नई दिल्ली। शनिवार, 12 सितंबर 2026 की शाम देश-दुनिया की राजनीति, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, मनोरंजन और क्रिकेट से जुड़ी कई खबरों ने सुर्खियां बटोरीं। नई दिल्ली में चल रहे BRICS सम्मेलन के बीच पाकिस्तान को लेकर सामने आया संदेश चर्चा में है। वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी को लेकर एक बार फिर सवाल तेज हो गया है। इसके अलावा राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के पैर छूने और हाथ मिलाने की परंपरा को लेकर पूर्व राष्ट्रपति के एडीसी रहे मेजर ऋषभ सिंह सख्याल का जवाब भी चर्चा में है।
मनोरंजन जगत में अभिनेत्री ऐश्वर्या लक्ष्मी के कपड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर उठे सवाल और अभिनेत्री कृति सेनन से जुड़े पुराने विज्ञापन विवाद के बाद कपड़ों को लेकर छिड़ी बहस भी सुर्खियों में है। दूसरी ओर क्रिकेट में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर भी बड़ा सवाल उठ रहा है।
आइए जानते हैं शनिवार शाम की इन पांच प्रमुख खबरों के बारे में विस्तार से।
BRICS के मंच से पाकिस्तान को दिया गया बड़ा संदेश
नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन के दौरान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक BRICS देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए हमले की निंदा की।
पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई थी। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) पर लगाई गई थी। इसके बाद भारत की ओर से आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की मांग लगातार उठती रही है।
BRICS देशों की ओर से आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की अपील को भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। सम्मेलन में आतंकवाद से निपटने के लिए दोहरे मानदंडों को खारिज करने की बात भी सामने आई।
इस घटनाक्रम की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि BRICS का मंच दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं और प्रमुख देशों को एक साथ लाता है। ऐसे में आतंकवाद के मुद्दे पर सामूहिक रुख भारत की कूटनीतिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री का पैर क्यों नहीं छूते?
भारतीय राजनीति और सार्वजनिक जीवन में नेताओं के सम्मान के अलग-अलग तरीके देखने को मिलते हैं। कई लोग वरिष्ठ नेताओं के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं, लेकिन राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के साथ प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है।
इसी सवाल का जवाब पूर्व राष्ट्रपति के एडीसी रहे मेजर ऋषभ सिंह सख्याल ने दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति के एडीसी के तौर पर उनकी भूमिका के दौरान प्रोटोकॉल और औपचारिक शिष्टाचार का विशेष महत्व था।
दरअसल, राष्ट्रपति भारत के संवैधानिक प्रमुख होते हैं और उनके साथ मुलाकात के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। प्रधानमंत्री से मुलाकात में भी पद की गरिमा और आधिकारिक शिष्टाचार को ध्यान में रखा जाता है।
यही वजह है कि आम सामाजिक मुलाकातों में दिखने वाले पैर छूने जैसे व्यवहार की जगह आधिकारिक मुलाकातों में निर्धारित अभिवादन और औपचारिकता को प्राथमिकता दी जाती है।
इस सवाल ने सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींचा है, क्योंकि भारत में पैर छूना सम्मान और आशीर्वाद लेने की परंपरा से जुड़ा हुआ है। लेकिन संवैधानिक पदों के मामले में व्यक्तिगत श्रद्धा से ज्यादा आधिकारिक प्रोटोकॉल महत्वपूर्ण हो जाता है।
क्या मायावती ने चुन लिया अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी?
BSP प्रमुख मायावती को लेकर पार्टी के राजनीतिक भविष्य और उत्तराधिकारी का सवाल लंबे समय से चर्चा में रहा है। अब यह चर्चा उनके भतीजे आकाश आनंद और दूसरे भतीजे इशान को लेकर और तेज हो गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक मायावती ने पहले आकाश आनंद को लेकर अपना फैसला सुनाया था। इसके बाद पार्टी से जुड़े घटनाक्रम में आकाश आनंद को लेकर राजनीतिक अटकलें बढ़ीं। अब दूसरे भतीजे इशान को लेकर भी मायावती के फैसले की चर्चा शुरू हो गई है।
मायावती की राजनीति में परिवार और पार्टी संगठन के बीच संतुलन हमेशा चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में उनके किसी भी करीबी रिश्तेदार को लेकर लिया गया फैसला BSP के भविष्य की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि, किसी को औपचारिक रूप से राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किए जाने की बात और राजनीतिक गतिविधियों में किसी नेता की भूमिका बढ़ने की बात अलग-अलग चीजें हैं। इसलिए इस तरह की अटकलों को आधिकारिक घोषणा से अलग रखकर देखना जरूरी है।
फिलहाल मायावती की ओर से पार्टी के अगले नेतृत्व को लेकर जो भी स्पष्ट निर्णय सामने आएगा, उसका असर BSP की भविष्य की रणनीति पर पड़ सकता है।
‘क्या संस्कृति सिर्फ महिला के कपड़ों में होती है?’
बॉलीवुड में कपड़ों को लेकर होने वाली बहस एक बार फिर चर्चा में है। अभिनेत्री कृति सेनन को कुछ समय पहले रक्षाबंधन के मौके पर एक विज्ञापन में अपने कपड़ों को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा था। विवाद बढ़ने के बाद उस विज्ञापन को हटाए जाने की खबर सामने आई थी।
इसके बाद अभिनेत्री ऐश्वर्या लक्ष्मी के एक डायमंड ज्वेलरी कार्यक्रम में पहने गए कपड़ों को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चा हुई। रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उनके पहनावे पर सवाल उठाए।
इसी तरह की बहस के बीच ऐश्वर्या लक्ष्मी ने अपने हालिया इंटरव्यू में कपड़ों को लेकर सवाल उठाने वालों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संस्कृति का आकलन केवल महिलाओं के कपड़ों से किया जाना चाहिए।
यह मुद्दा केवल मनोरंजन जगत तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया के दौर में सेलिब्रिटीज के पहनावे, निजी पसंद और सार्वजनिक छवि को लेकर अक्सर बहस होती रहती है। एक वर्ग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़ता है, जबकि दूसरा वर्ग सार्वजनिक मंच पर सांस्कृतिक संवेदनशीलता की बात करता है।
ऐश्वर्या की प्रतिक्रिया ने इसी पुराने सवाल को फिर सामने ला दिया है कि किसी महिला के कपड़ों को उसकी संस्कृति, चरित्र या सामाजिक मूल्यों से जोड़ना कितना उचित है।
वैभव सूर्यवंशी की जगह पक्की?
क्रिकेट की दुनिया में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर भी चर्चा तेज है। कम उम्र में क्रिकेट के बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाने वाले इस युवा खिलाड़ी ने क्रिकेट प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित किया है।
वैभव को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट में अपनी जगह पक्की कर पाएंगे। युवा खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती लगातार प्रदर्शन करना और दबाव के बीच खुद को साबित करना होती है।
वैभव की बल्लेबाजी और उनकी कम उम्र ने उन्हें पहले ही क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बना दिया है। हालांकि, किसी खिलाड़ी की स्थायी जगह केवल शुरुआती प्रदर्शन के आधार पर तय नहीं होती। चयन प्रक्रिया, घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन, फिटनेस और लगातार रन बनाना आगे उनकी राह तय करेगा।
भारतीय क्रिकेट में पहले भी कई युवा खिलाड़ियों ने कम उम्र में शानदार प्रदर्शन कर सुर्खियां बटोरी हैं। कुछ खिलाड़ी लंबे समय तक टिके, जबकि कुछ शुरुआती सफलता के बाद अपेक्षाओं के दबाव में पीछे रह गए। इसलिए वैभव के मामले में भी निरंतरता सबसे अहम होगी।
एक नजर में शनिवार शाम की पांच बड़ी खबरें
शनिवार शाम की इन खबरों को देखें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर BRICS सम्मेलन और आतंकवाद के खिलाफ संदेश सबसे अहम घटनाक्रमों में शामिल रहा। घरेलू राजनीति में मायावती के उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा ने BSP के भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं।
वहीं राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से जुड़े प्रोटोकॉल को लेकर सामने आया जवाब सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। मनोरंजन जगत में महिलाओं के पहनावे और संस्कृति को लेकर नई बहस शुरू हुई। क्रिकेट में वैभव सूर्यवंशी के भविष्य और टीम में उनकी संभावित जगह को लेकर प्रशंसकों की नजर बनी हुई है।
इन सभी घटनाक्रमों में एक बात समान है—इनका असर सीधे तौर पर राजनीति, समाज, मनोरंजन और खेल से जुड़े बड़े सवालों पर पड़ता है। आने वाले दिनों में इन खबरों से जुड़े आधिकारिक बयान और नए घटनाक्रम तस्वीर को और स्पष्ट कर सकते हैं।