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सत्य निकेतन हादसे में जवाबदेही तय, डिप्टी कमिश्नर समेत पांच अधिकारी निलंबित

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली नगर निगम ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। हादसे की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में कदम उठाते हुए दक्षिणी जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबित अधिकारियों में डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता रणवीर […]

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  • September 7, 2026 1:42 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली नगर निगम ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। हादसे की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में कदम उठाते हुए दक्षिणी जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबित अधिकारियों में डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता रणवीर सिंह, बिल्डिंग विभाग के कार्यकारी अभियंता ललित कुमार गोयल, सहायक अभियंता सुनील चौहान और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार शामिल हैं।

जानकारी के मुताबिक, एमसीडी कमिश्नर के निर्देश पर इन अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। एमसीडी के विजिलेंस विभाग ने सभी अधिकारियों के लिए अलग-अलग निलंबन आदेश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित रहने तक निलंबन प्रभावी रहेगा। इस कार्रवाई को सत्य निकेतन हादसे के बाद नगर निगम स्तर पर अब तक की प्रमुख कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना ने राजधानी में भवन सुरक्षा और निर्माण गतिविधियों की निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। हादसे के बाद यह जांच का विषय बना है कि संबंधित भवन में निर्माण कार्य नियमों के अनुरूप हो रहा था या नहीं और क्या जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की ओर से समय रहते आवश्यक कार्रवाई की गई थी। बिल्डिंग विभाग की जिम्मेदारी निर्माण गतिविधियों की निगरानी करने के साथ-साथ भवन नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई करना भी है।

विभागीय व्यवस्था के तहत सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता आमतौर पर क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों की शुरुआती निगरानी और मौके से जुड़ी रिपोर्टिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यकारी अभियंता और अधीक्षण अभियंता के स्तर पर भी क्षेत्र की निगरानी और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जिम्मेदारी होती है। वहीं, जोन के डिप्टी कमिश्नर की भूमिका व्यापक प्रशासनिक निगरानी से जुड़ी होती है। ऐसे में पांच अलग-अलग स्तरों के अधिकारियों का निलंबन यह संकेत देता है कि निगम ने मामले में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

 

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हादसे के बाद एमसीडी कमिश्नर संजीव खिरवार ने भी स्थिति को लेकर जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि दुर्घटना में सात लोगों की जान गई है। उनके मुताबिक, हादसे के बाद आसपास की एक अन्य इमारत भी कमजोर हो गई थी। उसे तत्काल और मजबूत करने का काम किया गया। प्रशासन की ओर से कमजोर इमारत को योजनाबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी भी की गई थी, ताकि आसपास के लोगों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

कमिश्नर ने यह भी बताया था कि हादसे वाली इमारत के मालिक से संबंधित कुछ दस्तावेज संपत्ति कर के रिकॉर्ड से मिले हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, मालिक की ओर से पिछले वर्ष प्रॉपर्टी टैक्स जमा किया गया था। इसके अलावा वर्ष 2007 में कन्वर्जन चार्ज का भुगतान किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। पुलिस की ओर से इमारत के मालिक का पता लगाने की कोशिश किए जाने की बात कही गई थी।

 

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एमसीडी के अनुसार, हादसे वाली इमारत का निर्माण 1970 के दशक में हुआ था। अधिकारियों के मुताबिक, उपलब्ध रिकॉर्ड में यह सामने नहीं आया कि इमारत को इससे पहले कोई नोटिस जारी किया गया था या उसे सील किया गया था। नगर निगम को भवन के संबंध में किसी शिकायत के मिलने की जानकारी भी नहीं थी।

अब पांच अधिकारियों के निलंबन के बाद विभागीय जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि भवन से संबंधित निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी निभाने में कहीं लापरवाही तो नहीं हुई। जांच के दौरान निर्माण गतिविधियों, भवन की स्थिति, उपलब्ध रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जा सकती है। कार्रवाई का अगला चरण जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।

सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में पुराने भवनों की सुरक्षा, अवैध या नियमों के विपरीत निर्माण और सरकारी एजेंसियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। हादसे के बाद प्रशासन के सामने तत्काल राहत और बचाव के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की चुनौती भी है। अधिकारियों पर हुई कार्रवाई से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि भवन सुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

 

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