नई दिल्ली। पैरों में दर्द, सूजन या भारीपन जैसी समस्या अक्सर सामान्य थकान, लंबे समय तक खड़े रहने या अधिक चलने-फिरने का नतीजा मानी जाती है। लेकिन कुछ मामलों में यही लक्षण शरीर में बन रहे ब्लड क्लॉट यानी खून के थक्के का संकेत हो सकते हैं। खासतौर पर पैरों की गहरी नसों में बनने वाले थक्के को डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) कहा जाता है। समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर यह स्थिति गंभीर रूप ले सकती है।
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में भी पैरों में होने वाले दर्द और सूजन को लेकर लोगों को सावधान किया गया है। पोस्ट में बताया गया है कि कभी-कभी पैरों में बनने वाला ब्लड क्लॉट आगे चलकर फेफड़ों तक पहुंच सकता है। हालांकि हर पैर का दर्द या सूजन DVT नहीं होता, इसलिए लक्षणों को देखकर खुद से बीमारी का निष्कर्ष निकालने के बजाय चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
क्या होता है डीप वेन थ्रोम्बोसिस?
डीप वेन थ्रोम्बोसिस ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर की किसी गहरी नस में खून का थक्का बन जाता है। यह थक्का आमतौर पर पैर के निचले हिस्से, जांघ या पेल्विस की नसों में बन सकता है। कुछ मामलों में हाथ में भी DVT हो सकता है।
DVT की खास बात यह है कि कई लोगों में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। अमेरिकी CDC के अनुसार करीब आधे लोगों में DVT के कोई लक्षण नजर नहीं आ सकते। वहीं जिन लोगों में लक्षण दिखाई देते हैं, उनमें प्रभावित पैर में सूजन, दर्द या छूने पर संवेदनशीलता, गर्माहट और त्वचा का लाल या बदरंग होना प्रमुख संकेत हो सकते हैं।
पैर में कौन से लक्षण खतरे की घंटी हैं?
अगर एक पैर में अचानक दूसरे पैर की तुलना में ज्यादा सूजन दिखाई दे, साथ में दर्द या संवेदनशीलता हो और त्वचा गर्म या लाल नजर आए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर जब इन लक्षणों का कोई स्पष्ट कारण, जैसे चोट, सामने न हो।
NHS के अनुसार DVT में अक्सर एक पैर में धड़कने जैसा दर्द, विशेषकर पिंडली या जांघ में, सूजन और त्वचा के रंग में बदलाव देखा जा सकता है। कुछ मामलों में नसें भी अधिक उभरी हुई दिखाई दे सकती हैं।
हालांकि इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से ब्लड क्लॉट ही है। मांसपेशियों की चोट, संक्रमण, नसों से जुड़ी अन्य समस्याएं और कई दूसरी स्थितियां भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं। इसलिए सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह और जरूरत पड़ने पर जांच जरूरी है।
सबसे बड़ा खतरा तब, जब थक्का फेफड़ों तक पहुंच जाए
DVT की सबसे गंभीर संभावित जटिलताओं में पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE) शामिल है। इसमें खून का थक्का या उसका कोई हिस्सा टूटकर रक्त प्रवाह के साथ फेफड़ों तक पहुंच सकता है और वहां रक्त वाहिका को ब्लॉक कर सकता है। यह जानलेवा स्थिति हो सकती है और इसमें तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है।
पल्मोनरी एम्बोलिज्म के संभावित संकेतों में अचानक सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, खासकर गहरी सांस लेने या खांसने पर बढ़ने वाला दर्द, तेज या अनियमित धड़कन, खांसी और कुछ मामलों में खून आना शामिल हो सकता है। चक्कर आना या बेहोशी भी गंभीर संकेत हो सकते हैं।
ऐसे लक्षण अचानक दिखाई दें तो इसे सामान्य गैस, थकान या कमजोरी मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। तत्काल आपात चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
किन लोगों में बढ़ सकता है ब्लड क्लॉट का खतरा?
DVT किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में इसका जोखिम बढ़ सकता है। लंबे समय तक बिना हिले-डुले बैठे रहना, लंबे सफर, अस्पताल में भर्ती होना या सर्जरी के बाद लंबे समय तक कम चलना-फिरना प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं।
इसके अलावा उम्र बढ़ना, मोटापा, पहले DVT हो चुका होना, कुछ गंभीर बीमारियां, कैंसर, गर्भावस्था और प्रसव के बाद की अवधि, हार्मोन आधारित दवाओं का इस्तेमाल तथा परिवार में ब्लड क्लॉट का इतिहास भी जोखिम को प्रभावित कर सकता है।
चार घंटे से ज्यादा लंबे सफर के दौरान लगातार बैठे रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है, खासकर उन लोगों में जिनमें पहले से अन्य जोखिम मौजूद हों। CDC के अनुसार लंबे सफर में बीच-बीच में पैरों को हिलाना और संभव हो तो नियमित अंतराल पर चलना मददगार हो सकता है।
बचाव के लिए क्या करें?
लंबे समय तक बैठे रहने की स्थिति में बीच-बीच में उठकर चलना, पैरों और पंजों को नियमित रूप से हिलाना और शरीर को लंबे समय तक एक ही स्थिति में रखने से बचना उपयोगी हो सकता है। लंबी यात्रा के दौरान पर्याप्त पानी पीने और अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर से सलाह लेने पर भी ध्यान देना चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति की हाल ही में सर्जरी हुई है, वह लंबे समय से बिस्तर पर है या पहले ब्लड क्लॉट की समस्या हो चुकी है, तो डॉक्टर से व्यक्तिगत जोखिम और बचाव के उपायों के बारे में जानकारी लेना बेहतर है।
कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?
अगर पैर में दर्द या सूजन के साथ अचानक सांस फूलने लगे, सीने में दर्द हो, खून वाली खांसी आए, दिल की धड़कन बहुत तेज हो, चक्कर आए या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है। ऐसे समय पर खुद से दवा लेने या लक्षणों के ठीक होने का इंतजार करने के बजाय तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
DVT की पुष्टि केवल लक्षण देखकर नहीं की जा सकती। डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच, जिसमें पैरों की नसों का अल्ट्रासाउंड भी शामिल हो सकता है, कराने की सलाह दे सकते हैं। इलाज का तरीका भी व्यक्ति की स्थिति और थक्के के स्थान व गंभीरता पर निर्भर करता है।
जरूरी सावधानी
पैरों में दर्द या सूजन को देखकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन अचानक, एकतरफा या बिना स्पष्ट कारण होने वाले लक्षणों को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। खासकर सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द जैसे लक्षण सामने आएं तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। यह खबर सामान्य जागरूकता के लिए है; किसी व्यक्ति में ब्लड क्लॉट की पुष्टि डॉक्टर की जांच से ही हो सकती है।