• होम
  • देश
  • 38 सालों में किसी भारतीय रक्षा मंत्री का श्रीलंका दौरा

38 सालों में किसी भारतीय रक्षा मंत्री का श्रीलंका दौरा

नयी दिल्ली:  भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर श्रीलंका रवाना होने जा रहे हैं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय रक्षा मंत्री की श्रीलंका यात्रा हो रही है, […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • September 8, 2026 10:45 am IST, Published 3 hours ago

नयी दिल्ली:  भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर श्रीलंका रवाना होने जा रहे हैं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय रक्षा मंत्री की श्रीलंका यात्रा हो रही है, ऐसे में इस दौरे पर दोनों देशों के बीच सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विशेष चर्चा की उम्मीद है।

राजनाथ सिंह अपनी यात्रा के दौरान श्रीलंका के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के साथ मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत होने की संभावना है। खासतौर पर रक्षा और सुरक्षा सहयोग, हिंद महासागर क्षेत्र में साझेदारी तथा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श हो सकता है। भारत और श्रीलंका के बीच भौगोलिक निकटता के साथ-साथ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्ते भी काफी पुराने हैं।

रक्षा मंत्री की यात्रा का एक अहम पहलू श्रीलंका में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात भी होगा। राजनाथ सिंह वहां भारतीय मूल के लोगों के साथ संवाद करेंगे और उनके अनुभवों तथा दोनों देशों के बीच सामाजिक संपर्क को समझने का अवसर प्राप्त करेंगे। श्रीलंका में भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।

भारत की पड़ोसी देशों को लेकर नीति में श्रीलंका को विशेष महत्व दिया जाता है। सरकार की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत भारत अपने आसपास के देशों के साथ सहयोग और संपर्क को प्राथमिकता देता है। इसके अलावा हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने वाली ‘महासागर’ यानी MAHASAGAR पहल भी भारत की क्षेत्रीय दृष्टि का महत्वपूर्ण हिस्सा है। श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए हिंद महासागर से जुड़े विषयों में दोनों देशों का सहयोग खास महत्व रखता है।

38 सालों में किसी भारतीय रक्षा मंत्री का पहला दौरा है,श्रीलंका का दौरा करने वाले अंतिम भारतीय रक्षा मंत्री केसी पंत थे, जिन्होंने राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में सेवा करते हुए 1988 में देश की यात्रा की थी। राजनाथ सिंह ने श्रीलंका को भारत के महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक बताया है। उन्होंने दोनों देशों के बीच पुराने संबंधों और गहरे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीलंका भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘महासागर’ पहलों के तहत अहम भागीदार है। ऐसे में उनकी यात्रा को केवल एक नियमित राजनयिक दौरे के बजाय व्यापक द्विपक्षीय सहयोग के संदर्भ में देखा जा रहा है।

भारत और श्रीलंका के रक्षा संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार चर्चा में रहे हैं। दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और संयुक्त गतिविधियों के जरिए सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जाते रहे हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा भी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण विषय है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी समन्वय जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ी हैं।

रक्षा मंत्री की यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हिंद महासागर क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत लगातार बढ़ रही है। भारत के लिए श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति उसे क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री सहयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है। वहीं, श्रीलंका के लिए भारत के साथ मजबूत संबंध आर्थिक, सुरक्षा और मानवीय सहयोग के लिहाज से उपयोगी हैं।

इस तीन दिवसीय यात्रा के दौरान होने वाली बैठकों से दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत और भारतीय समुदाय से संपर्क के जरिए भारत-श्रीलंका संबंधों के राजनीतिक और जनस्तरीय दोनों पहलुओं को मजबूती देने का प्रयास किया जाएगा। यात्रा से दोनों देशों के बीच भरोसे, सहयोग और साझेदारी को आगे बढ़ाने का संदेश भी मिलने की संभावना है।

 

Advertisement