नई दिल्ली। UPI से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए आने वाले दिनों में डिजिटल पेमेंट के नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। पिछले कई वर्षों से जीरो-चार्ज यानी Zero-MDR मॉडल पर चल रहे Unified Payments Interface (UPI) में चुनिंदा बड़े कारोबारियों से Merchant Discount Rate (MDR) वसूलने की तैयारी की खबर सामने आई है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 40 बेसिस पॉइंट यानी 0.40 फीसदी MDR का प्रस्ताव विचाराधीन है। हालांकि, इसे अभी अंतिम नियम या लागू शुल्क नहीं माना जाना चाहिए। अंतिम व्यवस्था और पात्र कारोबारियों की श्रेणी को लेकर आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार है।
इस प्रस्ताव की सबसे अहम बात यह है कि इसका सीधा असर आम UPI यूजर पर पड़ने की संभावना कम बताई जा रही है। मौजूदा चर्चा के अनुसार ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यापारी भुगतान और निर्धारित वार्षिक टर्नओवर वाले कारोबारियों को MDR के दायरे में लाया जा सकता है। दूसरी ओर, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P ट्रांजैक्शन और छोटे कारोबारियों को प्रस्तावित शुल्क से बाहर रखने की बात सामने आई है।
आखिर क्या है UPI का 40 bps MDR प्रस्ताव?
Merchant Discount Rate यानी MDR वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी के भुगतान इकोसिस्टम में लिया जाता है। UPI के मामले में लंबे समय से Zero-MDR व्यवस्था लागू रही है। अब सरकार और भुगतान क्षेत्र से जुड़े संस्थानों के बीच बड़े व्यापारियों के कुछ UPI लेनदेन पर शुल्क वापस लाने को लेकर चर्चा चल रही है।
11 सितंबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, करीब 40 bps यानी 0.40 फीसदी MDR पर काम किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में इस शुल्क को अलग-अलग हिस्सेदारों के बीच बांटने की योजना बताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि 40 bps की व्यवस्था लागू होती है तो जारीकर्ता बैंक यानी Issuing Bank को लगभग 40 फीसदी हिस्सा मिल सकता है। वहीं Third-Party Application Provider यानी UPI ऐप और Acquiring Bank को करीब 30-30 फीसदी हिस्सा मिलने की चर्चा है। इसका मतलब 0.40 फीसदी MDR में लगभग 0.16 फीसदी हिस्सा Issuing Bank और करीब 0.12-0.12 फीसदी हिस्सा ऐप तथा Acquiring Bank को जा सकता है।
किन कारोबारियों पर पड़ सकता है असर?
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि आखिर यह शुल्क किस पर लगेगा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्ताव में ₹1 करोड़ से ₹1.5 करोड़ या उससे अधिक वार्षिक कारोबार वाले व्यापारियों को संभावित दायरे में रखने की चर्चा है। साथ ही ₹2,000 से अधिक के UPI merchant transactions पर MDR लागू करने का मॉडल विचाराधीन बताया गया है।
हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में टर्नओवर सीमा को लेकर कुछ अंतर है। कुछ रिपोर्टों में ₹1.5 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले कारोबारियों की बात कही गई है, जबकि अन्य रिपोर्टों में ₹1 करोड़ से ₹1.5 करोड़ के बीच की सीमा पर चर्चा का उल्लेख है। इसलिए जब तक NPCI या सरकार की ओर से अंतिम नियम जारी नहीं होता, किसी एक सीमा को अंतिम मानना सही नहीं होगा।
क्या आम आदमी के UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज?
आम UPI यूजर्स के लिए यह सबसे बड़ी चिंता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले पैसे को प्रस्तावित MDR से बाहर रखने की बात कही गई है। इसका अर्थ है कि दोस्त को पैसे भेजना, परिवार के सदस्य को रकम ट्रांसफर करना या अपने दूसरे बैंक खाते में UPI के जरिए पैसा भेजना इस प्रस्ताव का मुख्य लक्ष्य नहीं है।
छोटी दुकानों और कम टर्नओवर वाले व्यापारियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। यानी रोजमर्रा की खरीदारी में छोटे दुकानदार के QR Code को स्कैन करके UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर सीधे कोई नया शुल्क लगना प्रस्ताव का उद्देश्य नहीं बताया गया है।
यही वजह है कि इस खबर को “UPI बंद होगा” या “हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा” जैसी सुर्खियों में समझना गलत होगा। फिलहाल चर्चा चुनिंदा merchant transactions पर MDR लागू करने की है।
₹2,000 की सीमा को लेकर क्यों हो रही चर्चा?
UPI MDR की बहस में ₹2,000 की सीमा लगातार चर्चा में है। इसका एक कारण यह है कि सरकार की पिछली incentive scheme में छोटे व्यापारियों के लिए ₹2,000 तक के UPI भुगतान को विशेष प्रोत्साहन दिया गया था। वित्त मंत्रालय के अनुसार FY 2024-25 की योजना में छोटे व्यापारियों के ₹2,000 तक के BHIM-UPI P2M transactions पर Zero MDR और 0.15 फीसदी incentive का प्रावधान था। ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर incentive नहीं था, लेकिन उस योजना में MDR भी शून्य था।
इसलिए ₹2,000 की सीमा को मौजूदा संभावित MDR प्रस्ताव से जोड़कर देखा जा रहा है। Business Standard ने भी स्पष्ट किया है कि ₹2,000 मूल रूप से incentive व्यवस्था की सीमा थी, इसे अपने आप में कोई मौजूदा MDR शुल्क सीमा नहीं माना जा सकता।
Google Pay, PhonePe और Paytm को क्या फायदा?
यदि प्रस्तावित MDR व्यवस्था लागू होती है तो इसका असर UPI इकोसिस्टम में काम करने वाली कंपनियों पर भी पड़ेगा। Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे Third-Party Application Providers को संभावित revenue-sharing मॉडल में हिस्सा मिल सकता है।
मौजूदा रिपोर्ट के अनुसार 40 bps MDR में Third-Party App Provider को करीब 30 फीसदी हिस्सा देने की चर्चा है। इससे UPI पर निर्भर भुगतान कंपनियों के लिए एक नया revenue stream तैयार हो सकता है।
बैंकों के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण होगा। Zero-MDR मॉडल में UPI के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के बावजूद भुगतान से सीधे MDR revenue नहीं मिलता था। प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था से बैंक तकनीकी ढांचे, साइबर सुरक्षा और भुगतान प्रोसेसिंग से जुड़े खर्चों की भरपाई करने की दिशा में कुछ आय हासिल कर सकते हैं।
सरकार ने अभी क्या तय किया है?
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि 40 bps MDR को अभी अंतिम लागू शुल्क नहीं माना जाना चाहिए। मौजूदा जानकारी इसे एक प्रस्तावित या विचाराधीन व्यवस्था के रूप में पेश करती है। अंतिम MDR दर, कारोबारियों की पात्रता, ₹2,000 की सीमा, टर्नओवर मानदंड और शुल्क बांटने का तरीका आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा।
अगस्त 2026 में सामने आई रिपोर्टों में भी UPI के बड़े कारोबारियों के भुगतान पर 0.3 से 0.5 फीसदी तक MDR की संभावना की चर्चा हुई थी। वहीं P2P payments को मुफ्त रखने की बात कही गई थी।
छोटे दुकानदार और ग्राहक कितने प्रभावित होंगे?
अगर मौजूदा प्रस्तावित ढांचा लागू होता है तो रोजमर्रा के छोटे UPI भुगतानों पर असर सीमित रहने की उम्मीद है। चाय की दुकान, सब्जी विक्रेता, छोटे किराना दुकानदार या अन्य छोटे कारोबारियों को संभावित छूट से राहत मिल सकती है।
हालांकि बड़े कारोबारियों के लिए भुगतान की लागत बढ़ सकती है। यदि व्यापारी इस लागत को अपने कारोबार की कीमत में शामिल करते हैं तो कुछ क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष प्रभाव ग्राहकों तक पहुंच सकता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर ₹2,000 से अधिक UPI भुगतान पर ग्राहक से 0.40 फीसदी अतिरिक्त राशि अनिवार्य रूप से ली जाएगी।
निष्कर्ष यह है कि UPI पर बड़ा बदलाव जरूर चर्चा में है, लेकिन अभी इसे आम यूजर के लिए नया चार्ज समझना जल्दबाजी होगी। प्रस्ताव मुख्य रूप से बड़े कारोबारियों के चुनिंदा merchant transactions पर केंद्रित है। अंतिम तस्वीर NPCI और सरकार की आधिकारिक अधिसूचना आने के बाद ही साफ होगी।