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सुप्रीम कोर्ट में सरकार का भरोसा, CJP ने वापस लिया दिल्ली मार्च

नई दिल्ली: NEET विवाद और छात्रों से जुड़े मामलों को लेकर 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च को CJP ने वापस लेने का फैसला किया है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद सामने आया। सरकार ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि छात्रों से जुड़े मामलों में […]

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • September 1, 2026 3:55 pm IST, Published 59 minutes ago

नई दिल्ली: NEET विवाद और छात्रों से जुड़े मामलों को लेकर 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च को CJP ने वापस लेने का फैसला किया है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद सामने आया। सरकार ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि छात्रों से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर, भविष्य में कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को मुआवजे से संबंधित मुद्दों पर कदम उठाए जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार पहले दिए गए आश्वासनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इनमें आंदोलन से जुड़े छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने, आगे नई एफआईआर नहीं करने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की बात शामिल है।

मेहता ने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस से संबंधित 13 एफआईआर को आगे बढ़ाने की इच्छा नहीं है। हालांकि, कुछ अन्य मामलों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत बताई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार, महाराष्ट्र, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से संबंधित मामलों में भी अदालत के सामने आवेदन आए हैं। मुआवजे के मुद्दे पर केंद्र ने कहा कि सरकार अपने वादे से पीछे नहीं हट रही है। हालांकि, इसके लिए पूरी प्रक्रिया और पात्रता तय करने की जरूरत होगी। सरकार ने इस व्यवस्था को तैयार करने के लिए करीब तीन महीने का समय मांगा।

CJP की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने सवाल किया कि क्या इस अवधि के भीतर प्रभावित परिवारों को भुगतान भी किया जाएगा। इस पर केंद्र की ओर से सकारात्मक जवाब दिया गया। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 के तहत संबंधित मामलों में व्यापक राहत देने का अनुरोध भी किया। सरकार का तर्क था कि 20 जुलाई से जुड़े मामलों को लेकर एक समान समाधान निकाला जा सकता है।

इसी बीच, अदालत ने CJP के प्रस्तावित 5 सितंबर के मार्च का मुद्दा भी सामने रखा। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जब केंद्र अपने आश्वासन को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो संगठन को भी अपने अगले कदम पर विचार करना चाहिए। इसके बाद CJP के सह-संयोजक सौरभ दास ने अदालत में संगठन का रुख स्पष्ट किया। सौरभ दास ने कहा कि केंद्र की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासन और अदालत की प्रक्रिया को देखते हुए संगठन ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने सरकार के रुख की सराहना करते हुए अदालत और अपने वकीलों के प्रति आभार भी जताया।

यह मार्च NEET परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्रों की शिकायतों को लेकर प्रस्तावित था। CJP का आरोप रहा है कि केंद्र ने आंदोलन खत्म कराने के दौरान जो भरोसे दिए थे, उन्हें पूरी तरह लागू नहीं किया गया। संगठन ने परीक्षा से संबंधित मांगों के अलावा आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और छात्रों से जुड़े मामलों को भी उठाया था।

5 सितंबर के मार्च को वापस लेने के फैसले से फिलहाल केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति कम होने के संकेत मिले हैं। हालांकि, सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों का वास्तविक क्रियान्वयन आगे महत्वपूर्ण रहेगा। एफआईआर वापस लेने और मुआवजे की प्रक्रिया किस तरह लागू होती है, इस पर आंदोलन से जुड़े पक्षों की नजर बनी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों से सकारात्मक रवैया बनाए रखने की बात कही। उनका संदेश था कि यदि सरकार और प्रदर्शनकारी सद्भावना के साथ आगे बढ़ें तो विवादों का समाधान संभव है। इस घटनाक्रम के बाद 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित CJP मार्च अब नहीं होगा। फिलहाल बातचीत, न्यायिक प्रक्रिया और सरकार के आश्वासनों के पालन पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।

 

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