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OneTag सुविधा से बदलेगा FASTag बैंक, नया टैग लेने की जरूरत नहीं

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए आने वाले समय में टोल भुगतान का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। सरकार देश में ऐसी डिजिटल और बैरियर-फ्री टोलिंग व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है, जिसमें वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। केंद्रीय सड़क परिवहन […]

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  • September 11, 2026 5:46 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए आने वाले समय में टोल भुगतान का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। सरकार देश में ऐसी डिजिटल और बैरियर-फ्री टोलिंग व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है, जिसमें वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में बताया कि एआई आधारित नई टोलिंग प्रणाली फरवरी-मार्च 2027 तक लागू होने की उम्मीद है।

नई व्यवस्था में ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन यानी ANPR तकनीक को FASTag के साथ जोड़ा जाएगा। इसके जरिए गुजरने वाले वाहनों की पहचान और टोल वसूली स्वचालित तरीके से की जा सकेगी। मौजूदा व्यवस्था में जहां वाहनों को टोल प्लाजा पर निर्धारित लेन से गुजरना पड़ता है, वहीं नई प्रणाली का उद्देश्य बिना किसी अवरोध के वाहनों को आगे बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि इससे यात्रा के दौरान लगने वाला समय कम होगा और टोल संग्रह की प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी बनेगी।

गडकरी ने कहा कि एआई और सीमलेस टोलिंग के इस्तेमाल से भारत टोल प्लाजा पर वाहनों के रुकने की पुरानी व्यवस्था से आगे बढ़ रहा है। सरकार भविष्य के राजमार्गों को स्मार्ट, बाधा-मुक्त और कैशलेस बनाने की दिशा में काम कर रही है। नई तकनीक लागू होने के बाद टोल भुगतान की प्रक्रिया वाहन की पहचान के आधार पर स्वत: पूरी होने की उम्मीद है।

FASTag पहले ही देश में डिजिटल टोल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देश में 98 प्रतिशत से अधिक वाहन FASTag का इस्तेमाल कर रहे हैं और अब तक 13 करोड़ से ज्यादा FASTag जारी किए जा चुके हैं। FASTag के आने से टोल प्लाजा पर वाहनों के इंतजार में भी काफी कमी आई है। पहले कई जगहों पर वाहनों को 12 से 30 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था, जबकि FASTag के इस्तेमाल से इस प्रतीक्षा समय में करीब 80 से 90 प्रतिशत तक कमी आने का दावा किया गया है।

FASTag को 2014 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था और वर्ष 2021 में इसे अनिवार्य कर दिया गया। इसके बाद डिजिटल टोल भुगतान का दायरा तेजी से बढ़ा। अब सरकार अगली पीढ़ी की टोलिंग व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है, जिसमें वाहन को टोल बूथ पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी।

नई व्यवस्था से टोल संग्रह में भी बड़ा फायदा होने की उम्मीद जताई गई है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, बैरियर-फ्री डिजिटल टोलिंग लागू होने के बाद टोल राजस्व में सालाना करीब 10,000 करोड़ रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका एक कारण टोल वसूली में अधिक पारदर्शिता और वाहनों की स्वचालित पहचान को माना जा रहा है।

इसी कार्यक्रम में FASTag उपयोगकर्ताओं के लिए ‘OneTag’ सुविधा भी शुरू की गई है। इसका उद्देश्य उन वाहन चालकों की परेशानी कम करना है, जो अपने FASTag से जुड़े बैंक खाते को बदलना चाहते हैं। नई सुविधा के तहत उपयोगकर्ता को बैंक बदलने के लिए नया FASTag खरीदने या पुराने टैग को वाहन से हटाने की जरूरत नहीं होगी। FASTag को उसी टैग के साथ दूसरे बैंक से जोड़ने की सुविधा उपलब्ध होगी।

OneTag के जरिए FASTag उपयोगकर्ता बैंक बदलने की प्रक्रिया को अधिक आसान तरीके से पूरा कर सकेंगे। इससे खास तौर पर उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो बैंकिंग सेवाओं में बदलाव के कारण अपना FASTag खाता दूसरे बैंक में स्थानांतरित करना चाहते हैं।

कुल मिलाकर, एआई आधारित टोलिंग और OneTag जैसी सुविधाएं देश में राजमार्गों पर डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अगले स्तर पर ले जाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही हैं। यदि नई प्रणाली तय समयसीमा के अनुसार लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में टोल प्लाजा पर रुकने और भुगतान के लिए कतार में लगने की मौजूदा व्यवस्था काफी हद तक बदल सकती है।

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