नई दिल्ली: दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए इमिग्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव किया गया है। मंगलवार से एयरपोर्ट पर यात्रियों को इमिग्रेशन क्लियरेंस के लिए बोर्डिंग पास पर अलग से फिजिकल मुहर या स्टांप लगवाने की आवश्यकता नहीं होगी। अब मोबाइल फोन में मौजूद ई-बोर्डिंग पास के जरिए भी यात्री अपनी इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
इस व्यवस्था के लागू होने से यात्रियों को एयरपोर्ट पर कागजी औपचारिकताओं और बोर्डिंग पास की स्टांपिंग के लिए अतिरिक्त समय नहीं देना पड़ेगा। माना जा रहा है कि इससे इमिग्रेशन काउंटरों पर भीड़ कम करने और यात्रियों की आवाजाही को तेज करने में मदद मिलेगी। नई व्यवस्था के तहत यात्री अपने स्मार्टफोन पर उपलब्ध मोबाइल बोर्डिंग पास या ई-बोर्डिंग पास प्रस्तुत कर इमिग्रेशन क्लीयरेंस करा सकते हैं।
यानी अब हर यात्री के लिए कागज पर प्रिंटेड बोर्डिंग पास लेना और उस पर इमिग्रेशन की मुहर लगवाना जरूरी नहीं रहेगा। डिजिटल प्रक्रिया का उद्देश्य यात्रियों के अनुभव को अधिक सुविधाजनक और तेज बनाना है। खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के दौरान एयरपोर्ट पर अलग-अलग चरणों में होने वाली औपचारिकताओं को कम करने से यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
डिजिटल व्यवस्था शुरू होने के बावजूद जिन यात्रियों के पास फिजिकल बोर्डिंग पास है, उन्हें भी परेशानी नहीं होगी। एयरपोर्ट पर प्रिंटेड बोर्डिंग पास को स्वीकार किया जा रहा है। इसका मतलब है कि यात्रियों के पास डिजिटल और पारंपरिक, दोनों विकल्प उपलब्ध रहेंगे। इस बदलाव से उन यात्रियों को भी सुविधा मिलेगी जो मोबाइल बोर्डिंग पास का इस्तेमाल नहीं करना चाहते या किसी तकनीकी कारण से डिजिटल पास उपलब्ध नहीं करा पाते हैं।
फास्ट ट्रैक इमिग्रेशन-ट्रस्टेड ट्रैवलर प्रोग्राम यानी FTI-TTP में पंजीकृत यात्रियों के लिए डिजिटल व्यवस्था और अधिक उपयोगी साबित होगी। इस श्रेणी में आने वाले यात्री अपने डिजिटल बोर्डिंग पास का इस्तेमाल करते हुए ई-गेट्स के जरिए इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। ई-गेट आधारित व्यवस्था का उद्देश्य पात्र यात्रियों को कम समय में इमिग्रेशन प्रक्रिया से गुजरने की सुविधा देना है। इससे नियमित इमिग्रेशन काउंटरों पर दबाव कम होने और एयरपोर्ट के संचालन को अधिक सुचारु बनाने में भी मदद मिल सकती है।
आईजीआई एयरपोर्ट पर लागू किया गया यह बदलाव देश में आव्रजन प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की व्यापक पहल का हिस्सा बताया जा रहा है। सरकार और एयरपोर्ट से जुड़ी एजेंसियां यात्रियों की पहचान और यात्रा से जुड़ी प्रक्रियाओं में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही हैं। डिजिटल बोर्डिंग पास के इस्तेमाल से कागज पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ एयरपोर्ट पर यात्रियों की आवाजाही को भी अधिक व्यवस्थित करने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस तरह की तकनीकी व्यवस्था को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नई ई-बोर्डिंग पास सुविधा का इस्तेमाल करने वाले शुरुआती यात्रियों में ब्रिटिश एयरवेज का एक यात्री शामिल रहा। उसे इस नई व्यवस्था का लाभ लेने वाले पहले यात्रियों में शामिल होने के तौर पर मान्यता दी गई। आईजीआई एयरपोर्ट देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है और यहां से बड़ी संख्या में यात्री अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर रवाना होते हैं। ऐसे में इमिग्रेशन प्रक्रिया में डिजिटल विकल्प बढ़ने से यात्रियों के लिए एयरपोर्ट अनुभव को अधिक सहज बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि विदेश जाने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन के लिए बोर्डिंग पास पर अलग से स्टांप लगवाने की प्रक्रिया से राहत मिलेगी। मोबाइल में मौजूद बोर्डिंग पास के जरिए प्रक्रिया पूरी होने से कागजी काम घटेगा और समय की बचत हो सकती है। हालांकि, यात्रियों को अपनी एयरलाइन की बोर्डिंग और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं का पालन करना होगा। साथ ही जिन यात्रियों के लिए किसी विशेष प्रक्रिया या दस्तावेज की जरूरत हो, उन्हें संबंधित नियमों के अनुसार औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।