सहारनपुर में तड़के मस्जिद पर चला बुलडोजर, मचा सियासी घमासान

सहारनपुर, उत्तर प्रदेश: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक पुरानी मस्जिद को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद शनिवार तड़के प्रशासनिक कार्रवाई के बाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मस्जिद के ढांचे को बुलडोजर की मदद से हटाया गया। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट […]

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  • September 6, 2026 8:30 am IST, Published 1 hour ago

सहारनपुर, उत्तर प्रदेश: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक पुरानी मस्जिद को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद शनिवार तड़के प्रशासनिक कार्रवाई के बाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मस्जिद के ढांचे को बुलडोजर की मदद से हटाया गया। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर के प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी और बाहरी लोगों की आवाजाही रोक दी गई।

इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां प्रशासन ने इसे सरकारी भूमि पर मौजूद अनधिकृत निर्माण हटाने की कानूनी प्रक्रिया बताया है, वहीं मस्जिद से जुड़े पक्ष ने कार्रवाई की प्रक्रिया और समय को लेकर सवाल उठाए हैं। मामले को लेकर विपक्षी नेताओं ने भी सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा है।

तड़के कलेक्ट्रेट पहुंची प्रशासनिक टीम

रिपोर्टों के मुताबिक, शनिवार सुबह कार्रवाई से पहले ही कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी। जेसीबी और अन्य मशीनरी को रात के समय परिसर में पहुंचाया गया। सुबह होते-होते प्रशासनिक टीम ने मस्जिद के ढांचे को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान तैनात रहे।

प्रशासन की ओर से सुरक्षा बढ़ाने का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया। कलेक्ट्रेट परिसर के कई गेट बंद कर दिए गए थे और बिना अनुमति किसी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई। संवेदनशीलता को देखते हुए आसपास के क्षेत्र में भी पुलिस बल की तैनाती की गई।

जमीन और निर्माण की वैधता बना विवाद का केंद्र

पूरे मामले की जड़ जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता से जुड़ी है। प्रशासन का पक्ष रहा है कि कलेक्ट्रेट परिसर की जमीन सरकारी है और वहां मौजूद धार्मिक ढांचा अनधिकृत रूप से बना था। इसी आधार पर इसे हटाने की कार्रवाई की गई।

रिपोर्टों के अनुसार, पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में इस मामले पर आदेश आया था। इसके बाद मस्जिद प्रबंधन समिति की ओर से अपील की गई। जिला न्यायालय ने अपील को खारिज करते हुए पहले के आदेश को बरकरार रखा, जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई आगे बढ़ाई।

हालांकि, मस्जिद से जुड़े पक्ष ने इसकी पुरानियत और जमीन से संबंधित दावों को लेकर अलग रुख रखा है। कुछ रिपोर्टों में मस्जिद से जुड़े लोगों की ओर से इसे कई दशक पुराना बताया गया है और जमीन के अधिकार को लेकर सवाल उठाए गए हैं। यही वजह है कि कार्रवाई के बाद विवाद केवल अतिक्रमण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानूनी प्रक्रिया और धार्मिक स्थल की स्थिति को लेकर भी बहस तेज हो गई।

कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई

मामले में अदालत की कार्यवाही महत्वपूर्ण रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, जिला न्यायालय ने पहले के प्रशासनिक आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद ढांचे को हटाने की कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप की गई।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत के आदेश में जमीन को सरकारी संपत्ति और धार्मिक ढांचे को अनधिकृत निर्माण मानने वाले पूर्व आदेश को बरकरार रखा गया था। हालांकि, मस्जिद के संरक्षक की ओर से प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए और दावा किया गया कि आगे की कानूनी प्रक्रिया का विकल्प मौजूद था।

यानी इस पूरे मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं—प्रशासन इसे सरकारी जमीन से अनधिकृत निर्माण हटाने की कार्रवाई बता रहा है, जबकि मस्जिद से जुड़े पक्ष की ओर से ढांचे की पुरानियत और प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई गई है।

कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज

मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई। विपक्षी नेताओं ने कार्रवाई के समय और तरीके पर सवाल उठाए। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन के सहारनपुर जाने से पहले उन्हें कथित तौर पर उनके आवास पर नजरबंद किए जाने की खबर भी सामने आई।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी कार्रवाई पर सवाल उठाए। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी मस्जिद गिराए जाने को लेकर सरकार की आलोचना की और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल उठा।

वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का जोर इस बात पर है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए अदालत के आदेश के अनुपालन में कार्रवाई की गई। अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।

भारी सुरक्षा के बीच हटाया गया ढांचा

कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर पूरी तरह सुरक्षा घेरे में रहा। मशीनों की मदद से ढांचे को हटाया गया और मलबे को वहां से बाहर ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई। आसपास किसी भी तरह की भीड़ न जुटे, इसके लिए पुलिस ने कड़े इंतजाम किए थे।

मामला संवेदनशील होने के कारण प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना रही। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों की मौजूदगी और बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती से साफ था कि प्रशासन किसी भी संभावित तनाव से निपटने के लिए पहले से तैयार था।

आगे क्या होगा, इस पर टिकी नजर

सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद को लेकर विवाद अब ध्वस्तीकरण के बाद भी खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। एक तरफ प्रशासन अदालत के आदेश और सरकारी जमीन से जुड़े अपने दावे के आधार पर कार्रवाई को उचित बता रहा है, वहीं मस्जिद पक्ष और विपक्षी नेता कानूनी प्रक्रिया तथा कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं।

ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर और कानूनी तथा राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। फिलहाल प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी है और पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।

नोट: मस्जिद की उम्र को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इसलिए इस खबर में इसे निश्चित रूप से “100 साल पुरानी” बताने के बजाय उपलब्ध स्रोतों के अनुसार पुरानी/ऐतिहासिक मस्जिद के रूप में संदर्भित किया गया है।

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