विदुषी सीता मिश्रा जयंती पर प्रो. सीमा सिंह को सेवा सम्मान-2026

लखनऊ : विदुषी सीता मिश्रा जी की जयंती पर उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार में “विदुषी सीता मिश्रा सेवा सम्मान और ‘लोकरंग’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय की पहली महिला कुलपति प्रो. सीमा सिंह को उनके शैक्षिक और सामाजिक क्षेत्र के विशिष्ट योगदान हेतु प्रतिष्ठित […]

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  • September 17, 2026 11:35 am IST, Published 2 hours ago

लखनऊ : विदुषी सीता मिश्रा जी की जयंती पर उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार में “विदुषी सीता मिश्रा सेवा सम्मान और ‘लोकरंग’ का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय की पहली महिला कुलपति प्रो. सीमा सिंह को उनके शैक्षिक और सामाजिक क्षेत्र के विशिष्ट योगदान हेतु प्रतिष्ठित “विदुषी सीता मिश्रा सेवा सम्मान-2026” से अलंकृत किया गया।

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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस अवसर पर भेजे अपने संदेश में कहा कि,विदुषी सीता मिश्रा जी का जीवन सेवा, शिक्षा, संस्कार और समाज के प्रति समर्पण की गाथा रहा है। उन्होंने सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने के साथ-साथ शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध लेखक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रामजी भाई ने , नारी के, परिवार और संस्कार पर प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि, स्त्री सबको एक सूत्र में बांधकर सर्वागीण विकास करने का सामर्थ्य रखती है। उन्होंने विदुषी सीता जी के संस्मरण साझा करते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मौजूद लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने, ऐसे आयोजनों को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा, कि नई पीढ़ी को प्रगति के साथ परंपराओं का पालन करने की भी जरूरत है ।

विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान ने कहा कि शिक्षा के द्वारा ही व्यक्ति वर्ग परिवर्तन कर सकता है। शिक्षक का सम्मान समाज का सम्मान होता है। वरिष्ठ आईएएस डॉ चंद्रभूषण त्रिपाठी ने, परिवार को प्रथम पाठशाला बताते हुए, सभी से अपनी बोली और संस्कृति पर गर्व करने की बात कही। उन्होंने संस्कृत भाषा की विशेषताओं की चर्चा करते हुए उसके अधिक से अधिक प्रयोग की अपील की।

वरिष्ठ पत्रकार और पर्यावरणविद राजेश राय ने, विदुषी सीता जी से जुड़े कई संस्मरण साझा करते हुए कहा कि, हर किसी की, माँ की तरह चिंता करना उनकी स्वाभाविक प्रकृति थी। उन्होंने कमजोर वर्ग के बच्चों के उत्थान के लिए अतुलनीय प्रयास किए। सामाजिक, धार्मिक आयोजनों में भी उनकी विशेष सहभागिता रहती थी। श्री राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों के रहने, खाने की व्यवस्था करने में सीता जी की प्रमुख भूमिका रही।

लखनऊ नगर निगम के कार्यकारिणी उपाध्यक्ष सुशील तिवारी “पम्मी” ने विदुषी सीता जी से पारिवारिक जुड़ाव की चर्चा की।

उत्तर प्रदेश फिल्मबंधु के पूर्व संयुक्त सचिव राम मनोहर त्रिपाठी ने सीता जी की सहनशीलता और सामाजिक योगदान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि हम लोग आज जहां तक पहुंचे हैं, उसके पीछे सिर्फ परिवार और शिक्षा का ही योगदान है।

कार्यक्रम में राष्ट्रधर्म पत्रिका के निदेशक सर्वेशचन्द्र द्विवेदी , अखिल भारतीय साहित्य परिषद के महामंत्री पवनपुत्र बादल, प्रसिद्ध अर्थ शास्त्री प्रो ए.पी तिवारी , पूर्व अपर महाधिवक्ता ज्योति सिक्का , दिल्ली प्रेस के यू.पी. ब्यूरोचीफ शैलेन्द्र सिंह , कमलेश त्रिपाठी समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे । इस अवसर पर कविगोष्ठी में ओज के कवि मनुब्रत बाजपेई , आनंद अखिल , देवेश द्विवेदी देवेश आदि कवियों ने अपनी रचनाओं से लोगों को संस्कार के प्रति प्रेरित किया।

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