सुलतानपुर में 272 करोड़ का क्लस्टर, बदलेंगे उद्योग के हालात

लखनऊ/सुलतानपुर। उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के पास इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) विकसित करने के प्रस्ताव को प्रदेश मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के लिए करीब 272.25 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई है। […]

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  • September 16, 2026 10:08 am IST, Published 1 hour ago

लखनऊ/सुलतानपुर। उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के पास इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) विकसित करने के प्रस्ताव को प्रदेश मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के लिए करीब 272.25 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई है। परियोजना का उद्देश्य सुलतानपुर और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों, विनिर्माण तथा लॉजिस्टिक्स से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के पास बनेगा औद्योगिक क्लस्टर

प्रस्तावित IMLC को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के समीप विकसित किया जाएगा। एक्सप्रेसवे से सीधी कनेक्टिविटी इस परियोजना का महत्वपूर्ण पहलू मानी जा रही है, क्योंकि इससे औद्योगिक इकाइयों तक कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही के लिए सड़क संपर्क उपलब्ध होगा। सरकार की औद्योगिक कॉरिडोर योजना के तहत विकसित होने वाला यह क्लस्टर सुलतानपुर को विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना है।

मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद अब निर्माण एजेंसी के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके लिए ग्लोबल टेंडर आमंत्रित किया जाना है। एजेंसी के चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बुनियादी ढांचे से जुड़े निर्माण कार्य शुरू किए जाएंगे।

272.25 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होगा IMLC

परियोजना के लिए स्वीकृत राशि 27225.33 लाख रुपये यानी 272.25 करोड़ रुपये बताई गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार निर्माण कार्य से संबंधित खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। परियोजना में केंद्र सरकार की वित्तीय भागीदारी प्रस्तावित नहीं बताई गई है।

यह राशि मुख्य रूप से क्लस्टर के लिए जरूरी आधारभूत ढांचे के विकास से जुड़ी है। औद्योगिक क्लस्टर बनने के बाद यहां विभिन्न विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के लिए सुविधाएं विकसित किए जाने की योजना है।

उद्योगों के लिए तैयार होगा नया आधार

सुलतानपुर में बड़े औद्योगिक ढांचे की स्थापना से स्थानीय स्तर पर उद्योगों के लिए जमीन और आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। सरकार की योजना औद्योगिक कॉरिडोर के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने की है, जहां एक्सप्रेसवे जैसी परिवहन सुविधाओं का लाभ उपलब्ध है।

IMLC मॉडल में विनिर्माण गतिविधियों के साथ लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को भी एकीकृत करने पर जोर रहता है। इससे उद्योगों के लिए माल की ढुलाई, भंडारण और आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित गतिविधियों को एक ही औद्योगिक क्षेत्र में विकसित करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, परियोजना की वास्तविक आर्थिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बुनियादी ढांचा तैयार होने के बाद कितनी औद्योगिक इकाइयां यहां स्थापित होती हैं और कितना निजी निवेश आता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में सुलतानपुर क्लस्टर के लिए किसी विशेष निजी कंपनी के निवेश की अंतिम प्रतिबद्धता सार्वजनिक नहीं की गई है।

स्थानीय रोजगार को लेकर भी उम्मीदें

औद्योगिक क्लस्टर विकसित होने के साथ सुलतानपुर के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना जताई जा रही है। निर्माण चरण में भी अलग-अलग क्षेत्रों में काम के अवसर पैदा होंगे, जबकि भविष्य में औद्योगिक इकाइयों के संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

इसके अलावा स्थानीय स्तर पर परिवहन, वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग, सर्विस सेक्टर और अन्य सहायक कारोबारों को भी औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि रोजगार की वास्तविक संख्या फिलहाल निर्धारित नहीं की गई है, इसलिए इसे संभावित अवसर के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी बन सकती है बड़ी ताकत

सुलतानपुर IMLC के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की निकटता एक अहम आधार है। एक्सप्रेसवे के माध्यम से क्षेत्र को पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से सड़क संपर्क मिलता है। औद्योगिक इकाइयों के लिए परिवहन लागत और समय को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में सड़क कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण होती है।

यही वजह है कि राज्य सरकार एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दे रही है। सुलतानपुर का प्रस्तावित क्लस्टर इसी व्यापक औद्योगिक कॉरिडोर दृष्टिकोण का हिस्सा है।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण निर्माण एजेंसी का चयन है। इसके लिए वैश्विक निविदा प्रक्रिया अपनाई जाएगी। एजेंसी का चयन होने के बाद परियोजना के बुनियादी ढांचे से जुड़े निर्माण कार्य शुरू होंगे। सरकार ने परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की बात कही है।

इस तरह सुलतानपुर में 272.25 करोड़ रुपये की यह परियोजना फिलहाल स्वीकृति और क्रियान्वयन की तैयारी के चरण में है। आने वाले समय में इसका प्रभाव इस बात से स्पष्ट होगा कि क्लस्टर में कितनी औद्योगिक इकाइयां आती हैं, कितना निवेश होता है और स्थानीय स्तर पर कितने रोजगार के अवसर सृजित होते हैं।

स्रोत: उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और प्रकाशित सरकारी निर्णय संबंधी विवरणों के आधार पर।

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