पटना: बिहार में प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की स्मृति को स्थायी रूप से संजोने की मांग तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने कहा है कि बिहार की धरती से जुड़े ऐसे नेताओं और महापुरुषों की आदमकद प्रतिमाएं लगाई जानी चाहिए, जिन्होंने प्रदेश और समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थलों के नाम भी ऐसी विभूतियों के नाम पर रखे जाने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके कार्यों को याद रख सकें।
चिराग पासवान ने विशेष तौर पर अपने पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पटना में आदमकद प्रतिमा लगाने की मांग का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के बिहार प्रभारी अरुण भारती और पार्टी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र विवेक ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर यह मांग रखी है। चिराग ने कहा कि रामविलास पासवान समेत बिहार से जुड़े कई ऐसे नाम हैं, जिनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बिहार ने देश को अनेक ऐसी महान विभूतियां दी हैं, जिन्होंने अपने कार्य, संघर्ष और सार्वजनिक जीवन के जरिए प्रदेश की पहचान को मजबूत किया। ऐसे लोगों की स्मृतियों को सुरक्षित रखना समाज की जिम्मेदारी है। चिराग के मुताबिक, किसी महापुरुष की प्रतिमा स्थापित करना केवल एक स्मारक बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके विचारों और जनसेवा से जुड़ी विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है।चिराग पासवान ने कहा कि बिहार में अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान देने वाले सभी प्रमुख लोगों को उचित सम्मान मिलना चाहिए।
उनका कहना है कि आने वाली पीढ़ियों को इन विभूतियों के संघर्ष और उपलब्धियों की जानकारी मिलनी चाहिए। इसके लिए उनकी स्मृति से जुड़े स्थलों और संस्थानों को विकसित करने तथा उनके नाम को सार्वजनिक जीवन में सम्मान देने की जरूरत है। इस बीच बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस मुद्दे को लेकर अपनी मांग सामने रखी है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय रघुवंश प्रसाद सिंह और स्वर्गीय रामविलास पासवान की राज्य में आदमकद प्रतिमाएं स्थापित करने की मांग की है। इसके साथ ही तेजस्वी यादव ने दोनों नेताओं की जयंती या पुण्यतिथि को राजकीय समारोह के रूप में घोषित करने का आग्रह किया है।
बिहार की धरती ने अनेक महान विभूतियों को जन्म दिया है, जिन्होंने अपने कर्म और योगदान से प्रदेश की पहचान को नई ऊंचाई दी। ऐसी विभूतियों की स्मृतियों को संजोना हमारी जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके संघर्ष और योगदान से प्रेरणा ले सकें।
इसी भावना के साथ कल हमारे बिहार… pic.twitter.com/WLt3gf1u3s
— Office Of Chirag Paswan (@officeofchirag) September 10, 2026
रामविलास पासवान बिहार की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वहीं रघुवंश प्रसाद सिंह भी बिहार के सार्वजनिक जीवन में लंबे समय तक सक्रिय रहे और ग्रामीण विकास सहित विभिन्न मुद्दों पर उनकी भूमिका रही। दोनों नेताओं के समर्थकों और राजनीतिक दलों की ओर से समय-समय पर उनके योगदान को याद करने और उनकी स्मृति को संरक्षित करने की मांग उठती रही है।
अब चिराग पासवान और तेजस्वी यादव की ओर से सामने आई मांगों के बाद बिहार में राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियों की स्मृति को संरक्षित करने का मुद्दा फिर चर्चा में है। दोनों नेताओं की मांगों में भले ही राजनीतिक संदर्भ अलग हों, लेकिन दोनों ने रामविलास पासवान की आदमकद प्रतिमा लगाने की जरूरत पर जोर दिया है। इसके साथ रघुवंश प्रसाद सिंह को भी इसी तरह सम्मान देने की मांग सामने आई है।
इस पहल के जरिए यह सवाल भी सामने आया है कि बिहार के सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले नेताओं और महापुरुषों की विरासत को किस तरह संस्थागत रूप से संरक्षित किया जाए। प्रतिमाओं की स्थापना और राजकीय समारोह जैसी मांगों का उद्देश्य उनके योगदान को सार्वजनिक स्मृति का हिस्सा बनाए रखना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां बिहार के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास से जुड़े इन महत्वपूर्ण नामों को जान सकें।