लखनऊः बख्शी का तालाब (बीकेटी) स्थित राम सागर मिश्र अस्पताल में एक गर्भवती महिला का ऑपरेशन रुपये न देने के कारण टालने और उसे ऑपरेशन थिएटर (OT) से बाहर निकालने का आरोप सामने आया है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए। जांच के बाद आरोपी डॉक्टर पूजा सिंह को अस्पताल से हटा दिया गया है और उन्हें माल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भेजा गया है। वहीं, ओटी अटेंडेंट देवेंद्र कुमार सिंह की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
बताया जा रहा है कि गर्भवती महिला प्रसव के लिए राम सागर मिश्र अस्पताल पहुंची थी। परिजनों के मुताबिक, चिकित्सकों ने ऑपरेशन की जरूरत बताई। आरोप है कि ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू होने से पहले रुपये की मांग की गई। जब परिजन कथित तौर पर मांगी गई रकम नहीं दे सके तो महिला को ऑपरेशन थिएटर से बाहर कर दिया गया और उसका ऑपरेशन नहीं किया गया।
परिजनों ने इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद उनसे रुपये की मांग की गई और रकम उपलब्ध नहीं करा पाने पर गर्भवती महिला को इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ा। मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीरता से लिया।
घटना की जानकारी सामने आने पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को पूरे प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद अस्पताल स्तर पर जांच की गई और प्रथम दृष्टया जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई।
कार्रवाई के तहत डॉक्टर पूजा सिंह को राम सागर मिश्र अस्पताल से हटा दिया गया। उन्हें अब माल सीएचसी भेजा गया है। इसके अलावा ओटी अटेंडेंट देवेंद्र कुमार सिंह को भी अस्पताल की सेवाओं से बर्खास्त कर दिया गया। विभागीय कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य महकमे में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
अधिकारियों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को निर्धारित सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है। इलाज के बदले अनधिकृत रूप से पैसे मांगने या आर्थिक स्थिति के आधार पर किसी मरीज के उपचार में बाधा डालने की शिकायत को गंभीर माना जाता है। ऐसे मामलों में जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों के साथ व्यवहार तथा स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी पर भी सवाल खड़े किए हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं के मामले में समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में ऑपरेशन को लेकर सामने आए आरोप ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल डॉक्टर और ओटी अटेंडेंट के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। मामले में विभागीय स्तर पर आगे की जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी स्पष्ट की जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों से अनधिकृत धन की मांग और इलाज में लापरवाही जैसी शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
यह मामला एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता, जवाबदेही और मरीजों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण सवाल सामने लाता है। अब निगाह इस बात पर है कि जांच में आरोपों की पूरी सच्चाई क्या सामने आती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।