यों की जांच कर सकती है।

मामले ने मोबाइल फोन की EMI वसूली के तरीकों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। किसी भी बकाया भुगतान की स्थिति में कानूनी और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है। किसी व्यक्ति को कथित तौर पर जबरन ले जाना, बंधक बनाना या उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक गतिविधि कराना गंभीर कानूनी विषय बन सकता है।

निष्कर्ष

लखनऊ के निगोहां में सामने आया यह मामला एक मोबाइल EMI विवाद से शुरू होकर कथित अपहरण, बंधक बनाए जाने, जबरन काम कराने और खून निकलवाने के आरोपों तक पहुंच गया। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे, युवक को किस उद्देश्य से ले जाया गया और ब्लड बैंक से जुड़े आरोपों की वास्तविकता क्या है।

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