तमिलनाडु में 12 हजार शंखों से बनी भव्य गणेश प्रतिमा

तमिलनाडु के चेन्नई स्थित कोलाथुर इलाके में गणेश उत्सव के दौरान स्थापित की गई एक विशाल प्रतिमा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। करीब 40 फीट ऊंची इस विशेष गणेश प्रतिमा को हजारों सफेद शंखों से तैयार किया गया है। प्रतिमा की अनोखी बनावट और विशाल आकार को देखने के लिए बड़ी संख्या […]

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  • September 14, 2026 3:35 pm IST, Published 4 minutes ago

तमिलनाडु के चेन्नई स्थित कोलाथुर इलाके में गणेश उत्सव के दौरान स्थापित की गई एक विशाल प्रतिमा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। करीब 40 फीट ऊंची इस विशेष गणेश प्रतिमा को हजारों सफेद शंखों से तैयार किया गया है। प्रतिमा की अनोखी बनावट और विशाल आकार को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। धार्मिक आस्था के साथ कलात्मकता का यह अनूठा मेल स्थानीय लोगों और यहां आने वाले भक्तों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

कोलाथुर में स्थापित इस गणेश प्रतिमा की सबसे खास बात इसके निर्माण में इस्तेमाल किए गए सफेद शंख हैं। जानकारी के मुताबिक प्रतिमा को लगभग 12 हजार सफेद शंखों की मदद से सजाकर तैयार किया गया है। सामान्य तौर पर गणेश प्रतिमाओं को मिट्टी, धातु, फूलों या दूसरे पारंपरिक माध्यमों से बनाया जाता है, लेकिन शंखों से तैयार की गई इतनी विशाल प्रतिमा इसे अलग पहचान देती है। दूर से देखने पर सफेद शंखों की परत प्रतिमा को बेहद आकर्षक रूप देती है।

गणेश भगवान को समर्पित इस प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना लगातार जारी है। धार्मिक उत्सव के माहौल के बीच प्रतिमा के आसपास लोगों की भीड़ देखी जा रही है। भक्त भगवान गणेश के दर्शन करने के साथ इस अनूठी कलाकृति को भी निहार रहे हैं। कई लोगों के लिए यह प्रतिमा आस्था के साथ-साथ भारतीय कला और रचनात्मकता का उदाहरण भी बन गई है।

40 फीट ऊंची प्रतिमा का आकार भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। इतनी बड़ी प्रतिमा को हजारों शंखों से तैयार करना अपने आप में मेहनत और सावधानी का काम माना जा सकता है। प्रत्येक शंख को प्रतिमा के स्वरूप के अनुरूप व्यवस्थित किया गया है, जिससे पूरी आकृति में एकरूपता दिखाई देती है। सफेद रंग के कारण प्रतिमा का स्वरूप और भी भव्य नजर आता है।

गणेश उत्सव के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में भगवान गणेश की आकर्षक और अनूठी प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। कहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली प्रतिमाएं बनाई जाती हैं तो कहीं स्थानीय कला और संस्कृति को मूर्त रूप दिया जाता है। कोलाथुर की यह प्रतिमा भी इसी परंपरा में अपनी अलग पहचान बना रही है। शंखों के इस्तेमाल ने इसे सामान्य गणेश प्रतिमाओं से अलग कर दिया है।

धार्मिक दृष्टि से भी शंख का भारतीय परंपरा में विशेष महत्व माना जाता है। पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में शंख का इस्तेमाल लंबे समय से होता आया है। ऐसे में हजारों सफेद शंखों से गणेश प्रतिमा तैयार किए जाने ने इस आयोजन की विशेषता को और बढ़ा दिया है। श्रद्धालु इसे भगवान गणेश के प्रति अपनी आस्था और समर्पण के एक अनोखे रूप के तौर पर देख रहे हैं।

प्रतिमा की तस्वीरें लोगों के बीच आकर्षण का कारण बन रहे हैं। विशाल आकार और सफेद रंग के कारण यह प्रतिमा दूर से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। स्थानीय स्तर पर यह आयोजन धार्मिक उत्सव के साथ एक दृश्य आकर्षण में भी बदल गया है। परिवारों के साथ आने वाले श्रद्धालु दर्शन करने के अलावा प्रतिमा को देखने और उसकी विशेषता को समझने में भी रुचि दिखा रहे हैं।

कोलाथुर में स्थापित 40 फीट ऊंची यह गणेश प्रतिमा इस बात का उदाहरण है कि धार्मिक आयोजनों में आस्था के साथ रचनात्मकता किस तरह जुड़ सकती है। 12 हजार सफेद शंखों से तैयार की गई इस प्रतिमा ने गणेश उत्सव को एक अलग दृश्य पहचान दी है। आने वाले दिनों में भी इसके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने की उम्मीद है। फिलहाल यह अनोखी प्रतिमा कोलाथुर में लोगों के बीच आकर्षण और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।

 

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