इंफाल/गुवाहाटी। मणिपुर में एक बार फिर हिंसा और तनाव का माहौल बना हुआ है। इस बार संघर्ष मैतेई और कुकी समुदाय के बीच नहीं, बल्कि कुकी और नगा समुदायों के बीच बढ़ती हिंसा को लेकर है। बीते चार दिनों में हथियारबंद हमलों में चार महिलाओं समेत छह कुकी लोगों की हत्या की गई है। कुकी संगठनों ने इन घटनाओं के पीछे नगा उग्रवादियों का हाथ होने का आरोप लगाया है।
हिंसा और तनाव के कारण राज्य के पहाड़ी इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। करीब सात दिनों से कई इलाकों में स्कूल और बाजार बंद हैं। कई गांवों में लोगों ने घरों से बाहर निकलना बंद कर दिया है। जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित होने के साथ मेडिकल इमरजेंसी में भी लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
बुधवार को पहाड़ी जिले कांगपोकपी में स्थानीय कुकी लोगों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की स्थिति बनी। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। कई इलाकों में नाकेबंदी बढ़ाई गई है और आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
नगा समुदाय के चावांगकिनिंग लियांगमाई गांव में भी हिंसा की घटनाएं सामने आईं। कई घरों में आग लगाए जाने और फायरिंग किए जाने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर घरों की दीवारों पर गोलियों के निशान भी देखे गए।
लगातार बंद और नाकेबंदी के कारण पहाड़ी इलाकों में जरूरी सामान की उपलब्धता प्रभावित हुई है। कांगपोकपी निवासी 53 वर्षीय मार्गरेट के अनुसार, जिला मुख्यालय में होने के कारण उन्हें किसी तरह जरूरी सामान मिल पा रहा है, लेकिन अंदरूनी गांवों में स्थिति काफी खराब है। कुछ गांवों में चीनी की कीमत 400 से 450 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
स्थानीय निवासी डेविड ने बताया कि लोग खेतों तक जाने से भी डर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी समय गोलीबारी होने का खतरा बना रहता है। सड़कों और राजमार्गों पर कई जगह नाकेबंदी और जांच चौकियां बनाई गई हैं।
उनके मुताबिक बिना सुरक्षा एस्कॉर्ट के निजी वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। मेडिकल इमरजेंसी या एयरपोर्ट जाने के लिए भी कई जगह स्थानीय अधिकारियों से अनुमति लेनी पड़ रही है।
मंगलवार को तामेंगलोंग जिले के लीसांगफाई गांव में दो कुकी महिलाओं की गोली मारकर हत्या किए जाने की बात सामने आई। इसके अलावा पिछले चार दिनों में चार अन्य कुकी लोगों की भी हत्या हुई है। कुकी संगठनों ने इन हत्याओं के लिए नगा उग्रवादी संगठनों को जिम्मेदार ठहराया है।
मणिपुर के उखरुल, सेनापति और तामेंगलोंग जैसे जिले नगा बहुल हैं, जबकि चूराचांदपुर, कांगपोकपी और फिरजॉल में कुकी आबादी अधिक है। कांगपोकपी समेत कुछ जिलों में दोनों समुदायों की आबादी साथ-साथ रहती है। ऐसे इलाकों में तनाव बढ़ने से हिंसा का खतरा भी बना हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में लिटन गांव में हिंसा शुरू होने के बाद से कुकी-नगा संघर्ष में अब तक करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार जारी तनाव ने पहाड़ी क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है।
इस बीच तांगखुल नगा समुदाय के प्रमुख संगठन यूनाइटेड नगा काउंसिल ने आर्थिक नाकेबंदी की है। संगठन के सचिव एच. जेम्स हाऊ के अनुसार, हाईवे पर आवाजाही को रोक दिया गया है और लोगों को गुजरने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
हिंसा के बीच सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है, लेकिन स्थानीय लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित आवाजाही, जरूरी सामान की उपलब्धता और चिकित्सा सहायता तक पहुंच की बनी हुई है। राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में तनाव कम करने और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए प्रशासन के सामने अब सुरक्षा के साथ-साथ दोनों समुदायों के बीच संवाद बहाल करने की चुनौती है।