नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत के दर्दनाक हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ा फैसला लिया है। MCD ने चार मंजिल से अधिक ऊंचे अवैध निर्माणों को तत्काल सील करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ऐसे निर्माणों की अनुमति देने या उनकी अनदेखी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
यह फैसला रविवार को सत्य निकेतन में हुई इमारत दुर्घटना के बाद सामने आया है। हादसे में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 11 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। बचाव और तलाशी अभियान के दौरान एक और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या छह पहुंची।
सत्य निकेतन हादसे के बाद क्यों सख्त हुआ MCD?
सत्य निकेतन का इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक है और यहां बड़ी संख्या में छात्र PG तथा किराये के मकानों में रहते हैं। ऐसे में इमारत गिरने की घटना ने न केवल निर्माण मानकों बल्कि छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हादसे वाली इमारत में बेसमेंट के साथ कई मंजिलें थीं और वहां PG के रूप में छात्रों के रहने की व्यवस्था थी। प्रारंभिक जानकारी में निर्माण और मरम्मत से जुड़े काम का भी उल्लेख सामने आया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का जायजा लेने के बाद कहा था कि इमारत में निर्माण या मरम्मत के दौरान बेसमेंट में खुदाई किए जाने से एक पिलर खिसकने की स्थिति बनी और इसके बाद पूरी संरचना ढह गई। हालांकि हादसे की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
चार मंजिल से ऊपर की अवैध इमारतों पर तत्काल कार्रवाई
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने अब चार मंजिल से अधिक ऊंचे अवैध निर्माणों को तत्काल सील करने का आदेश दिया है। दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने कहा है कि सत्य निकेतन घटना के दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
MCD के निर्देश में केवल भवन मालिकों या निर्माणकर्ताओं तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी गई है। ऐसे निर्माणों को बनने देने के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की बात कही गई है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ नौकरी से हटाने जैसी कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी गई है।
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दिल्ली के कई इलाकों में पुराने मकानों को अतिरिक्त मंजिलें जोड़कर किराये के कमरों या PG के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
छह लोगों की मौत, 11 लोगों का रेस्क्यू
सत्य निकेतन में रविवार दोपहर इमारत गिरने के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई थी। मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका के चलते दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस और अन्य बचाव एजेंसियों ने संयुक्त रूप से अभियान शुरू किया।
राहत और बचाव दलों ने मलबे को हटाकर लोगों को बाहर निकालने का काम किया। अधिकारियों के अनुसार 11 लोगों को बचाया गया, जबकि हादसे में छह लोगों की मौत हो गई। AIIMS ट्रॉमा सेंटर में भी हादसे से जुड़े घायलों को लाया गया। एक रिपोर्ट के अनुसार, पांच लोगों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था, जबकि एक व्यक्ति ने उपचार के दौरान दम तोड़ा।
हादसे के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई और आसपास की संरचनाओं को लेकर भी सावधानी बरती जा रही है।
FIR दर्ज, मालिक और अन्य पर जांच
हादसे को लेकर दिल्ली पुलिस ने इमारत के कथित मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इमारत में किस तरह का निर्माण या मरम्मत कार्य चल रहा था और क्या उससे भवन की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हुई थी।
इसके अलावा दिल्ली सरकार ने घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए हैं। जांच का उद्देश्य हादसे के कारणों, निर्माण की वैधता और संभावित लापरवाही की जिम्मेदारी तय करना है।
PG और छात्र आवासों की सुरक्षा पर बढ़ा दबाव
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में PG और छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ऐसे इलाकों में जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहते हैं, वहां भवन की मंजूरी, फायर सेफ्टी, स्ट्रक्चरल स्थिरता और निर्माण नियमों की नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।
हादसे के बाद छात्र संगठनों ने भी MCD की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और छात्र आवासों में सुरक्षा नियमों के पालन की मांग की। MCD मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन की खबरें भी सामने आई हैं।
अब सवाल सिर्फ सीलिंग का नहीं, निगरानी का भी
MCD का ताजा आदेश तत्काल कार्रवाई का संकेत जरूर देता है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अवैध निर्माणों की पहचान और निगरानी कितनी प्रभावी तरीके से होती है। किसी इमारत के चार या उससे अधिक मंजिल तक पहुंचने के बाद कार्रवाई करने के बजाय निर्माण के शुरुआती चरण में ही नियमों का पालन सुनिश्चित करना ज्यादा प्रभावी हो सकता है।
विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों के लिए अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सीलिंग की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित न रहे। जिन भवनों को असुरक्षित या अवैध पाया जाता है, वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना और आगे किसी दुर्घटना की संभावना को रोकना भी प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली के शहरी क्षेत्रों में भवन सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। MCD का नया आदेश अगर प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो इससे अवैध निर्माण पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस कार्रवाई की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नियम तोड़ने वाले भवन मालिकों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कितनी तेजी और पारदर्शिता से कार्रवाई होती है।
फिलहाल सत्य निकेतन हादसे की जांच जारी है और प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के होने की संभावना को पूरी तरह समाप्त करना तथा हादसे की जिम्मेदारी तय करना है।